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Jammu News: अब खाद्य नमूनों की जांच के लिए देशभर की लैब से मदद लेगा विभाग
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- बड़ी और अनुभवी प्रयोगशालाओं का पैनल बनेगा, क्षमता के हिसाब से बांटा जाएगा काम
- जल्द मिलेगी रिपोर्ट, मिलावट पर कार्रवाई करने में होगी आसानी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। खाद्य पदार्थों में मिलावट या गड़बड़ी का पता लगाने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन अब एक से ज्यादा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं को जांच के काम से जोड़ेगा। विभाग ने देशभर की एनएबीएल और एफएसएसएआई से मान्यता प्राप्त खाद्य जांच प्रयोगशालाओं से आवेदन मांगे हैं। कई लैब का पैनल बनाया जाएगा। नमूनों को जरूरत के हिसाब से अलग-अलग लैब में भेजा जा सकेगा।
जम्मू और श्रीनगर में विभाग की दो सार्वजनिक खाद्य जांच प्रयोगशालाएं हैं। अब और लैब को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। किस लैब को कितना काम मिलेगा, यह उसकी जांच सुविधा, क्षमता, रिपोर्ट देने में लगने वाला समय और पिछले काम को देखकर तय होगा। जरूरत के अनुसार विभाग किसी लैब को दिए जाने वाले नमूनों की संख्या बढ़ा या घटा भी सकेगा। पैनल में शामिल होने के बाद लैब के काम की निगरानी भी होगी। विभाग समय-समय पर नमूने भेजकर जांच की गुणवत्ता परख सकेगा। गड़बड़ी या खराब काम मिलने पर लैब को दिए जाने वाले नमूनों का काम घटाया या रोका जा सकता है। गंभीर स्थिति में उसे पैनल से बाहर भी किया जा सकेगा। रिपोर्ट देने में देरी पर प्रति नमूना प्रतिदिन 1,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत या अधूरी रिपोर्ट देने और नमूने को खराब करने जैसी गड़बड़ियों पर भी कार्रवाई होगी।
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15 हजार नमूनों की जांच का अनुभव जरूरी
पैनल में शामिल होने वाली लैब के पास कम से कम पांच साल की लगातार एनएबीएल मान्यता और एफएसएसएआई की मान्यता होना जरूरी है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कम से कम 15 हजार खाद्य नमूनों की जांच का अनुभव भी होना चाहिए। साथ ही सरकारी विभागों या नियामक संस्थाओं के लिए कम से कम तीन खाद्य जांच के काम पूरे किए होने चाहिए। लैब के पास कम से कम 5,000 तरह की जांच की मान्यता और 10 खाद्य श्रेणियों में जांच की सुविधा होनी चाहिए। वहां कम से कम 30 तकनीकी कर्मचारी और दो फूड एनालिस्ट भी होने जरूरी हैं। यानी लैब के पास ज्यादा नमूनों और कई तरह की जांच करने की क्षमता होनी चाहिए।
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14 दिन में रिपोर्ट, गंभीर खतरे पर तुरंत सूचना
जहां कानून में जांच रिपोर्ट के लिए अलग समय सीमा तय नहीं है, वहां नमूना मिलने के 14 दिन के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। अगर जांच में ऐसा खतरा सामने आता है जिससे लोगों की सेहत को तुरंत नुकसान हो सकता है, तो लैब को तय समय का इंतजार नहीं करना होगा। उसे तुरंत खाद्य एवं औषधि प्रशासन और आयुक्त को सूचना देनी होगी। इस व्यवस्था से खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की ओर से लिए गए नमूने सही जांच सुविधा वाली लैब में भेजे जा सकेंगे। समय पर रिपोर्ट मिलने से मिलावट या दूसरी गड़बड़ी सामने आने पर विभाग को कार्रवाई करने में आसानी होगी।
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- जल्द मिलेगी रिपोर्ट, मिलावट पर कार्रवाई करने में होगी आसानी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। खाद्य पदार्थों में मिलावट या गड़बड़ी का पता लगाने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन अब एक से ज्यादा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं को जांच के काम से जोड़ेगा। विभाग ने देशभर की एनएबीएल और एफएसएसएआई से मान्यता प्राप्त खाद्य जांच प्रयोगशालाओं से आवेदन मांगे हैं। कई लैब का पैनल बनाया जाएगा। नमूनों को जरूरत के हिसाब से अलग-अलग लैब में भेजा जा सकेगा।
जम्मू और श्रीनगर में विभाग की दो सार्वजनिक खाद्य जांच प्रयोगशालाएं हैं। अब और लैब को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। किस लैब को कितना काम मिलेगा, यह उसकी जांच सुविधा, क्षमता, रिपोर्ट देने में लगने वाला समय और पिछले काम को देखकर तय होगा। जरूरत के अनुसार विभाग किसी लैब को दिए जाने वाले नमूनों की संख्या बढ़ा या घटा भी सकेगा। पैनल में शामिल होने के बाद लैब के काम की निगरानी भी होगी। विभाग समय-समय पर नमूने भेजकर जांच की गुणवत्ता परख सकेगा। गड़बड़ी या खराब काम मिलने पर लैब को दिए जाने वाले नमूनों का काम घटाया या रोका जा सकता है। गंभीर स्थिति में उसे पैनल से बाहर भी किया जा सकेगा। रिपोर्ट देने में देरी पर प्रति नमूना प्रतिदिन 1,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत या अधूरी रिपोर्ट देने और नमूने को खराब करने जैसी गड़बड़ियों पर भी कार्रवाई होगी।
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15 हजार नमूनों की जांच का अनुभव जरूरी
पैनल में शामिल होने वाली लैब के पास कम से कम पांच साल की लगातार एनएबीएल मान्यता और एफएसएसएआई की मान्यता होना जरूरी है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कम से कम 15 हजार खाद्य नमूनों की जांच का अनुभव भी होना चाहिए। साथ ही सरकारी विभागों या नियामक संस्थाओं के लिए कम से कम तीन खाद्य जांच के काम पूरे किए होने चाहिए। लैब के पास कम से कम 5,000 तरह की जांच की मान्यता और 10 खाद्य श्रेणियों में जांच की सुविधा होनी चाहिए। वहां कम से कम 30 तकनीकी कर्मचारी और दो फूड एनालिस्ट भी होने जरूरी हैं। यानी लैब के पास ज्यादा नमूनों और कई तरह की जांच करने की क्षमता होनी चाहिए।
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14 दिन में रिपोर्ट, गंभीर खतरे पर तुरंत सूचना
जहां कानून में जांच रिपोर्ट के लिए अलग समय सीमा तय नहीं है, वहां नमूना मिलने के 14 दिन के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। अगर जांच में ऐसा खतरा सामने आता है जिससे लोगों की सेहत को तुरंत नुकसान हो सकता है, तो लैब को तय समय का इंतजार नहीं करना होगा। उसे तुरंत खाद्य एवं औषधि प्रशासन और आयुक्त को सूचना देनी होगी। इस व्यवस्था से खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की ओर से लिए गए नमूने सही जांच सुविधा वाली लैब में भेजे जा सकेंगे। समय पर रिपोर्ट मिलने से मिलावट या दूसरी गड़बड़ी सामने आने पर विभाग को कार्रवाई करने में आसानी होगी।