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जम्मू-कश्मीर में चार दिन में दो मेजर समेत 45 जवान शहीद
Mon, 18 Feb 2019 02:30 PM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 18 Feb 2019 02:30 PM IST
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- फोटो : फाइल
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कश्मीर के हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं। पिछले चार दिनों में जम्मू कश्मीर में दो मेजर, 40 सीआरपीएफ समेत कुल 45 जवान शहीद हो चुके हैं। इन जवानों की शहादत राज्य की स्थित बताने के लिए काफी है। सोमवार को पुलवामा में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में मेजर डीएस ढोंडियाल समेत चार जवान शहीद हो गए। शनिवार को नौशेरा में मेजर चित्रेश बिष्ट माइन धमाके में शहीद हो गए थे।
सुरक्षा बलों को सबसे बड़ा नुकसान गुरुवार को हुआ था जब एक फिदायीन हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। यह हादसा उस समय हुआ था जब सीआरपीएफ का काफिला दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जले से गुजर रहा था। उसी समय एक आतंकवादी ने विस्फोटक से भरे एक एसयूवी को काफिले की एक बस से टकरा दिया था।
यह घाटी में सुरक्षाबलों के लिए बड़ा नुकसान था। इसके बाद शनिवार को राजोरी जिले के नौशेरा सेक्टर में मेजर चित्रांश एक माइन को ब्लास्ट करने में शहीद हो गए थे। इस बारे में आशंका जताई जा रही थी कि ये माइंस पाकिस्तान द्वारा लगाई गई हो सकती हैं। इस घटना में दो जवान घायल भी हुए थे।
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शहादत का यह सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। पुलवामा के पिंगलेन में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर रविवार की रात सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया। इसके बाद मुठभेड़ में मेजर ढोंडियाल व तीन जवान शहीद हो गए। मेजर ढोंडियाल भी मेजर बिष्ट की तरह देहरादून (उत्तराखंड) के रहने वाले थे।
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सुरक्षा बलों को सबसे बड़ा नुकसान गुरुवार को हुआ था जब एक फिदायीन हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। यह हादसा उस समय हुआ था जब सीआरपीएफ का काफिला दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जले से गुजर रहा था। उसी समय एक आतंकवादी ने विस्फोटक से भरे एक एसयूवी को काफिले की एक बस से टकरा दिया था।
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यह घाटी में सुरक्षाबलों के लिए बड़ा नुकसान था। इसके बाद शनिवार को राजोरी जिले के नौशेरा सेक्टर में मेजर चित्रांश एक माइन को ब्लास्ट करने में शहीद हो गए थे। इस बारे में आशंका जताई जा रही थी कि ये माइंस पाकिस्तान द्वारा लगाई गई हो सकती हैं। इस घटना में दो जवान घायल भी हुए थे।
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शहादत का यह सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। पुलवामा के पिंगलेन में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर रविवार की रात सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया। इसके बाद मुठभेड़ में मेजर ढोंडियाल व तीन जवान शहीद हो गए। मेजर ढोंडियाल भी मेजर बिष्ट की तरह देहरादून (उत्तराखंड) के रहने वाले थे।