जम्मू: इंसानियत की सेवा के लिए किया महादान, अमर उजाला फाउंडेशन ने आयोजित किया रक्तदान शिविर
राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान शिविर के उपलक्ष्य में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से सोमवार को गांधीनगर अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
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राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस व आयुष्मान भव सप्ताह के तहत सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से गांधीनगर अस्पताल में रक्तदान शिविर लगाया गया। रक्तदाताओं ने दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए महादान किया। गांधीनगर अस्पताल के सहयोग से लगाए शिविर में छात्रों से लेकर हर वर्ग ने जोश दिखाया। इंसानियत की मिसाल देते हुए लोगों ने सेवा कार्य में बढ़ चढ़कर भाग लिया।
अस्पताल में दोपहर तक शिविर में सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, स्वयंसेवी, डॉक्टर, विद्यार्थी, चिकित्सा कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी, राजनीतिक दल, अमर उजाला के सदस्य शामिल हुए। रक्तदाताओं ने रक्तदान से दूसरों की जिंदगी बचाने का संदेश दिया। कई लोग पहली बार रक्तदान के लिए पहुंचे तो कुछ स्वैच्छिक तौर पर आए। रक्तदान के लिए रक्तदाताओं के जोश का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्हें रक्तदान के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। रक्तदान की शुरुआत करते चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण योगराज ने कहा कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। मौजूदा समय में अस्पताल में बड़ी संख्या में डेंगू के मरीज पहुंच रहे हैं, जिसमें गंभीर मरीजों को प्लेटलेट की जरूरत पड़ रही है। ये रक्त उनकी प्लेटलेट की मांग को पूरा करेगा। डेंगू को देखते हुए स्वैच्छिक तौर पर सभी वर्ग के लोगों को आगे आकर रक्तदान करना चाहिए। रक्तदान के लिए पहुंचे रक्तदाताओं के पते, मोबाइल नंबर, खून का ग्रुप आदि महत्वपूर्ण जानकारियां ली गईं, ताकि भविष्य में जरूरतमंद मरीजों के लिए दोबारा उनकी सेवाएं ली जा सकें। शिविर में स्वाभिमान चेरिटेबल ट्रस्ट के सदस्यों ने भी रक्तदान किया। रक्तदाताओं को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
61 की उम्र में भी जज्बा बरकरार
कहते हैं कुछ करने की चाह हो तो उम्र आड़े नहीं आती। इसी उद्देश्य पर पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एडीएस मन्हास (61) ने रक्तदान कर दूसरों का जीवन बचाने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि वह हर साल नियमित तौर पर दो बार स्वैच्छिक तौर पर रक्तदान कर रहे हैं। इसी तरह भाजपा महिला मोर्चा की प्रवक्ता रितिका त्रेहान (54) ने रक्तदान कर बताया कि महिलाएं भी किसी से पीछे नहीं हैं। खासतौर पर नेक काम के लिए सभी को आगे आना चाहिए। चिकित्सा स्टाफ में ब्लड बैंक की मेडिकल अफसर डॉ. उत्तरा संबयाल, सुपरवाइजर गुरदीप सिंह जम्बाल, जूनियर स्टाफ नर्स विशाला खजूरिया, नेहा देवी, सीनियर लैब टेक्नीशियन सुमित महाजन शामिल रहे।
पहली बार सुखद अहसास हुआ
पहली बार स्वैच्छिक तौर पर रक्तदान के लिए पहुंचे युवाओं ने कहा कि रक्तदान से सुखद अहसास हुआ है। आरएस पुरा के 25 वर्षीय विशाल टगोत्रा ने कहा कि पहली बार रक्तदान करके अच्छा लगा। महसूस हुआ है कि हम किसी का जीवन बचा सकते हैं। आरएस पुरा के ही 23 वर्षीय अभिमन्यु चिब ने कहा कि अगर सभी युवा रक्तदान के लिए आगे आएं तो अस्पतालों में रक्त की कमी नहीं होगी और किसी की जान खून की कमी के कारण नहीं जाएगी।
