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जम्मू-कश्मीरः घाटी के पढ़े लिखे युवा कलम छोड़कर उठा रहे बंदूकें

Fri, 30 Mar 2018 12:38 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली,अमर उजाला,श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली,अमर उजाला,श्रीनगर Updated Fri, 30 Mar 2018 12:38 PM IST
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6 kashmiri youth join militancy in this year mostly are educated
Terrorist - फोटो : DEMO PHOTO
रियासत की सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद घाटी के कई युवा आतंक की राह पर चल पड़े हैं। इसमें शिक्षित युवाओं की संख्या ज्यादा है। इस साल अब तक घाटी के छह युवा कलम छोड़  बंदूक उठा चुके हैं। इन सभी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं।
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सुरक्षा एजेंसियां पढ़े लिखे युवाओं का आतंकवाद में शामिल होना बड़ी चुनौती मान रही हैं। उनका कहना है कि कुछ ऐसे तत्व घाटी में सक्रिय हैं जो शिक्षित युवाओं को बहका रहे हैं। हालांकि, हाल ही में केंद्रीय गृह सचिव ने श्रीनगर में हुई सुरक्षा समीक्षा बैठक में राज्य सरकार को स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में भर्ती रोकने के लिए प्रयासों में सहयोग का आश्वासन दिलाया है। 
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हाल ही में वायरल तस्वीरों में आतंकी बने युवाआें ने संक्षेप में अपना बायोडाटा भी वायरल किया। तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन अशरफ सेहरई के आतंकी बने बेटे जुनैद अहमद सेहरई की वायरल तस्वीर इसका ताजा उदाहरण है। वह हिजबुल में शामिल हो गया। यहां तक कि आतंकी बनने की तिथि को भी अंकित किया।
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जुनैद कश्मीर यूनिवर्सिटी से एमबीए है। श्रीनगर के फैज मुश्ताक वाजा और दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के रौफ बशीर खांड़े की हाल ही में इसी तरह से तस्वीर सामने आई। फैज की वायरल तस्वीर पर लश्कर-ए-तैयबा और रौफ की तस्वीर पर हिजबुल मुजाहिदीन लिखा था।

रौफ बीए फर्स्ट ईयर का छात्र था। इस साल की शुरुआत में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का स्कॉलर मन्नान वानी हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था। वह उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में रहने वाला है। 

हैरान करने वाले हैं आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 280 स्थानीय युवाओं ने आतंकवाद का रास्ता अपनाते हुए हाथों में बंदूक उठा ली। वर्ष 2017 में 126, 2014 में 53, 2013 में 16, 2012 में 21, 2011 में 23 और 2010 में 54 युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए। इनमें से अधिकतर को भारतीय सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया है।  

मां की अपील पर आतंक की राह छोड़ घर लौटा

आतंकी बने युवाओं के परिवार वाले और राज्य की सभी सुरक्षा एजेंसियां उन्हें मुख्यधारा में वापस आने की अपील करती रही हैं। सबसे पहली अपील वर्ष 2017 में दक्षिणी कश्मीर के फुटबाल खिलाड़ी से आतंकी बने माजिद इरशाद खान के परिवार ने की थी।

इसका सकारात्मक असर दिखा। इसके बाद अभिभावक अपने बेटों को आतंक के दलदल से निकालने के लिए खुलकर मीडिया के सामने अपील करने लगे। कुछ युवा लौटे भी। यहां तक कि इसी बुधवार को श्रीनगर के खान्यार में रहने वाले युवक की मां ने बेटे से अपील की थी, ‘तुम तो कभी झूठ नहीं बोलते थे

वापस आने का वादा किया पर वापस क्यों नहीं आ रहे हो।’ उसकी इस अपील के बाद युवक ने आतंक की राह छोड़कर घर लौट आया। डीजीपी डॉ एसपी वैद ने वीरवार की सुबह अपने एक ट्वीट में उसके वापस लौटने की बात साझा की। उन्होंने लिखा, ‘एक मां की अपील अपने बेटे को आतंक का रास्ते छुड़वाने में रंग लाई। ऊपर वाला परिवार को खुश रखे और बाकियों को भी सही रास्ता दिखाए।’

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