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शहीद की बिलखती बेटी के आंसुओं पर DIG ने मासूम को लिखा खुला खत
अमर उजाला ब्यूरो, श्रीनगर
Updated Wed, 30 Aug 2017 04:50 PM IST
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तुम्हारे आंसुओं ने कई दिलों को हिला दिया है .... तुम्हारे हर आंसू ने हमारे हृदय को झकझोरा है। यह लाइनें सोमवार को आतंकियों की गोलाबारी में शहीद हुए पुलिस के एएसआई अब्दुल रशीद की मासूम 5 साल की बेटी जोरा के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने लिखी हैं।
एएसआई रशीद की दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। शव घर पहुंचने पर शहीद की पांच साल की बच्ची के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। हर किसी का दिल उसे देख कर पसीज रहा था। डीआईजी दक्षिण कश्मीर एसपी पाणि ने अपनी फेसबुक पर एक पोस्ट में अपने गुस्से और पीड़ा को बयां किया है।
डीआईजी पाणि ने अपनी पोस्ट में बच्ची के लिए लिखा कि आपके पिता की तरह हम सभी जम्मू कश्मीर पुलिस बल का प्रतिनिधित्व करते हैं और आपके पिता वीरता और बलिदान की पहचान हैं।
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एएसआई रशीद की दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। शव घर पहुंचने पर शहीद की पांच साल की बच्ची के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। हर किसी का दिल उसे देख कर पसीज रहा था। डीआईजी दक्षिण कश्मीर एसपी पाणि ने अपनी फेसबुक पर एक पोस्ट में अपने गुस्से और पीड़ा को बयां किया है।
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डीआईजी पाणि ने अपनी पोस्ट में बच्ची के लिए लिखा कि आपके पिता की तरह हम सभी जम्मू कश्मीर पुलिस बल का प्रतिनिधित्व करते हैं और आपके पिता वीरता और बलिदान की पहचान हैं।
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जावेद गिलानी ने लिखा- ये कैसी आजादी ?
कश्मीर से जुड़े एक आईजीपी रैंक के आईपीएस अधिकारी जावेद गिलानी ने भी फेसबुक पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने हत्या की निंदा करते हुए आतंकियों से सवाल किया कि यह कैसी तथाकथित आजादी का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें उन्हें मासूम बच्चों के आंसू भी नहीं दिखते।
इस पर उन्होंने अलगाववादियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। शहीद की मासूम बेटी जोरा को ठीक से अभी पता भी नहीं होगा कि यह कैसे हुआ और क्यों आतंकियों ने ऐसी बर्बरता की, लेकिन आने वाले समय में बच्ची को अपने पिता के देश के लिए किए गए इस बलिदान की हमेशा याद रहेगी।
गिलानी ने फेसबुक पर एक लंबी पोस्ट लिखी, जिसमें कहा गया है कि किसी बेटी को ऐसे अपने पिता को न खोना पड़े, किसी बेटी की आंखों में ऐसे आंसू न हों, किसी बेटी को ऐसे क्रूर समाज में अकेला न रहना पड़े।
इस पर उन्होंने अलगाववादियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। शहीद की मासूम बेटी जोरा को ठीक से अभी पता भी नहीं होगा कि यह कैसे हुआ और क्यों आतंकियों ने ऐसी बर्बरता की, लेकिन आने वाले समय में बच्ची को अपने पिता के देश के लिए किए गए इस बलिदान की हमेशा याद रहेगी।
गिलानी ने फेसबुक पर एक लंबी पोस्ट लिखी, जिसमें कहा गया है कि किसी बेटी को ऐसे अपने पिता को न खोना पड़े, किसी बेटी की आंखों में ऐसे आंसू न हों, किसी बेटी को ऐसे क्रूर समाज में अकेला न रहना पड़े।