पहली बार नहीं भिड़े उमर-महबूबा, दोनों के बीच पहले भी मच चुका है घमासान, पढ़िए यह ट्विटर वार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला नजरबंद हैं। नजरबंदी के दौरान ही पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस(नेकां) उपप्रधान उमर अब्दुल्ला के बीच कहासुनी हो गई। कहासुनी इतनी ज्यादा बढ़ गई कि दोनों नेताओं को अलग-अलग करना पड़ा।
इस कहासुनी की वजह यह थी कि दोनों नेता एक-दूसरे पर घाटी में बीजेपी को लाने व फलने-फूलने का आरोप लगा रहे थे। आपको बता दें कि दोनों के बीच यह कोई पहली नोकझोंक नहीं है। इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच भयंकर वाक-युद्ध हो चुका है। दोनों एक दूसरे को नसीहतों का पाठ पढ़ा चुके हैं।
बात उस दिन की है जब देश में तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बिल पेश किया गया। राज्यसभा में विपक्ष का संख्या बल ज्यादा होने के बावजूद यह बिल आसानी से पारित हो गया। बिल पेश होने के बाद सदन में अनुपस्थित और वाकआउट करने वाले सांसदों की एक लंबी सूची थी। इनमें सबसे चौंकाने वाले दो नाम पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) सांसदों के भी थे। यह तब है जब जून 2018 में राज्य में भाजपा गठबंधन से अलग होने के बाद पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती हमेशा भाजपा पर गरजती रहीं।
दोनों के बीच ट्विटर वार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीडीपी के सांसदों द्वारा सदन में गैर हाजिर रहना राज्य में भविष्य में भाजपा के साथ पुन: गठबंधन की संभावनाओं को फिर से जीवित करने की दिशा में पहला व मजबूत कदम है। बता दें कि महबूबा मुफ़्ती पहले से ही तीन तलाक बिल का विरोध कर रही थीं।
उन्होंने कई बार दावा किया कि भाजपा इस कानून के माध्यम से हमारे घरों में प्रवेश कर रही है। राज्य में भाजपा विरोधी नीति अपनाने वाली महबूबा मुफ्ती आज के इस दांव से सवालों के घेरे में फंस गई हैं। स्थानीय लोग पीडीपी सांसदों के इस कदम से अचंभित हैं। गौरतलब है कि उच्च सदन में हुई वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 99 जबकि खिलाफ 84 वोट पड़े।
नेशनल कांफ्रेंस उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी महबूबा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस मुद्दे पर दोनों के बीच ट्विटर वार शुरू हो गया।
महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट में लिखा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही अवैध घोषित किए जाने के बाद से विशेष रूप से ट्रिपल तालक बिल को पारित करने की आवश्यकता को समझने में विफल हूं। यह मुसलमानों को दंड देने के लिए अनुचित हस्तक्षेप प्रतीत होता है। अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति को देखते हुए क्या यह वास्तव में प्राथमिकता होना चाहिए था।
उमर साहब अपनी नैतिकता के ऊंचे घोड़ों से नीचे उतरें
उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट के जवाब में लिखा, महबूबा मुफ्ती जी, आप ट्वीट करने से पहले यह देखें कि आपके सदस्यों ने बिल पर कैसे वोट किया। मैं समझता हूं कि उन्होंने सरकार को बिल पास करने के लिए जरूरी नंबरों में मदद की। आप सरकार की सहायता नहीं कर सकते हैं और फिर पास होने की आवश्यकता को समझने में विफल रहते हैं।
इसके जवाब में महबूबा ने ट्वीट में लिखा, उमर साहब मेरा सुझाव है कि आप अपनी नैतिकता के ऊंचे घोड़ों से नीचे उतरें क्योंकि यह आपकी अपनी पार्टी थी जिसने 1999 में भाजपा के खिलाफ वोट देने के लिए सोज साहब को निष्कासित कर दिया था। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि संसद से गैर हाजिर रहना अनिवार्य रूप से नो वोट है।
जम्मू-कश्मीरः नजरबंदी के दौरान भिड़े उमर और महबूबा, एक दूसरे पर लगाए गंभीर आरोप
उमर ने ट्वीट के जवाब में लिखा, मैडम बीस साल पहले की एक घटना को याद कर रही हैं, आप पीडीपी को बचाने के लिए सबसे अच्छा कदम है इसलिए आप स्वीकार कर रही हैं कि आपने अपने सांसदों को गैर हाजिर रहने का निर्देश दिया। गैर हाजिर रहना नो वोट नहीं है, एक नो वोट ही वोट होता है। गैर हाजिर रह कर इस बार आपने भाजपा की मदद की।