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पन बिजली पर निर्भरता पड़ रही भारा

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पन बिजली पर निर्भरता पड़ रही भारा
पांच हजार करोड़ की बिजली खरीद, फिर भी रियासत का गुजारा नहीं
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- रियासत में केवल पन बिजली पर निर्भरता पड़ रही भारी
संजीव दुबे
जम्मू। रियासत जम्मू-कश्मीर में केवल पन बिजली पर ही निर्भरता भारी पड़ रही है। थर्मल, सौर और वायु ऊर्जा के नाम पर रियासत में कुछ खास काम न हो पाने के चलते केवल पन बिजली उत्पादन ही हो पा रहा है। पन बिजली उत्पादन मांग से काफी कम हैं और इस वजह से सालाना रियासती सरकार को करीब पांच हजार करोड़ की बिजली खरीदने के बावजूद भी रियासत में चौबीस घंटे बिजली सप्लाई करने का लक्ष्य काफी दूर है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जम्मू कश्मीर पन बिजली उत्पादन की क्षमता करीब बीस हजार मेगावाट के आसपास है। स्टेट सेक्टर में रियासती सरकार ने 900 मेगावाट पन बिजली क्षमता की बगलिहार एक और दो परियोजना को मिलाकर 21 छोटी परियोजनाओं पर कार्य किया है। इन सबकी उत्पादन क्षमता करीब 1208 मेगावाट के करीब है। केंद्रीय सेक्टर के तहत एनएचपीसी की राज्य में परियोजना से 12 फीसदी मुफ्त बिजली को मिलाकर भी राज्य के पास करीब 1450 मेगावाट के आसपास बिजली उपलब्ध रहती है।
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पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते की वजह से सर्दी के मौसम में बगलिहार समेत अन्य परियोजनाएं रन द वाटर स्कीम पर होने से दरिया व नदियों में जल स्तर कम होने से बिजली उत्पादन एक तिहाई तक गिर जाता है। ऐसे में केवल उत्तरी ग्रिड व अन्य राज्यों से बिजली खरीदकर भी बिजली की मांग को पूरा नहीं किया जा पा रहा है।
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बिजली की मांग 2600 मेगावाट के पार
राज्य में बिजली की मांग 2600 मेगावाट के पार पहुंच चुकी हैं जबकि उत्पादन व बिजली खरीद के बावजूद उपलब्धता 1700 से 1800 मेगावाट तक ही रहती है। मांग व उपलब्धता के गैप को पूरा करने के लिए बिजली विभाग की तरफ से जरूरत के अनुसार अघोषित कटौती की जाती है।


थर्मल, सौर ऊर्जा पर कार्य की जरूरत
रियासत में थर्मल पावर पर काम करने की जरूरत है। इसके लिए एनटीपीसी से समझौता भी हुआ था लेकिन उड़ीसा में कोल ब्लाक आवंटन पर पेंच फंस गया और इस मामले पर ज्यादा काम नहीं हो पाया है। इसी तरह सौर ऊर्जा के मामले में केवल लद्दाख में ही 7000 की उत्पादन क्षमता आंकी जा चुकी हैं लेकिन इस पर काम होना अभी बाकी है।
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