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करोड़ों खर्च, फिर भी पीने को साफ पानी नहीं
Updated Mon, 28 May 2018 12:55 AM IST
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बसोहली (आशीष कपूर)। सरकार ने कसबे के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर दिए, पर अभी भी लोगों को पीने के पानी के लिए दरबदर होना पड़ता है।
बसोहली के सांधर इलाके में करोड़ों की लागत से फिल्ट्रेशन प्लांट स्थापित होने से दर्जनों गांवों को स्वच्छ पेयजल मिलने की उम्मीद थी। पर आज भी हालत यह है कि यह प्लांट आम लोगों के किसी काम का नहीं है। ऐसे में सीधे चिरल नाले से पंप किया गया पानी ही सप्लाई कर दिया जाता है। छह साल पहले पूरी हुई इस योजना से लोग अब ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, जबकि सरकारी खजाने में से करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। जानकारों की मानें तो इस फिल्ट्रेशन प्लांट से लगभग 4000 की आबादी वाले इलाके को पानी सप्लाई किया जाता है। बसोहली के द्रम्मन, सांदर, खोली तलाई, डोडला, गनूईं धार, माश्का और सांधर के इलाकों को पानी सप्लाई इसी फिल्ट्रेशन प्लांट के जरिए होता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि बिना साफ किए सीधे नाले से हो रही पानी की सप्लाई से लोगों की सेहत पर भी असर पड़ता है। बरसात के दिनों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। उन्होंने लापरवाही के लिए सीधे तौर पर पीएचई विभाग को जिम्मेदार ठहराया है।
तिलक मनकोटिया ने बताया कि छह वर्ष पूर्व इलाके में लगाए गए फिल्ट्रेशन प्लांट का लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है। विभाग की ओर से फिल्ट्रेशन प्लांट के नजदीक डगवेल बनाकर पाइप लाइन बिछाई गई है, साथ ही ट्रांसफार्मर भी लगाया गया है, लेकिन फिल्ट्रेशन प्लांट की मोटर खुले में लगाई गई है। बारिश में सारा पानी मोटर पर गिरता है, जिससे आए दिन मोटर खराब हो जाती है, ऐसे में कई दिनों तक पेयजल सप्लाई बंद रहती है। सतीश वर्मा ने बताया कि इलाके में लगाए गए चार हैंडपंप मौजूदा समय में खराब हैं। प्राकृतिक जलस्रोत भी काफी दूर हैं। ऐसे में लोगों का काफी समय पानी के जुगाड़ में निकल जाता है। पुरषोत्तम सिंह ने बताया कि चिरल नाले से सीधे होने वाली पानी की सप्लाई में मिट्टी के कण साफ देखे जा सकते हैं। सतवीर ने कहा कि दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए महंगे दाम पर टैंकर का पानी लेना पड़ रहा है, पर अधिकारी कुछ नहीं करते हैं।
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एईई साहब को समस्या की जानकारी ही नहीं
पीएचई विभाग के एईई राजीव सोई से जब फिल्ट्रेशन प्लांट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इस संबंध में डिवीजन को ही जानकारी है। अधिकारी ने पल्ला झाड़ते हुए लोगों की समस्या को एक बार फिर दरकिनार कर दिया, जबकि सांदर का यह क्षेत्र अधिकारी के अधीन ही आता है।
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बसोहली के सांधर इलाके में करोड़ों की लागत से फिल्ट्रेशन प्लांट स्थापित होने से दर्जनों गांवों को स्वच्छ पेयजल मिलने की उम्मीद थी। पर आज भी हालत यह है कि यह प्लांट आम लोगों के किसी काम का नहीं है। ऐसे में सीधे चिरल नाले से पंप किया गया पानी ही सप्लाई कर दिया जाता है। छह साल पहले पूरी हुई इस योजना से लोग अब ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, जबकि सरकारी खजाने में से करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। जानकारों की मानें तो इस फिल्ट्रेशन प्लांट से लगभग 4000 की आबादी वाले इलाके को पानी सप्लाई किया जाता है। बसोहली के द्रम्मन, सांदर, खोली तलाई, डोडला, गनूईं धार, माश्का और सांधर के इलाकों को पानी सप्लाई इसी फिल्ट्रेशन प्लांट के जरिए होता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि बिना साफ किए सीधे नाले से हो रही पानी की सप्लाई से लोगों की सेहत पर भी असर पड़ता है। बरसात के दिनों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। उन्होंने लापरवाही के लिए सीधे तौर पर पीएचई विभाग को जिम्मेदार ठहराया है।
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तिलक मनकोटिया ने बताया कि छह वर्ष पूर्व इलाके में लगाए गए फिल्ट्रेशन प्लांट का लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है। विभाग की ओर से फिल्ट्रेशन प्लांट के नजदीक डगवेल बनाकर पाइप लाइन बिछाई गई है, साथ ही ट्रांसफार्मर भी लगाया गया है, लेकिन फिल्ट्रेशन प्लांट की मोटर खुले में लगाई गई है। बारिश में सारा पानी मोटर पर गिरता है, जिससे आए दिन मोटर खराब हो जाती है, ऐसे में कई दिनों तक पेयजल सप्लाई बंद रहती है। सतीश वर्मा ने बताया कि इलाके में लगाए गए चार हैंडपंप मौजूदा समय में खराब हैं। प्राकृतिक जलस्रोत भी काफी दूर हैं। ऐसे में लोगों का काफी समय पानी के जुगाड़ में निकल जाता है। पुरषोत्तम सिंह ने बताया कि चिरल नाले से सीधे होने वाली पानी की सप्लाई में मिट्टी के कण साफ देखे जा सकते हैं। सतवीर ने कहा कि दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए महंगे दाम पर टैंकर का पानी लेना पड़ रहा है, पर अधिकारी कुछ नहीं करते हैं।
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एईई साहब को समस्या की जानकारी ही नहीं
पीएचई विभाग के एईई राजीव सोई से जब फिल्ट्रेशन प्लांट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इस संबंध में डिवीजन को ही जानकारी है। अधिकारी ने पल्ला झाड़ते हुए लोगों की समस्या को एक बार फिर दरकिनार कर दिया, जबकि सांदर का यह क्षेत्र अधिकारी के अधीन ही आता है।