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रसाना मर्डर केस की जांच सीबीआई से करवाने को आमरण अनशन
Updated Mon, 02 Apr 2018 12:36 PM IST
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RASANA
- फोटो : DEMO PHOTO
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हीरानगर। हीरानगर के रसाना गांव में नाबालिग बच्ची के अपहरण व हत्या मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग पर लोगों ने शनिवार को आमरण अनशन शुरू कर दिया। लोगों नेे कहा है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं की जाती वे यहां से नहीं हटेंगे।
हाईवे पर स्थित कूटा मोड़ के नजदीक एक मंदिर परिसर में अनशन शुरू किया गया। शनिवार को चार महिलाओं ने गले में हार पहन कर आमरण अनशन की शुरुआत की। उनके समर्थन में हिंदू एकता मंच के नेताओं के अलावा अन्य कई लोग भी वहां पहुंचे।
मंच के प्रधान विजय शर्मा ने कहा कि रसाना मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर मंच ने धरने प्रदर्शन किए गा, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। इसके बाद लोगों ने आमरण अनशन का निर्णय लिया। मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रंाच हर रोज किसी न किसी को उठा लेती है और दबाव बनाती है कि वे इस केस के गवाह बन जाएं।
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इससे लोग परेशान हैं और उनमें डर का माहौल बना हुआ है। इसीलिए हिंदू एकता मंच पहले दिन से मांग कर रहा है कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके और दोषियों को सजा मिल सके। इस मामले को उलझाया जा रहा है, जबकि हम चाहते हैं कि बच्ची को इंसाफ मिले। पीड़िता किसी समुदाय विशेष की नहीं, बल्कि पूरे समाज की बेटी थी।
अनशन पर बैठीं त्रिशला देवी निवासी रसाना, दर्शना देवी निवासी धम्याल, सुषमा देवी निवासी सतूरा व अंजना शर्मा निवासी रसाना ने ब्रांच पर निर्दोष लोगों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों को बेरहमी से पीटा जा रहा है। लोगों को सरकारी गवाह बनने को मजबूर किया जा रहा है। ब्रांच की टीम जब चाहे गांवों में आ घुसती है और किसी न किसी उठा कर ले जाती है।
इसलिए हमें क्राइम ब्रांच की जांच पर भरोसा नहीं है। जांच सीबीआई को सौंपी जाए दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। सरकार ऐसा करने से क्यों कतारा रही है। क्यों सरकार हजारों लोगों की आवाज अनसुना कर रही है। सरकार के इस रवैये से साफ है कि वह ब्रांच को अपने इशारे पर चला रही है।
मामला सीबीआई के हाथ आता है तो वह ऐसा नहीं कर पाएगी। महिलाओं ने कहा कि वे बच्ची के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए अनशन कर अपनी जान दे देंगे, लेकिन मामले की सीबीआई जांच से कम हमें कुछ भी मंजूर नहीं। इस मौके पर हिंदू एकता मंच के नेता कांत कुमार, विजय टगोत्रा, भागमल खजूरिया, जोगेश सिंह के अलावा कूटा व आसपास के गांवों के लोग भी उपस्थित थे।
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हाईवे पर स्थित कूटा मोड़ के नजदीक एक मंदिर परिसर में अनशन शुरू किया गया। शनिवार को चार महिलाओं ने गले में हार पहन कर आमरण अनशन की शुरुआत की। उनके समर्थन में हिंदू एकता मंच के नेताओं के अलावा अन्य कई लोग भी वहां पहुंचे।
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मंच के प्रधान विजय शर्मा ने कहा कि रसाना मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर मंच ने धरने प्रदर्शन किए गा, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। इसके बाद लोगों ने आमरण अनशन का निर्णय लिया। मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रंाच हर रोज किसी न किसी को उठा लेती है और दबाव बनाती है कि वे इस केस के गवाह बन जाएं।
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इससे लोग परेशान हैं और उनमें डर का माहौल बना हुआ है। इसीलिए हिंदू एकता मंच पहले दिन से मांग कर रहा है कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके और दोषियों को सजा मिल सके। इस मामले को उलझाया जा रहा है, जबकि हम चाहते हैं कि बच्ची को इंसाफ मिले। पीड़िता किसी समुदाय विशेष की नहीं, बल्कि पूरे समाज की बेटी थी।
अनशन पर बैठीं त्रिशला देवी निवासी रसाना, दर्शना देवी निवासी धम्याल, सुषमा देवी निवासी सतूरा व अंजना शर्मा निवासी रसाना ने ब्रांच पर निर्दोष लोगों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों को बेरहमी से पीटा जा रहा है। लोगों को सरकारी गवाह बनने को मजबूर किया जा रहा है। ब्रांच की टीम जब चाहे गांवों में आ घुसती है और किसी न किसी उठा कर ले जाती है।
इसलिए हमें क्राइम ब्रांच की जांच पर भरोसा नहीं है। जांच सीबीआई को सौंपी जाए दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। सरकार ऐसा करने से क्यों कतारा रही है। क्यों सरकार हजारों लोगों की आवाज अनसुना कर रही है। सरकार के इस रवैये से साफ है कि वह ब्रांच को अपने इशारे पर चला रही है।
मामला सीबीआई के हाथ आता है तो वह ऐसा नहीं कर पाएगी। महिलाओं ने कहा कि वे बच्ची के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए अनशन कर अपनी जान दे देंगे, लेकिन मामले की सीबीआई जांच से कम हमें कुछ भी मंजूर नहीं। इस मौके पर हिंदू एकता मंच के नेता कांत कुमार, विजय टगोत्रा, भागमल खजूरिया, जोगेश सिंह के अलावा कूटा व आसपास के गांवों के लोग भी उपस्थित थे।