{"_id":"5aa584bc4f1c1ba8768b4fb6","slug":"41520796860-jammu-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एडीसी फार्मले के विरोध में कोटरंका बंद, चारों ओर पसरा रहा सन्नाटा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एडीसी फार्मले के विरोध में कोटरंका बंद, चारों ओर पसरा रहा सन्नाटा
Updated Mon, 12 Mar 2018 10:51 PM IST
विज्ञापन
shutdown
- फोटो : FILE PHOTO
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजोरी। एडीसी फार्मूले के विरोध में रविवार को कोटरंका बंद रहा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब हमें भी कोटरंका को जिला से बनाने से कम कुछ भी मंजूर नहीं। उन्होंने कोटरंका के एडीसी को कालाकोट का अतिरिक्त कार्यभार देने का विरोध करते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि सरकार जैसा चाहेगी जनता को उसकी तरह नचाती रहेगी।
पहले हमें एडीसी दिया गया, अब हमारे साथ कालाकोट को भी जोड़ दिया गया। कोटरंका के लोगों को यह मंजूर नहीं। पहले हम एडीसी मिलने से संतुष्ट थे, लेकिन अब हम भी कोटरंका को जिला बनाने के लिए आंदोलन का आगाज कर रहे हैं, जिसे दबाना सरकार के लिए असंभव होगा।
कोटरंका के एडीसी को महीने में 15 दिन कालाकोट में बैठने के सरकार के आदेश पर अब बवाल मचने लगा है। इसके विरोध में कोटरंका में भी जिले की मांग उठने लगी है। रविवार को कोटरंका वासियों ने दूसरे दिन भी अपनी दुकानें बंद रखीं व जिले की मांग पर धरने-प्रदर्शन किए।
विज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के प्रति कड़ा रोष प्रकट करने हुए कहा कि सरकार ने कोटरंका को जिला बनाने की बात कई बार कही है, लेकिन जिला न बना कर एडीसी की पोस्ट क्रिएट की थी, लेकिन कालाकोट में बंद व धरने प्रदर्शन के बाद सरकार ने कोटरंका के एडीसी को ही कालाकोट का अतिरिक्त कार्यभार दे दिया।
अब कोटरंका के लोग न तो अपने एडीसी को कालाकोट जाने देंगे और न ही जिला बनाए बिना चैन लेंगे। गुस्साए लोगों ने सरकार को साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि वह बिना समय गंवाए कोटरंका को जिला घोषित करे।
यदि सरकार कोटरंका को जिला नहीं बनाती है, तो कोटरंका की जनता इसके लिए उग्र रूप धारण कर आमरण अनशन तक करने के लिए तैयार होगी। उन्होंने बताया कि सोमवार से कोटरंका के अन्य क्षेत्रों के लोग भी अपनी दुकानें बंद कर कोटरंका पहुंचेगे व कोटरंका को जिला बनाने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाएंगे।
विज्ञापन
पहले हमें एडीसी दिया गया, अब हमारे साथ कालाकोट को भी जोड़ दिया गया। कोटरंका के लोगों को यह मंजूर नहीं। पहले हम एडीसी मिलने से संतुष्ट थे, लेकिन अब हम भी कोटरंका को जिला बनाने के लिए आंदोलन का आगाज कर रहे हैं, जिसे दबाना सरकार के लिए असंभव होगा।
विज्ञापन
कोटरंका के एडीसी को महीने में 15 दिन कालाकोट में बैठने के सरकार के आदेश पर अब बवाल मचने लगा है। इसके विरोध में कोटरंका में भी जिले की मांग उठने लगी है। रविवार को कोटरंका वासियों ने दूसरे दिन भी अपनी दुकानें बंद रखीं व जिले की मांग पर धरने-प्रदर्शन किए।
विज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के प्रति कड़ा रोष प्रकट करने हुए कहा कि सरकार ने कोटरंका को जिला बनाने की बात कई बार कही है, लेकिन जिला न बना कर एडीसी की पोस्ट क्रिएट की थी, लेकिन कालाकोट में बंद व धरने प्रदर्शन के बाद सरकार ने कोटरंका के एडीसी को ही कालाकोट का अतिरिक्त कार्यभार दे दिया।
अब कोटरंका के लोग न तो अपने एडीसी को कालाकोट जाने देंगे और न ही जिला बनाए बिना चैन लेंगे। गुस्साए लोगों ने सरकार को साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि वह बिना समय गंवाए कोटरंका को जिला घोषित करे।
यदि सरकार कोटरंका को जिला नहीं बनाती है, तो कोटरंका की जनता इसके लिए उग्र रूप धारण कर आमरण अनशन तक करने के लिए तैयार होगी। उन्होंने बताया कि सोमवार से कोटरंका के अन्य क्षेत्रों के लोग भी अपनी दुकानें बंद कर कोटरंका पहुंचेगे व कोटरंका को जिला बनाने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाएंगे।