जम्मू कश्मीर के 80 फीसदी स्कूलों में गर्ल्स शौचालय नहीं
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रियासत में स्कूलों में शौचालयों की स्थिति काफी दयनीय है। सह शिक्षा वाले स्कूलों में 40 से 81 फीसदी तक गर्ल्स शौचालय नहीं हैं। 2010-11 से 2013-14 के बीच गर्ल्स शौचालयों का निर्माण काफी कम संख्या में कराया गया। इसके पीछे वजह फंड की कमी बताई जा रही है।
सरकार का यह जवाब स्वीकार करने योग्य नहीं है। हकीकत यह है कि पर्याप्त फंड उपलब्ध होने के बाद भी उसका उपयोग नहीं किया जा सका। 2010-11 से 2014-15 के बीच 22 से 68 फीसदी की राशि उपयोग में नहीं लाई जा सकी। यह खुलासा कैग की रिपोर्ट में किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी सरकारी स्कूलों में शौचालय का निर्माण किया जाना है। 2010-15 के बीच 24918 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से केवल 6526 शौचालयों का ही निर्माण कराया जा सका। यानी लक्ष्य के विपरीत 74 फीसदी की कमी रही।
आंगनबाड़ी केंद्रों में बेबी फ्रेंडली शौचालयों के निर्माण की सिफारिश
चयनित जिलों में 2010-15 के बीच 5050 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य था, जबकि 2067 ही बन पाए। लक्ष्य का केवल 41 फीसदी ही शौचालयों का निर्माण हो सका। इस अवधि में लक्ष्य को प्राप्त न कर पाने का प्रतिशत 53 से 74 फीसदी के बीच रहा। विभाग की ओर से इसके लिए स्टाफ तथा फंड की कमी को कारण बताया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 2024 शौचालयों के निर्माण के लक्ष्य के विपरीत 270 का ही निर्माण कराया जा सका। यानी 2010-15 के बीच मात्र 13 फीसदी लक्ष्य की प्राप्ति हुई।
पांच चयनित जिलों में 2010-15 के बीच 807 में से 191 आंगनबाड़ी में शौचालयों का निर्माण कराया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बेबी फ्रेंडली शौचालयों के निर्माण की सख्त जरूरत है, ताकि उनमें शुरू से ही शौचालयों के प्रयोग की आदत बन सके।