विधानसभा चुनाव का राहत कार्यों पर असर पड़ना तय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कश्मीर में बाढ़ के बाद पैदा हुए हालात के बीच विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से राहत कार्यों पर असर पड़ना तय है। कश्मीर संभाग में जिला और संभागीय प्रशासन को अब दोहरी भूमिका निभानी पड़ रही है।
जिलाधीश स्तर के अधिकारी को जिला निर्वाचन अधिकारी के साथ राहत कार्यों की समीक्षा का काम भी देखना पड़ रहा है। यह बात दीगर है कि चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया से जुड़े अफसरों को आचार संहिता लागू होने के बावजूद राहत कार्यों में दखल नहीं देने की हिदायतें भी जारी की हैं।
बाढ़ प्रभावित जिलों श्रीनगर, बडगाम, पुलवामा, कुलगाम, शोपियां और अनंतनाग में राहत कार्यों की प्रक्रिया धीमी होने की शिकायतें जिला प्रशासन के पास पहुंचनी शुरू हो गई हैं। कश्मीर में सर्दी का मौसम शुरू होने की वजह से चुनाव आयोग ने पहले चरणों में मतदान कराने का शेडयूल जारी किया है।
बाढ़ राहत का कार्य हो सकता है प्रभावित
लिहाजा सभी जिलों का प्रशासनिक अमला चुनाव की तैयारियों में जुट गया हैं। आचार संहिता की वजह से राहत कार्यों के लिए सियासी दखलंदाजी बंद है। कश्मीर संभाग के मंडलायुक्त रोहित कंसल का कहना है कि उन्होंने राहत कार्यों की समीक्षा और निगरानी के लिए बाकायदा विशेष सेल का गठन संभागीय स्तर पर किया है।
चुनाव की प्रक्रिया का राहत कार्यों पर असर नहीं पड़ने नहीं दिया जाएगा। जहां पर कुछ अधिक करने की जरूरत महसूस होगी चुनाव आयोग अथवा राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से इसकी इजाजत ली जाएगी।
नेकां के कश्मीर संभाग के अध्यक्ष और विधायक नसीर असलम वानी का कहना है कि उन्होंने सियासत को दूर रखते हुए इंसानी नजरिये से चुनाव आयोग से विधानसभा चुनाव स्थगित करने की मांग की थी।
श्रीनगर शहर के राजबाग, इखराज पोरा, जवाहर नगर, कुरसू आदि इलाकों में अब भी लोग बाढ़ के सदमे से उबर नहीं सके हैं। अब आचार संहिता लागू हो गई हैं, वह कुछ करेंगे तो आचार संहिता का उल्लंघन होगा। अब अवाम को उन सियासी दलों से हिसाब मांगना चाहिए जो जल्द राज्य विधानसभा चुनाव के हक में थे।