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Jammu News: दिनभर कार्रवाई के बाद नरवाल में खौफ, रात में खुद से झुग्गियां तोड़ते दिखे रोहिंग्या
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जम्मू। दिनभर नरवाल की रोहिंग्या बस्ती में चले घटनाक्रम के बाद रात होते-होते तस्वीर पूरी तरह बदल गई। दिन में जहां कार्रवाई और टूटते ढांचों की आवाज सुनाई दे रही थी, वहीं रात में बस्ती के लोगों के चेहरों पर डर साफ नजर आया।
इस बार प्रशासन या पुलिस ने दुकानें और झुग्गियां नहीं तोड़ीं, बल्कि खुद रोहिंग्या अपने अस्थायी ढांचे हटा रहे थे। मंगलवार रात तक बस्ती में टूटे टिन शेड, लकड़ियां और सामान सड़कों के किनारे बिखरे पड़े थे।
रात करीब आठ बजे मौके का माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। अंधेरे में कई रोहिंग्या अपने टूटे ढांचों से सामान निकालकर सुरक्षित जगह ले जाते दिखे। कहीं टिन की चादरें पड़ी थीं, तो कहीं लकड़ियों का ढेर लगा था। दिनभर जिन जगहों पर दुकानें और झुग्गियां थीं, वहां मलबा नजर आ रहा था। रोहिंग्या सड़क किनारे समूह बनाकर खड़े थे और पूरे घटनाक्रम को लेकर आपस में चर्चा कर रहे थे।
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रात में बस्ती में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की थी कि आगे क्या होगा। रोहिंग्या को आशंका है कि जिस तरह कुछ स्थान खाली करवाए गए हैं, उसी तरह आने वाले दिनों में प्लाॅट मालिक दूसरी झुग्गियों को भी खाली करने के लिए कह सकते हैं। यही डर अब बस्ती के लोगों को परेशान कर रहा है। रोहिंग्या अपने सामान को समेटने और सुरक्षित जगह तलाशने को लेकर चिंतित दिखे।
मौके पर मौजूद लोगों के बीच बार-बार यही सवाल उठता रहा कि आज कुछ ढांचे हटे हैं, कल किसकी बारी होगी? दिनभर की कार्रवाई के बाद रात में बस्ती में पसरा सन्नाटा और मलबे के बीच खड़े टूटे ढांचे इस बदले हुए माहौल की कहानी खुद बयां कर रहे थे।
जम्मू शहर में यहां भी रोहिंग्याओं की बसावट
जम्मू में रोहिंग्याओं की बसावट शहर के अलग-अलग इलाकों में है। नरवाल में बर्मा बस्ती, सुंजवां, भठिंडी और बाहु फोर्ट के पास इनकी बस्तियां बनी हुई हैं। लद्दाखी कॉलोनी, ऊपरी ठठर, पुंछ कॉलोनी, गुढ़ा ब्राह्मणा, चिनौर सहित अन्य इलाकों में भी रोहिंग्या अपने परिवार के साथ रहते हैं।
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इस बार प्रशासन या पुलिस ने दुकानें और झुग्गियां नहीं तोड़ीं, बल्कि खुद रोहिंग्या अपने अस्थायी ढांचे हटा रहे थे। मंगलवार रात तक बस्ती में टूटे टिन शेड, लकड़ियां और सामान सड़कों के किनारे बिखरे पड़े थे।
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रात करीब आठ बजे मौके का माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। अंधेरे में कई रोहिंग्या अपने टूटे ढांचों से सामान निकालकर सुरक्षित जगह ले जाते दिखे। कहीं टिन की चादरें पड़ी थीं, तो कहीं लकड़ियों का ढेर लगा था। दिनभर जिन जगहों पर दुकानें और झुग्गियां थीं, वहां मलबा नजर आ रहा था। रोहिंग्या सड़क किनारे समूह बनाकर खड़े थे और पूरे घटनाक्रम को लेकर आपस में चर्चा कर रहे थे।
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रात में बस्ती में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की थी कि आगे क्या होगा। रोहिंग्या को आशंका है कि जिस तरह कुछ स्थान खाली करवाए गए हैं, उसी तरह आने वाले दिनों में प्लाॅट मालिक दूसरी झुग्गियों को भी खाली करने के लिए कह सकते हैं। यही डर अब बस्ती के लोगों को परेशान कर रहा है। रोहिंग्या अपने सामान को समेटने और सुरक्षित जगह तलाशने को लेकर चिंतित दिखे।
मौके पर मौजूद लोगों के बीच बार-बार यही सवाल उठता रहा कि आज कुछ ढांचे हटे हैं, कल किसकी बारी होगी? दिनभर की कार्रवाई के बाद रात में बस्ती में पसरा सन्नाटा और मलबे के बीच खड़े टूटे ढांचे इस बदले हुए माहौल की कहानी खुद बयां कर रहे थे।
जम्मू शहर में यहां भी रोहिंग्याओं की बसावट
जम्मू में रोहिंग्याओं की बसावट शहर के अलग-अलग इलाकों में है। नरवाल में बर्मा बस्ती, सुंजवां, भठिंडी और बाहु फोर्ट के पास इनकी बस्तियां बनी हुई हैं। लद्दाखी कॉलोनी, ऊपरी ठठर, पुंछ कॉलोनी, गुढ़ा ब्राह्मणा, चिनौर सहित अन्य इलाकों में भी रोहिंग्या अपने परिवार के साथ रहते हैं।