पढ़िए, हिंसा के चलते 3 दिन तक फंसे रहे अमरनाथ यात्रियों की दिल दहला देने वाली कहानी
जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर की राह इतनी खौफनाक भी हो सकती है कभी सोचा नहीं था। हालात खराब हो गए हैं ये खबर जरूर मिली, पर जान के लाले पड़ जाएंगे ये मालूम नहीं था। सोनमर्ग से अनंतनाग तक सड़क पर सीवर पाइप, कटे पेड़, कांच, पत्थर, टूटे जले वाहन देखकर सभी के रोंगटे खड़े हो जाते।
मगर आशंकाओं से घिरी वापसी के बीच सेना को देखकर तो जैसे जान में जान ही आ गई। इसके बाद तमाम साथियों को घर वापसी का यकीन हो गया। बाकी का सफर बम बम भोले के जयघोष करते हुए कब कट गया पता ही नहीं चला।
बाबा बर्फानी के यात्रा रूट पर तीन दिन तक फंसे रहने के बाद सोमवार बाद दोपहर जम्मू पहुंचे यात्री अपनी आपबीती में सेना की मौजूदगी को संकट में सहारा ही बताते रहे। दिल्ली से साथियों के साथ अमरनाथ यात्रा कर लौटे दीपक वैद ने कहा बाबा बर्फानी के दर्शन करने के बाद लौटते समय वह आधार शिविर में ही फंस गए थे।
हालात बिगड़ने की सूचनाएं लगातार मिल रही थीं। घर वापसी कैसे होगी ये सवाल खाए जा रहा था। हर घंटे घर में फोन कर कुशलक्षेम बताना पड़ रहा था। पहले सोचा लेह के रास्ते निकल जाएं लेकिन बजट की सीमा थी।
नन्हें हाथों ने भी उठा रखे थे पत्थर
दीपक वैद के साथ बिट्टू, मूलचंद, अमित और सोनू ने बताया तीसरे दिन खुले यात्रा मार्ग पर हालात कैसे थे इसे बयान करना भी मुश्किल है। पहले पार्किगिं से ही निकलने में तीन घंटे लग गए। फिर सोनमर्ग से अनंतनाग के मंजर डराते रहे। धनबाद झारखंड के संजीव कुमार, मोहनदास, संजीव और विकास ने बताया हर यात्री के चेहरे पर खौफ था लेकिन सेना को देखते तो सारी चिंताएं दूर हो जातीं।
दो दिन लगातार एक ही जगह अटके रहने के हालात और हिंसक हमलों के खतरे के बीच रात के अंधेरे में वापसी का सफर पूरा करना सेना के बगैर शायद मुमकिन न होता। इस सब के बावजूद वे सेना की मौजूदगी में अगले साल भी यात्रा करने आएंगे।
पहली बार अमरनाथ यात्रा पर आए अमित ने बताया उनकी गाड़ी पथराव से तो बच गई लेकिन आठ से दस वर्ष की उम्र के कुछ बच्चों को हाथ में पत्थर पकड़े देखकर वह चौंक गए। वह अब तक हैरान हैं कि आखिर नन्हीं उम्र में भी बच्चे इतने हिंसक माहौल का हिस्सा कैसे बन सकते हैं। तेलंगाना से कमल पांडे, र्साइं कृष्णा और नागराज ने कहा वापसी के दौरान मीलों लगातार सड़क पर पत्थर ही दिखाई दिए। दूर से कुछ बच्चों को हाथ में पत्थर पकड़े देखकर हैरानी हुई।