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जम्मू-कश्मीर के किसानों की लड़ाई लड़ेगी एआईकेएससीसी, 29 को दिल्ली पहुंचेंगे कश्मीरी किसान
Sat, 16 Nov 2019 10:12 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sat, 16 Nov 2019 10:12 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
सरकार की तरफ से लागू की गई पाबंदियों और असमय बर्फबारी ने जम्मू-कश्मीर में सेब, केसर और नाशपाती की 70 फीसदी फसल बरबाद कर दी है। नतीजतन पहले से ही केंद्रीय नीतियों से नाराज इस नवगठित केंद्र शासित प्रदेश के किसान बदहाली के कगार पर पहुंच गए हैं।
यह दावा जम्मू-कश्मीर के तीन दिन के दौरे से लौटने के बाद अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति (एआईकेएससीसी) के सात सदस्यीय दल ने किया है। एआईकेएससीसी ने जम्मू-कश्मीर के किसानों को सरकार से मदद दिलाने की लड़ाई लड़ने का भी एलान किया है।
शनिवार को एआईकेएससीसी के पदाधिकारी वीएम सिंह, योगेंद्र यादव, राजू शेट्टी और कृष्ण प्रसाद आदि ने पत्रकारों को बताया कि उनके दल ने गांदरबल, पांपोर, पुलवामा, कुलगाम और अनंतनाग के किसानों से मुलाकात करते हुए उनकी समस्याओं को साझा करने की कोशिश की।
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जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के खात्मे के बाद छह अगस्त से लागू हुई बंदी, कम्युनिकेशन सुविधाओं पर प्रतिबंध और परिवहन की समस्याओं के चलते वहां के किसान अपनी फसल को समय पर मंडी तक नहीं पहुंचा सके। बाकी कसर सात नवंबर को हुई भारी बर्फबारी ने पूरी कर दी, जिसमें 18 इंच से 1 मीटर तक गिरी बर्फ ने किसानों द्वारा 15-20 साल मेहनत कर तैयार किए गए सेब के पेड़ों को बीच में से फाड़ दिया। बागबानी विभाग ने महज 37 फीसदी फसल के नुकसान का ही आकलन किया है।
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यह दावा जम्मू-कश्मीर के तीन दिन के दौरे से लौटने के बाद अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति (एआईकेएससीसी) के सात सदस्यीय दल ने किया है। एआईकेएससीसी ने जम्मू-कश्मीर के किसानों को सरकार से मदद दिलाने की लड़ाई लड़ने का भी एलान किया है।
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शनिवार को एआईकेएससीसी के पदाधिकारी वीएम सिंह, योगेंद्र यादव, राजू शेट्टी और कृष्ण प्रसाद आदि ने पत्रकारों को बताया कि उनके दल ने गांदरबल, पांपोर, पुलवामा, कुलगाम और अनंतनाग के किसानों से मुलाकात करते हुए उनकी समस्याओं को साझा करने की कोशिश की।
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जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के खात्मे के बाद छह अगस्त से लागू हुई बंदी, कम्युनिकेशन सुविधाओं पर प्रतिबंध और परिवहन की समस्याओं के चलते वहां के किसान अपनी फसल को समय पर मंडी तक नहीं पहुंचा सके। बाकी कसर सात नवंबर को हुई भारी बर्फबारी ने पूरी कर दी, जिसमें 18 इंच से 1 मीटर तक गिरी बर्फ ने किसानों द्वारा 15-20 साल मेहनत कर तैयार किए गए सेब के पेड़ों को बीच में से फाड़ दिया। बागबानी विभाग ने महज 37 फीसदी फसल के नुकसान का ही आकलन किया है।
नैफेड ने नहीं निभाई जिम्मेदारी
किसानों ने समिति को बताया कि नैफेड ने केंद्र के आदेश के बावजूद 11 करोड़ बक्सों के सेब उत्पादन में से महज 1.36 लाख बक्सों की ही खरीद किसानों से की। यह सेब भी नैफेड द्वारा आसपास की मंडियों में ही सस्ते दाम पर बेचने से सेब के भाव और गिर गए, जिसका नुकसान किसानों को हुआ। किसानों को अपना फल हाईवे तक खुद लेकर आने के लिए कहा गया, जिससे उसकी लागत बढ़ गई।
29 को दिल्ली पहुंचेंगे कश्मीरी किसान
समिति ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के किसान 29-30 नवंबर को दिल्ली में एआईकेएससीसी के राष्ट्रीय सम्मेलन में शिरकत करेंगे और कृषि मंत्री से मिलकर अपनी समस्याएं बताएंगे। समिति भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए पत्र लिखेगी। किसानों के नुकसान को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग उठाई जाएगी।
किसानों ने समिति को बताया कि नैफेड ने केंद्र के आदेश के बावजूद 11 करोड़ बक्सों के सेब उत्पादन में से महज 1.36 लाख बक्सों की ही खरीद किसानों से की। यह सेब भी नैफेड द्वारा आसपास की मंडियों में ही सस्ते दाम पर बेचने से सेब के भाव और गिर गए, जिसका नुकसान किसानों को हुआ। किसानों को अपना फल हाईवे तक खुद लेकर आने के लिए कहा गया, जिससे उसकी लागत बढ़ गई।
29 को दिल्ली पहुंचेंगे कश्मीरी किसान
समिति ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के किसान 29-30 नवंबर को दिल्ली में एआईकेएससीसी के राष्ट्रीय सम्मेलन में शिरकत करेंगे और कृषि मंत्री से मिलकर अपनी समस्याएं बताएंगे। समिति भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए पत्र लिखेगी। किसानों के नुकसान को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग उठाई जाएगी।