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जम्मू-कश्मीर के बजट में कृषि को मिलेगी प्राथमिकता, बागवानी में होगा व्यापक बदलाव

Tue, 23 Feb 2021 11:17 AM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Tue, 23 Feb 2021 11:17 AM IST
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Agriculture will get priority in Jammu-Kashmir's budget, there will be extensive changes in horticulture
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के बजट में कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता मिलेगी। प्रदेश के किसानों की आय के साधन को बढ़ाने के लिए टिकाऊ खेती से जुड़ी योजना का विकास किया जाएगा जो भविष्य की संभावनाओं से समझौता किए बगैर सभी प्रकार की विकास संबंधी जरूरतों को समाहित करेगा। बागवानी क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर बदलाव लाने की दिशा में काम चल रहा है।
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यह बात उन्होंने सोमवार को गुलशन ग्राउंड के पुलिस आडिटोरियम में आयोजित हार्टि-एक्सपो 2021 में बोल रहे थे। एलजी ने कहा कि किसान मंडियों को लेकर निश्चिंत रहें। यह हमेशा रहेंगी और इनको अत्याधुनिक बनाया जाएगा। लोगों को चाहिए कि वह झूठे आश्वासनों और बातों में न आएं। सरकार किसानों तक बेहतर तकनीक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता और उद्देश्य है। प्रदेश के सभी 20 जिलों में किसान उत्पादक संगठनों का गठन किया जाएगा।
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अगले तीन महीने में कृषि और बागवानी क्षेत्र में मजबूती आएगी। तीन हजार सीसी वाले ट्रैक्ट्ररों पर लगने वाला रोड टैक्स हटा दिया गया है। पावर टिलर पर भी टैक्स नहीं लगेगा। उप राज्यपाल ने खाद्य सुरक्षा में जम्मू-कश्मीर को आत्मनिर्भर बनाने पर बल देते हुए कहा कि नई तकनीक प्रयोगशाला से खेत तक पहुंचना चाहिए। सरकार चाहती है कि प्रदेश के सेब, अखरोट, बादाम और अन्य फलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केट मिले और इसको लेकर पूरा प्रयास होगा।
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ड्राई पोर्ट व अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की वकालत
एलजी ने कहा कि हाल ही में उन्होंने नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि जम्मू-कश्मीर में ड्राई पोर्ट स्थापित किया जाए। अंतरराष्ट्रीय उडनों को शुरू किया जाए। इससे किसानों के उत्पादों का निर्यात किया जा सकेगा। नीति आयोग से भी आग्रह किया गया है कि जिस तरह से केसर मिशन चलाया गया है उसी तरह से विशेष तौर पर कुछ अन्य उत्पादों के लिए भी मिशन मोड पर कार्यक्रम शुरू किए जाएं।

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अगले पांच साल में 5500 हेक्टेयर में सेब सहित अन्य फलों के उत्पादन का लक्ष्य
उप राज्यपाल ने बताया कि बताया कि अगले पांच साल में 5500 हेक्टेयर क्षेत्र पर सेब, अखरोट, आम, स्ट्रॉबेरी और लीची की अधिक पैदावार का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नैफेड के साथ एमओयू साइन भी किया गया है। 500 करोड़ के तीन कोल्ड स्टोरेज भी बनाए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल के भी किसान हुए शरीक
एलजी ने पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों के किसानों के स्टाल का निरीक्षण किया। साथ ही बागवानी विभाग की ओर से ताजा फलों, ड्राई फ्रूट्स तथा अन्य उत्पादों के स्टाल पर भी जानकारी हासिल की। उपराज्यपाल के सलाहकार फारूक खान भी मौजूद रहे।
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