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#हिंदी हैं हम: शोधार्थी बोले- हिंदी के राजभाषा बनने से बढ़ेगा रुझान, अभिभावक भी बच्चों को करेंगे प्रेरित

Sun, 06 Sep 2020 12:37 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 06 Sep 2020 12:37 PM IST
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Amar ujala Hindi Hain Hum campaign, In Jammu and Kashmir, the trend will increase as Hindi becomes the official language, parents will also inspire children
अमर उजाला अभियान 'हिंदी हैं हम' - फोटो : अमर उजाला

हिंदी को लेकर समाज में बनी सोच को बदलाव की जरूरत है। बदलाव का यह काम हिंदी साहित्य से जुड़े लोग कर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर में हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिलने से हिंदी के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ेगा। इसके अलावा अभिभावक भी अब बच्चों को हिंदी पढ़ाने के प्रति प्रेरित होंगे।

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स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी का बड़ा योगदान रहा है। उस समय की युवा पीढ़ी में स्वतंत्रता के प्रति चेतना जगाने का काम हिंदी में प्रकाशित पत्र और पत्रिकाओं ने किया। स्वतंत्रता के समय हिंदी जन-जन की भाषा हुआ करती थी। वर्तमान में अंग्रेजी में बात करने वाले खुद को बुद्धिजीवी समझते हैं और हिंदी में बोलने में असहज महसूस करते हैं। ऐसे लोग जब अभिभावक बनते हैं, बच्चों को हिंदी भाषा से दूर रखते हैं। नई शिक्षा नीति और प्रदेश में हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिलने से हिंदी को लेकर माहौल बदलेगा। विज्ञान और प्राद्योगिकी से जुड़ी पुस्तकें हिंदी भाषा में भी होनी चाहिए। -शिवाली शर्मा, पीएचडी शोधार्थी, जेयू
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हम लोग भाषाओं को धर्म से जोड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। वहीं देखा जाए तो हिंदी भाषा को लेकर आज के युवाओं में डर है, जबकि हिंदी में हम अपनी भावनाओं को बड़ी सरलता से प्रकट कर सकते हैं। हिंदी ही ऐसी भाषा है, जिसके जरिये हम प्रदेश के बाहर के लोगों से भी आसानी से संवाद कर सकते हैं। निश्चित रूप से हिंदी भाषा को प्रदेश में राजभाषा का दर्जा मिलने से हिंदी का विकास होगा। इससे हिंदी पढ़ने वाले छात्रों, शोधार्थियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। -महनाज बेगम, पीएचडी शोधार्थी, जेयू
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प्रदेश में हिंदी भाषा की स्थिति काफी चिंताजनक है। हम जिस हिंदी को बोल रहे हैं या लिख रहे हैं, उसमें अंग्रेजी के शब्दों का अधिक उपयोग हो रहा है। प्रदेश में हिंदी में बेहतर लेखन भी हो रहा है, लेकिन उत्तर भारत के अन्य राज्यों की तुलना में हमारा हिंदी साहित्य काफी कमजोर है। नई पीढ़ी के लेखक हिंदी लेखन में अंग्रेजी का प्रयोग ज्यादा करते हैं। इसका एक कारण है कि हम उस स्तर का हिंदी साहित्य नहीं पढ़ रहे हैं, जो पढ़ना चाहिए। हिंदी को लेकर हम सिर्फ हिंदी दिवस पर ही बात करते हैं। अन्य दिनों में हिंदी को उसके हालात पर छोड़ दिया जाता है।  -सोनिया उपाध्याय, लेखिका

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