कारगिल: विस्फोट के साथ फटी झील, 9 पुल बहे
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कारगिल के जंस्कार इलाके में फुकटल नदी में पहाड़ गिरने से बनी कृत्रिम झील कल सुबह दो भीषण विस्फोटों (8 बजे और 10.40 बजे) के साथ फट पड़ी। इलाके में जबरदस्त बाढ़ आई हुई है। इस क्षेत्र के 29 गांव पहले ही खाली करा लिए गए थे, इसलिए अभी तक किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।
निम्मो बाजगो, चुटुक व एलची पन बिजलीघर बंद किए जा चुके हैं। इस इलाके में यह खतरा कई महीनों से मंडरा रहा था। अमर उजाला ने फरवरी में ही चेता दिया था कि कारगिल में इस बार दुश्मन से नहीं कुदरत से खतरा है। बर्फ पिघलते ही झील में विस्फोट हो सकता है।
कृत्रिम झील में विस्फोट को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए गए तमाम इंतजाम नाकाफी साबित हुए। जंस्कार तथा आस-पास के इलाके भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। नौ पुल टूट और दर्जनों पुलियां टूट गईं हैं। तीन हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
बन गया था 61 मीटर ऊंचा बांध
लेह-श्रीनगर मार्ग बंद कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर लोगों से गांव खाली करने को कहा है। राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं। डीसी कारगिल हसन खान का कहना है कि जनहानि नहीं हुई है, लेकिन आधारभूत ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
इस इलाके में पादुम से करीब 90 किलोमीटर दूर फुकटल (सरप) नदी में भू स्खलन से गिरे पहाड़ के हिस्से के कारण करीब 61 मीटर ऊंचा बांध बन गया था। इसके पीछे दस किलोमीटर से भी ज्यादा लंबाई में एक कृत्रिम झील बन गई। विश्व प्रसिद्ध फुटकल गोंफा भी पादुम और कृत्रिम झील के बीच में ही है।
इसके साथ ही प्रसिद्ध चदर ट्रैक भी है जिसे इस खतरे के बाद बंद कर दिया गया था। वीरवार को सुबह 8:10 बजे कृत्रिम झील में पहला विस्फोट हुआ। देखते ही देखते आस पास के गांवों में पानी भर गया। फुकटल से 90 किलोमीटर दूर पादुम गांव भी जलमग्न हो गया है। लोगों ने अपने घर छोड़ दिए हैं।
खतरा टालने के लिए क्या-क्या किया
लद्दाख के निचले इलाकों में प्रशासन और सुरक्षा बलों को बचाव कार्य के लिए लगाया गया है। जम्मू कश्मीर के लद्दाख मामलों और सहकारिता मंत्री शेरिंग दोरजे ने बताया कि कृत्रिम झील के फटने से नौ पुलों को भारी क्षति पहुंची है।
मंत्री का कहना है कि बाढ़ जंस्कार क्षेत्र से शुरू होकर लेह तक पहुंचने के बीच काफी समय मिलने से लोगों और प्रशासन को तैयार होने का मौका मिल गया। हालात नियंत्रण में है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति के साथ ही सेना ने भी क्षेत्र का दौरा कर स्थिति की जानकारी ली थी। बाद में विचार विमर्श के बाद यह तय किया गया था कि ब्लाकेज हटाने के लिए नियंत्रित विस्फोट किए जाएंगे।
पिछले महीने सेना ने 175 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल करते हुए 75 मीटर लंबा चैनल बनाया था। यह दो मीटर गहरा तथा दो मीटर चौड़ा था।