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धीरे-धीरे खत्म हो रहा एंटी कैंसर वनस्पति का भंडार
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Mon, 05 Sep 2016 12:22 PM IST
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कैंसर को खत्म करने वाली वनस्पति
- फोटो : Amar Ujala
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रियासत में वैदिक काल से अस्तित्व में रहा कैंसर रोधी दुर्लभ वानस्पतिक जीवन खतरे में है। जम्मू और कश्मीर में प्रमुख एंटी कैंसर वनस्पतियों बर्मी, देवदार, बनकाकड़ू पाए जाते हैं। इनमें से बर्मी के पेड़ गिने चुने ही रह गए हैं।
जम्मू डिवीजन में बर्मी पर किए गए अपने शोध में जम्मू विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट आफ बाटनी के असिस्टेंट प्रोफेसर हरीश चंद्र दत्त ने पाया कि उधमपुर के पत्नीटाप के पास समनासर में दो पेड़ के अलावा डोडा के चिराला रेंज तथा कठुआ के बनी क्षेत्र में गिने-चुने पेड़ रहे गए हैं।
इसके अतिरिक्त घाटी के कुछेक हिस्सों में इनकी मौजूदगी न के बराबर रह गई है। साथ ही देवदार और बन काकड़ू के औषधीय उपयोग की जानकारी प्रदेश के 8 से 10 फीसदी लोगों को ही है, जबकि इनका अस्तित्व भी खतरे में है।
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अमर उजाला से जेएंडके में पाई जाने वाली एंटी कैंसर वनस्पतियों की जानकारी साझा करते हुए प्रो. हरीश चंद्र ने बताया कि देश भर में पाई जाने वाली करीब 2500 औषधीय वनस्पतियों में से 25 फीसदी का अस्तित्व हिमालयन राज्यों हिमाचल प्रदेश, जेएंडके तथा उत्तरांचल में है।
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जम्मू डिवीजन में बर्मी पर किए गए अपने शोध में जम्मू विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट आफ बाटनी के असिस्टेंट प्रोफेसर हरीश चंद्र दत्त ने पाया कि उधमपुर के पत्नीटाप के पास समनासर में दो पेड़ के अलावा डोडा के चिराला रेंज तथा कठुआ के बनी क्षेत्र में गिने-चुने पेड़ रहे गए हैं।
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इसके अतिरिक्त घाटी के कुछेक हिस्सों में इनकी मौजूदगी न के बराबर रह गई है। साथ ही देवदार और बन काकड़ू के औषधीय उपयोग की जानकारी प्रदेश के 8 से 10 फीसदी लोगों को ही है, जबकि इनका अस्तित्व भी खतरे में है।
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अमर उजाला से जेएंडके में पाई जाने वाली एंटी कैंसर वनस्पतियों की जानकारी साझा करते हुए प्रो. हरीश चंद्र ने बताया कि देश भर में पाई जाने वाली करीब 2500 औषधीय वनस्पतियों में से 25 फीसदी का अस्तित्व हिमालयन राज्यों हिमाचल प्रदेश, जेएंडके तथा उत्तरांचल में है।
बर्मी के पेड़ से कैंसर की दवा
बनकाकड़ू का पौधा
- फोटो : Amar Ujala
टेक्सस बकाटा नाम से जाने जाते बर्मी के पेड़ की छाल और पत्तियों से मिलने वाले बेक्टेसिन कंपाउंड से ‘टेक्सोल’ नामक दवा बनती है, जो कैंसर रोगी को कीमोथेरेपी के दौरान दी जाती है। जानकार लोग खासकर खानाबदोश समुदाय इसकी छाल की चाय पीते हैं।
देवदार इसलिए है जरूरी
चिकित्सा विज्ञान में सेड्रस देवदारा नाम से जाने जाते देवदार के तने से एंटी कैंसर हाइड्रो चेविकोल नामक दवा का निर्माण होता है। इसके अतिरिक्त आर्थराइट्स, अल्सर, फीवर, त्वचा रोगों के लिए भी देवदार से दवाएं बनाई जाती हैं।
बनकाकड़ू भी कैंसर रोगियों के लिए रामबाण
स्थानीय भाषा में बनकाकड़ू नाम से जानी जाती सीनो पोडोफाइलम हेक्सजेंड्रम भी अच्छी एंटी कैंसर जड़ी-बूटी है। इससे बनने वाली पोडो फाइलम टेक्सिम नामक दवा कैंसर रोगियों के लिए रामबाण है।
देवदार इसलिए है जरूरी
चिकित्सा विज्ञान में सेड्रस देवदारा नाम से जाने जाते देवदार के तने से एंटी कैंसर हाइड्रो चेविकोल नामक दवा का निर्माण होता है। इसके अतिरिक्त आर्थराइट्स, अल्सर, फीवर, त्वचा रोगों के लिए भी देवदार से दवाएं बनाई जाती हैं।
बनकाकड़ू भी कैंसर रोगियों के लिए रामबाण
स्थानीय भाषा में बनकाकड़ू नाम से जानी जाती सीनो पोडोफाइलम हेक्सजेंड्रम भी अच्छी एंटी कैंसर जड़ी-बूटी है। इससे बनने वाली पोडो फाइलम टेक्सिम नामक दवा कैंसर रोगियों के लिए रामबाण है।