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कश्मीर में हिंसा के चलते छह हजार करोड़ का बाजार खतरे में
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 21 Aug 2016 11:25 AM IST
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इस साल कम पैदावार
- फोटो : File Photo
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आतंकी बुरहान की मौत के बाद कश्मीर में पैदा हुई हिंसा से कश्मीर के विश्व प्रसिद्ध सेब की छह हजार करोड़ रुपये की मार्केट पर संकट पैदा हो गया है।
कश्मीर में सेब की 7 किस्में पैदा होती है। इनमें एक अगस्त माह में ही तैयार हो जाती है, जबकि अगली दो महीने में तैयार हो जाएगी। इस साल खराब मौसम के कारण कश्मीर की पैदावार भी कम हुई है। ऊपर से अब हिंसा की वजह से सेब उत्पादक अपना सेब कश्मीर से बाहर नहीं भेज पा रहे।
जानकारी के अनुसार कश्मीर के बारामूला, शोपियां, सोपोर, पुलवामा, कुपवाड़ा में मुख्य रूप से सेब की पैदावार होती है। इनमें अंबरी अक्तूबर में, डिलेशियस सितंबर नंबर, अमेरिकन सितंबर अक्तूबर, महाराजी अक्तूबर नंबर, राजकबारी सितंबर और हजरतबली जुलाई अगस्त में तैयार हो जाती है।
सबसे ज्यादा शोपियां के 30 हजार हेक्टेयर पर सेब लगता है। हर साल सेब की विभिन्न किस्मों की 13 से 14 लाख मीट्रिक टन की पैदावार होती है। लेकिन इस साल शोपियां को छोड़कर कश्मीर के सभी क्षेत्रों में मौसम की मार सेब की पैदावार पर पड़ी है।
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कश्मीर में सेब की 7 किस्में पैदा होती है। इनमें एक अगस्त माह में ही तैयार हो जाती है, जबकि अगली दो महीने में तैयार हो जाएगी। इस साल खराब मौसम के कारण कश्मीर की पैदावार भी कम हुई है। ऊपर से अब हिंसा की वजह से सेब उत्पादक अपना सेब कश्मीर से बाहर नहीं भेज पा रहे।
जानकारी के अनुसार कश्मीर के बारामूला, शोपियां, सोपोर, पुलवामा, कुपवाड़ा में मुख्य रूप से सेब की पैदावार होती है। इनमें अंबरी अक्तूबर में, डिलेशियस सितंबर नंबर, अमेरिकन सितंबर अक्तूबर, महाराजी अक्तूबर नंबर, राजकबारी सितंबर और हजरतबली जुलाई अगस्त में तैयार हो जाती है।
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सबसे ज्यादा शोपियां के 30 हजार हेक्टेयर पर सेब लगता है। हर साल सेब की विभिन्न किस्मों की 13 से 14 लाख मीट्रिक टन की पैदावार होती है। लेकिन इस साल शोपियां को छोड़कर कश्मीर के सभी क्षेत्रों में मौसम की मार सेब की पैदावार पर पड़ी है।
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जम्मू में बिक रहा अमेरिका और हिमाचल का सेब
सेब
- फोटो : File Photo
कश्मीर हिंसा की वजह से जम्मू के लोगों को हिमाचल और अमेरिका का सेब खाना पड़ रहा है। जो एक तो फीका और दूसरा महंगा है। 60 से 80 रुपये किलो सेब बिक रहा है।
कश्मीर के सेब उत्पादक भी मानते हैं कि कश्मीर के सेब का बाहर नहीं जा पाने का लोगों को नुकसान हो रहा है। कश्मीर सेब उत्पादक एसोसिएशन के महा सचिव शब्बीर कूले कहते हैं कि यदि कश्मीर का सेब जम्मू तक पहुंचता तो यह लोगों तक 40 से 50 रुपये किलो तक बिकता।
पचास फीसदी उत्पादन गिरा
शोपियां सेब उत्पादक एसोसिएशन के प्रधान मोहम्मद अमीन मीर का कहना है कि इस साल बेमौसम बर्फबारी की वजह से सेब की पैदावार बुरी तरह से प्रभावित हुई है।
इस साल आठ से 10 लाख मीट्रिक टन पैदावार होने की संभावना है। लेकिन हिंसा की वजह से हर तरफ बंद है। ऐसे में सेब की पहली फसल हजरतबली कश्मीर से बाहर नहीं जा रही और अन्य किस्मों को तैयार करने में सही वक्त नहीं मिल रहा। यदि ऐसा ही माहौल रहा तो सेब कश्मीर से बाहर नहीं जा पाएगा। पहले रात को सेब को लाद कर बाहर भेज देते थे। लेकिन अब रात का कर्फ्यू भी लग गया है।
कश्मीर के सेब उत्पादक भी मानते हैं कि कश्मीर के सेब का बाहर नहीं जा पाने का लोगों को नुकसान हो रहा है। कश्मीर सेब उत्पादक एसोसिएशन के महा सचिव शब्बीर कूले कहते हैं कि यदि कश्मीर का सेब जम्मू तक पहुंचता तो यह लोगों तक 40 से 50 रुपये किलो तक बिकता।
पचास फीसदी उत्पादन गिरा
शोपियां सेब उत्पादक एसोसिएशन के प्रधान मोहम्मद अमीन मीर का कहना है कि इस साल बेमौसम बर्फबारी की वजह से सेब की पैदावार बुरी तरह से प्रभावित हुई है।
इस साल आठ से 10 लाख मीट्रिक टन पैदावार होने की संभावना है। लेकिन हिंसा की वजह से हर तरफ बंद है। ऐसे में सेब की पहली फसल हजरतबली कश्मीर से बाहर नहीं जा रही और अन्य किस्मों को तैयार करने में सही वक्त नहीं मिल रहा। यदि ऐसा ही माहौल रहा तो सेब कश्मीर से बाहर नहीं जा पाएगा। पहले रात को सेब को लाद कर बाहर भेज देते थे। लेकिन अब रात का कर्फ्यू भी लग गया है।