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जर्मनी से कश्मीर पहुंची माता महिषासुर मर्दिनी की दुर्लभ मूर्ति

Sun, 19 Feb 2017 02:18 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Sun, 19 Feb 2017 02:18 PM IST
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antique statue of mahishasur mardini reached kashmir
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंजेला मार्केल - फोटो : file photo

जर्मन चांसलर एंजेला मरकेल की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट की गई महिषासुर मर्दिनी (चंडिका माता) की मूर्ति अपनी असली जगह कश्मीर पहुंच गई है। महिषासुर मर्दिनी जिसे कश्मीरी पंडित चंडिका माता कहते हैं, की वापस आई मूर्ति आठवीं सदी की बताई जा रही है।

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आठवीं सदी में कश्मीर में महाराजा ललितादित्य का राज था और उसी काल में कश्मीर में सूर्य मंदिर और कई अन्य महत्त्वपूर्ण मंदिर एवं स्मारक बनाए गए थे। इन्हें देखने के लिए आज भी हजारों की संख्या में पर्यटक कश्मीर आते हैं।  
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मूर्ति अभी कश्मीर के पुरातत्व विभाग के पास है। कश्मीरी पंडित इस मूर्ति को पुरातत्व विभाग से लेकर या तो इसके प्राचीन मंदिर पुलवामा के टेंगपोरा मंदिर में स्थापित करने या फिर फिलहाल इस मूर्ति को ज्येष्ठा देवी मंदिर कमेटी को सौंपने पर जोर दे रहे है। इस संबंध में पीएमओ में केंद्रीय राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह से भी कश्मीरी पंडित मिल चुके हैं। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल ने किया था भेंट

antique statue of mahishasur mardini reached kashmir
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंजेला मार्केल - फोटो : फाइल फोटो
महाराजा ललितादित्य के काल में कश्मीर में मूर्तिकला का जबरदस्त विकास हुआ था। मां दुर्गा की इस विशिष्ट मूर्ति का शिल्प इतना दुर्लभ है कि अब इसके मूल की मूर्ति ढूंढने से भी नहीं मिलती।

कश्मीरी पंडितों के संगठन पनुन कश्मीर के प्रधान अश्विनी चुरंगू का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जर्मन चांसलर एंजेला मरकेल की ओर से भेंट की गई महिषासुर मर्दिनी (चंडिका माता) की मूर्ति कश्मीर पुरातत्व विभाग के पास पहुंच चुकी है। उनका कहना है कि यह मूर्ति काफी प्राचीन होने के कारण इससे कश्मीरी पंडितों की धार्मिक आस्था भी जुड़ी हुई है।

ऐसे में पुरातत्व विभाग से इस मूर्ति को लेकर या तो उसके असल मंदिर में स्थापित किया जाना चाहिए या फिलहाल ज्येष्ठा देवी मंदिर कमेटी को महिषासुर मर्दिनी (चंडिका माता) मंदिर समिति को विश्वास में लेकर सौंपा जाना चाहिए। 
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