इनका रक्त देगा कइयों को नया जीवन
रितिका त्रेहान, विशाल टगोत्रा, अभिमन्यु चिब, अजय शर्मा, मुकेश कुमार, उमेश खोसला, अरुण सिंह मन्हास, दीपक कुमार, आयुष हीर, गुलशन कुमार, सुनील दत्त, भूपेंद्र सिंह, रंती देव, अजय शर्मा, पंकज गुप्ता, राहुल डोगरा, नितिन शर्मा, डॉ. एडीएस मन्हास, रोहित शर्मा आदि ने शिविर में रक्तदान किया। साथ ही कहा कि रक्तदान सबसे बड़ी समाजसेवा है। इसके लिए नौजवानों को आगे आना चाहिए। युवा पीढ़ी नेक पहल से जुड़कर किसी के जीवन में खुशियों की धारा ला सकती है। इसलिए जरूरी है कि हर तीन माह में एक बार रक्तदान करें।
इससे पहले शनिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शहर के सरवाल अस्पताल जम्मू में लगाए गए रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। रक्तदाताओं में दूसरों के लिए कुछ करने का जज्बा और उत्साह देखते ही बना। खासतौर पर मौजूदा डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच यह रक्तदान कई जरूरतमंद मरीजों के लिए राहत देगा। रक्तदान में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हुए।
सरवाल अस्पताल और गांधीनगर अस्पताल प्रशासन के सहयोग से राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के उपलक्ष्य में लगाए गए रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं ने दिखाया कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। यह दूसरों को नया जीवन देता है। शिविर में रक्तदान के लिए कई पहली बार पहुंचे तो कई स्वैच्छिक तौर पर।
रक्तदान के लिए जोश का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता था कि उन्हें रक्तदान के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। रक्तदान के लिए पहुंचे रक्तदाताओं के पते, मोबाइल नंबर, ब्लड ग्रुप आदि महत्वपूर्ण जानकारियां ली गईं, ताकि भविष्य में जरूरतमंद मरीजों के लिए दोबारा उनकी सेवाएं ली जा सकें। इस दौरान अमर उजाला के कई कर्मचारियों ने भी रक्तदान किया। रक्तदाताओं को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से प्रशस्ति पत्र दिए गए।
सरवाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय रैना और गांधीनगर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण योगराज ने रक्तदाताओं को सराहा। शिविर में सेवाएं देने वाले चिकित्सा स्टाफ में गांधीनगर अस्पताल से ब्लड बैंक ऑफिसर डॉ. उत्रा संबयाल, सीनियर स्टाफ नर्स अनीता कुमारी, जूनियर स्टाफ नर्स नेहा देवी, डॉ. बिंदु चौहान, नवीन भान, डॉ. वैशाली, गुरमीत सिंह आदि शामिल रहे।
पहली बार रक्त देकर सुखद अहसास हुआ
शिविर में रक्तदान के लिए पहुंचे कई युवाओं ने पहली बार रक्तदान किया। 19 वर्षीय रक्तदाता फैसल अशरफ वानी ने कहा कि पहली बार रक्तदान करके उन्हें सुखद अहसास हो रहा है। उन्हें लग रहा है कि उनका रक्त किसी की जिंदगी बचा सकता है। इसी तरह तलोड़ा, उधमपुर 24 वर्षीय निवासी विशाल सिंह ने कहा कि मैने पहली बार रक्तदान किया है और मुझे लग रहा है कि शायद ही इससे बड़ा कोई दान हो। अखनूर निवासी 24 वर्षीय धीरज कुमार ने भी पहली बार रक्तदान किया। उन्होंने कहा कि हम सभी को इस नेक कार्य में अपना योगदान देना चाहिए। चूंकि इस समय अस्पतालों में डेंगू के चलते प्लेटलेट की मांग बढ़ी है, जिसका रक्त से ही निर्माण होता है। अन्य रक्तदाताओं में गुलशन, अखिल, अनुभव, सुनील, रिकी डलोत्रा (प्रदेश कांग्रेस समिति के सदस्य), निखिल, अभिषेक आदि शामिल रहे।