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शिक्षा: जम्मू शहर में ही सालाना दस अरब का कारोबार, हर साल एक बच्चे से होती है औसतन 50 हजार की वसूली
Tue, 11 Apr 2023 03:08 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Tue, 11 Apr 2023 03:08 PM IST
सार
हर नए सत्र में बच्चों से विभिन्न शुल्क से प्रति विद्यार्थी से औसतन 50 हजार रुपये की वसूली की जाती है। इसमें दाखिला शुल्क, मासिक शुल्क सहित अन्य शामिल हैं। इस मद से कुल नौ अरब 75 करोड़ रुपये की वसूली होती है।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
जम्मू शहर के निजी स्कूलों का सालाना कारोबार दस अरब रुपये से भी ज्यादा का है। शहर में कुल 843 निजी स्कूल हैं। इसमें 684 जेके बोर्ड, 146 सीबीएसई, 11 केंद्रीय विद्यालय और दो जवाहर नवोदय हैं। इन स्कूलों में 1.95 लाख बच्चे पढ़ते हैं। हर नए सत्र में बच्चों से विभिन्न शुल्क से प्रति विद्यार्थी से औसतन 50 हजार रुपये की वसूली की जाती है। इसमें दाखिला शुल्क, मासिक शुल्क सहित अन्य शामिल हैं। इस मद से कुल नौ अरब 75 करोड़ रुपये की वसूली होती है।
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हर साल किताबों से 50 करोड़ रुपये की वसूली होती है। प्रतियोगी एवं सास्कृतिक कार्यक्रम, खेल सहित अन्य गतिविधियों के नाम पर औसत प्रति बच्चे से 1500 रुपये वसूल किए जा रहे हैं। शहर में मार्च से अप्रैल तक निजी स्कूलों में दाखिला के लिए मारामारी रहती है। शहर के नामी स्कूलों में मंत्री और अधिकारियों की सिफारिश के बिना दाखिला मिलना मुश्किल होता है।
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नर्सरी से प्राइमरी कक्षा तक के बच्चों का दाखिला करवाना अभिभावकों के लिए जंग से कम नहीं होता है। कई-कई दिनों की परेशानी के बाद आईआईटी की फीस से भी महंगी फीस पर दाखिला मिलता है। शहर के बड़े निजी स्कूलों में बच्चों की संख्या तीन से पांच हजार तक है, जबकि छोटे स्कूलों में एक हजार से दो हजार तक है।
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हर स्कूल एक वर्ष में प्रति बच्चे से दाखिला फीस, मासिक फीस, किताबें, वर्दी, जूते, स्कूल बैग, स्पेशल डे ड्रेस, प्रिंटिंग चार्ज सहित अन्य शुल्क के नाम पर 50 हजार से एक-एक लाख रुपये लेते हैं। आलम यह है कि अभिभावक इन्हें अपनी मर्जी से खरीद भी नहीं सकते हैं। स्कूल द्वारा तय दुकान और दाम पर उन्हें पठन-पाठन सहित अन्य सामग्री खरीदनी पड़ती हैं, जो अन्य दुकानों के मुकाबले महंगी होती हैं।
तीन विभागों की निगरानी, फिर भी मनमानी
यूं तो निजी स्कूलों पर निगरानी के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के ही तीन विभाग हैं, लेकिन निजी स्कूलों की मनमानी के आगे यह बेबस हैं। निजी स्कूलों की फीस पर निगरानी के लिए शुल्क निर्धारण समिति है। समिति स्कूल का शुल्क निर्धारण करती है, लेकिन निजी स्कूल अपनी मर्जी से अभिभावकों से शुल्क वसूलते हैं। पुस्तकों की निगरानी का काम जेके बोर्ड का भी है, लेकिन निजी स्कूल एनसीईआरटी के साथ-साथ सात से आठ अन्य पुस्तकें पढ़ाते हैं।