'बुरहान को मारने के बजाय पकड़ा जाता तो कश्मीर में शिक्षा प्रभावित न होती'
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यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है। एक आतंकी के मारे जाने पर पिछले चार माह से कश्मीर हिंसा से जल रहा है। ऐसे में हमें कश्मीर की रणनीति पर दोबारा सोचने की जरूरत है। प्रो. शर्मा बुधवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे।
कश्मीर में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके प्रो. शर्मा ने एक शिक्षक के तौर पर कहा कि कश्मीर के युवा भविष्य को लेकर संजीदा हैं। वे अपने हक के लिए हमेशा लड़ने को तैयार रहते हैं।
'खतरा बन चुके आतंकियों को मारा जाना ठीक'
ऐसी क्या बात हो गई कि पिछले कई महीनों से युवा कालेजों और स्कूलों में जाना नहीं चाहते हैं। कश्मीर समस्या का 70 वर्ष से समाधान नहीं निकल पाया है। हमें इससे सीख लेनी चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में राज्य विभाजित होता रहा है।
समाज के लिए खतरा बन चुके आतंकियों को मारा जाना ठीक है। लेकिन, घाटी में लोगों का आतंकियों के लिए सब कुछ त्याग देने पर भी सोचना होगा। इस दौरान प्रो. शर्मा ने विश्वविद्यालय को ए प्लस श्रेणी का दर्जा मिलने पर फैकल्टी और अन्य स्टाफ को बधाई दी। उन्होंने विवि की उपलब्धियां भी गिनाईं।