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42 करोड़ की राशि पहली बरसात में बही, कठुआ में कुछ ही महीनों में खस्ताहाल हुआ हाईवे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 28 Aug 2018 07:31 PM IST
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कठुआ में नेशनल हाईवे-44 के विजयपुर से लखनपुर के बीच पिछले एक साल के भीतर खर्च की गई करोड़ों की राशि पहली बरसात में ही बहती नजर आ रही है। विजयपुर से लखनपुर के बीच 62 किलोमीटर लंबे हाईवे पर तारकोल बिछाने का काम 42 करोड़ की भारी भरकम राशि से किया गया था, लेकिन हैरानी की बात है कि दो सप्ताह पहले तक जहां हाईवे पर अभी थर्मोप्लासिक रोड मार्किंग पेंट का काम जारी कर इसे फिनिशिंग टच दिया जा रहा है तो दूसरी तरफ हाईवे एक बार फिर गड्ढों का रूप लेने लगा है। साफ है कि निर्माण में गुणवत्ता से सीधे तौर पर समझौता किया गया है।
विजयपुर से लखनपुर के बीच हाईवे-44 पर जैसे-जैसे तारकोल बिछती गई लोगों को भी आस थी कि अब उनका सफर सुगम होगा, लेकिन हैरानी की बात है कि इस बीच पड़ने वाले अधिकतर पुलों पर बिछाई गई तारकोल उखड़ना शुरू हो गई है। यही नहीं हटली मोड़ से सटे होटल ग्रैंड प्लाजा के सामने लखनपुर की ओर से आते समय गड्ढे ढाई से तीन फुट का आकार ले चुके हैं। तेज गति से आते वाहन अक्सर गफलत का शिकार होते हैं, जिससे हादसों की आशंका तो बनी ही हुई है साथ ही वाहनों की भी दुर्गति हो रही है।
कुछ ऐसा ही नजारा कठुआ से सटे सहार खड्ड के पुल पर भी है। जहां गड्ढों को बचाकर गाड़ी निकाल पाना लगभग नामुमकिन है। नेशनल हाईवे पर बरनोटी के नजदीक गुरुद्वारा के ठीक सामने सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे तारकोल बिछाने में बरती गई लापरवाही और निमभन स्तर की तस्दीक कर रहे हैं। दियालाचक और चड़वाल को जोड़ने वाले पुल भी तारकोल सड़क का साथ छोड़ चुकी है।
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कमोबेश ऐसी ही स्थिति सांबा में भी है। कई जगह गड्ढे धीरे-धीरे सड़क की दुर्गति का कारण बन रहे हैं। इस बीच निर्माण एजेंसी ने जिला अस्पताल से सटी पुलिया पर गड्ढे को भरकर औपचारिकता कर दी। हाईवे पर कुछ अन्य गड्ढों को भी बीते सप्ताह भरा गया था, लेकिन गड्ढे फिर बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में सवाल यह कि 42 करोड़ से अधिक की राशि खर्च करने के बाद भी हाईवे की दुर्गति के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है। लोगों ने नेशनल हाईवे अथारिटी से मामले की जांच कराने की मांग की है।
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विजयपुर से लखनपुर के बीच हाईवे-44 पर जैसे-जैसे तारकोल बिछती गई लोगों को भी आस थी कि अब उनका सफर सुगम होगा, लेकिन हैरानी की बात है कि इस बीच पड़ने वाले अधिकतर पुलों पर बिछाई गई तारकोल उखड़ना शुरू हो गई है। यही नहीं हटली मोड़ से सटे होटल ग्रैंड प्लाजा के सामने लखनपुर की ओर से आते समय गड्ढे ढाई से तीन फुट का आकार ले चुके हैं। तेज गति से आते वाहन अक्सर गफलत का शिकार होते हैं, जिससे हादसों की आशंका तो बनी ही हुई है साथ ही वाहनों की भी दुर्गति हो रही है।
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कुछ ऐसा ही नजारा कठुआ से सटे सहार खड्ड के पुल पर भी है। जहां गड्ढों को बचाकर गाड़ी निकाल पाना लगभग नामुमकिन है। नेशनल हाईवे पर बरनोटी के नजदीक गुरुद्वारा के ठीक सामने सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे तारकोल बिछाने में बरती गई लापरवाही और निमभन स्तर की तस्दीक कर रहे हैं। दियालाचक और चड़वाल को जोड़ने वाले पुल भी तारकोल सड़क का साथ छोड़ चुकी है।
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कमोबेश ऐसी ही स्थिति सांबा में भी है। कई जगह गड्ढे धीरे-धीरे सड़क की दुर्गति का कारण बन रहे हैं। इस बीच निर्माण एजेंसी ने जिला अस्पताल से सटी पुलिया पर गड्ढे को भरकर औपचारिकता कर दी। हाईवे पर कुछ अन्य गड्ढों को भी बीते सप्ताह भरा गया था, लेकिन गड्ढे फिर बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में सवाल यह कि 42 करोड़ से अधिक की राशि खर्च करने के बाद भी हाईवे की दुर्गति के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है। लोगों ने नेशनल हाईवे अथारिटी से मामले की जांच कराने की मांग की है।