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Jammu News: पहले जत्थे से अब लौटे, चल नहीं सकते, फिर भी नहीं रुके कदम
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। बाबा बर्फानी का दीदार करने के लिए श्रद्धालु देशभर से आ रहे हैं। सभी की आस्था अलग-अलग बयान कर रही है। एक ही मकसद है -बस किसी तरह धाम पहुंच कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर लें। कुछ भक्तों के अनुसार बाबा के दर्शन करने के बाद जीवन में प्राप्त करने को शेष रह नहीं जाएगा। हर कठिनाई सहने को तैयार हैं, जो रास्ते में आएगी। चाहे बारिश में भीगना पड़े या फिर सड़क पर रात बितानी पड़े।
इसकी एक उदाहरण ग्वालियर (एमपी) से आए महिपाल सिंह दिव्यांग हैं। वह चल नहीं सकते, लेकिन 15 बार अमरेश्वर धाम जा चुके हैं और अब 16वीं यात्रा की। वह पहले जत्थे में गए थे और मंगलवार को लौटे। वह कहते हैं - इतनी मुश्किलों के बाद भी घर वालों ने जाने से मना नहीं किया। 2008 से शुरू हुई यात्रा के बारे में बताते हैं कि रास्ता तब बहुत खतरनाक था, तब भी पीछे कदम नहीं हटते थे। अगर किसी को मदद की जरूरत होती तो वह तत्पर रहते। उनके अनुसार हर इंसान शिव है और अगर किसी की मदद करूंगा तो शिव उनकी मदद करेंगे। हर बार घर से आस्था, विश्वास और श्रद्धा के साथ चलता हूं। ऐसा लगता है कि बाबा गोद में उठा कर ले जा रहे हैं।
इनकी छड़ी पर आस्था के धागे
एमपी के ही साधु केशव दास छड़ी लेकर चलते हैं। उनके अनुसार 35 साल पहले गृहस्थ जीवन त्याग दिया। छड़ी के बारे में बताते हैं -इसमें हर तीर्थ का धागा बांधा है। 12 ज्योतिर्लिंग, हिमाचल के प्रसिद्ध मंदिर और यूपी के धाम तक छड़ी लेकर चला हूं। सभी स्थलों की यात्रा दस साल में की और अब यही छड़ी लेकर बाबा के पास जाउंगा ताकि उनका आशीर्वाद मिल सके।
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जम्मू। बाबा बर्फानी का दीदार करने के लिए श्रद्धालु देशभर से आ रहे हैं। सभी की आस्था अलग-अलग बयान कर रही है। एक ही मकसद है -बस किसी तरह धाम पहुंच कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर लें। कुछ भक्तों के अनुसार बाबा के दर्शन करने के बाद जीवन में प्राप्त करने को शेष रह नहीं जाएगा। हर कठिनाई सहने को तैयार हैं, जो रास्ते में आएगी। चाहे बारिश में भीगना पड़े या फिर सड़क पर रात बितानी पड़े।
इसकी एक उदाहरण ग्वालियर (एमपी) से आए महिपाल सिंह दिव्यांग हैं। वह चल नहीं सकते, लेकिन 15 बार अमरेश्वर धाम जा चुके हैं और अब 16वीं यात्रा की। वह पहले जत्थे में गए थे और मंगलवार को लौटे। वह कहते हैं - इतनी मुश्किलों के बाद भी घर वालों ने जाने से मना नहीं किया। 2008 से शुरू हुई यात्रा के बारे में बताते हैं कि रास्ता तब बहुत खतरनाक था, तब भी पीछे कदम नहीं हटते थे। अगर किसी को मदद की जरूरत होती तो वह तत्पर रहते। उनके अनुसार हर इंसान शिव है और अगर किसी की मदद करूंगा तो शिव उनकी मदद करेंगे। हर बार घर से आस्था, विश्वास और श्रद्धा के साथ चलता हूं। ऐसा लगता है कि बाबा गोद में उठा कर ले जा रहे हैं।
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इनकी छड़ी पर आस्था के धागे
एमपी के ही साधु केशव दास छड़ी लेकर चलते हैं। उनके अनुसार 35 साल पहले गृहस्थ जीवन त्याग दिया। छड़ी के बारे में बताते हैं -इसमें हर तीर्थ का धागा बांधा है। 12 ज्योतिर्लिंग, हिमाचल के प्रसिद्ध मंदिर और यूपी के धाम तक छड़ी लेकर चला हूं। सभी स्थलों की यात्रा दस साल में की और अब यही छड़ी लेकर बाबा के पास जाउंगा ताकि उनका आशीर्वाद मिल सके।
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