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सिंचाई के कमी के चलते किसानों को हो रहा नुकसान
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अरनिया। क्षेत्र में इन दिनों धान की रोपाई का समय चल रहा है। मगर सिंचाई की कमी के चलते किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरे राज्यों से पहुंचे श्रमिक भी परेशान हैं।
हालांकि करीब चार दिन पहले हल्की बारिश होने से धान की रोपाई के लिए किसानों को राहत जरूर मिली। मगर दो दिन बाद खेतों में नमी के साथ बोरवेल सूखना शुरू हो गए। इसके अलावा नहरों में पानी तो था, मगर नहर विभाग द्वारा पर्याप्त मात्रा में पूर्ति न किए जाने से दो दिन बाद ही धान की रोपाई को रोकना पड़ा।
रमन चंद, फ़क़ीर चंद, मदन लाल, अंशु सैनी, रशपाल सिंह व राम पाल आदि किसानों का कहना है कि 24 जून को हुई हल्की बारिश से थोड़ी राहत जरूर मिली, मगर नहरों में पर्याप्त पानी न मिलने से बारिश का लाभ नहीं उठाया जा सका। 27 जून को जो थोड़ा बहुत नहरों में जलापूर्ति हो रही थी, उसे भी बाराबंदी के कारण बंद कर दिया। किसानों के अनुसार अगर उस समय सिंचाई विभाग ने पानी छोड़ा होता तो शायद अब तक 50 प्रतिशत रोपाई हो चुकी होती। दूसरे राज्यों से पहुंचे राम कदम, माखन यादव, हरि चंद व नैन नारायण नामक श्रमिकों का कहना है कि हम तो अपने गांव से यहां दिहाड़ी लगाने के लिए आए हैं। मगर सिंचाई की कमी के चलते धान रोपाई का कार्य रुका पड़ा है।
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पिछली बाद नहर में एक व्यक्ति के डूबने से जलापूर्ति की मात्रा को कम करना पड़ा था। उसके बाद 27 जून बाराबंदी के कारण इन नहरों को बंद करना पड़ा। अब चार जुलाई को क्षेत्र से संबंधित 13, 15, 16 व 17 नंबर नहरों में पानी दिया जाएगा, ताकि धान रोपाई में किसानों को परेशानी न उठानी पड़े।
-सीसर खजूरिया, एईई, सिंचाई विभाग
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हालांकि करीब चार दिन पहले हल्की बारिश होने से धान की रोपाई के लिए किसानों को राहत जरूर मिली। मगर दो दिन बाद खेतों में नमी के साथ बोरवेल सूखना शुरू हो गए। इसके अलावा नहरों में पानी तो था, मगर नहर विभाग द्वारा पर्याप्त मात्रा में पूर्ति न किए जाने से दो दिन बाद ही धान की रोपाई को रोकना पड़ा।
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रमन चंद, फ़क़ीर चंद, मदन लाल, अंशु सैनी, रशपाल सिंह व राम पाल आदि किसानों का कहना है कि 24 जून को हुई हल्की बारिश से थोड़ी राहत जरूर मिली, मगर नहरों में पर्याप्त पानी न मिलने से बारिश का लाभ नहीं उठाया जा सका। 27 जून को जो थोड़ा बहुत नहरों में जलापूर्ति हो रही थी, उसे भी बाराबंदी के कारण बंद कर दिया। किसानों के अनुसार अगर उस समय सिंचाई विभाग ने पानी छोड़ा होता तो शायद अब तक 50 प्रतिशत रोपाई हो चुकी होती। दूसरे राज्यों से पहुंचे राम कदम, माखन यादव, हरि चंद व नैन नारायण नामक श्रमिकों का कहना है कि हम तो अपने गांव से यहां दिहाड़ी लगाने के लिए आए हैं। मगर सिंचाई की कमी के चलते धान रोपाई का कार्य रुका पड़ा है।
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पिछली बाद नहर में एक व्यक्ति के डूबने से जलापूर्ति की मात्रा को कम करना पड़ा था। उसके बाद 27 जून बाराबंदी के कारण इन नहरों को बंद करना पड़ा। अब चार जुलाई को क्षेत्र से संबंधित 13, 15, 16 व 17 नंबर नहरों में पानी दिया जाएगा, ताकि धान रोपाई में किसानों को परेशानी न उठानी पड़े।
-सीसर खजूरिया, एईई, सिंचाई विभाग