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जैनब बी को नहीं नसीब हो पाया ससुराल का कब्रिस्तान
Updated Sat, 10 Feb 2018 12:57 AM IST
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पुंछ। वीरवार को पाकिस्तानी गोलाबारी में मारी गई कृष्णा घाटी सेक्टर के बलनोई गांव की रहने वाली जैनब बी को उसके ससुराल का कब्रिस्तान भी नसीब न हो सका। न उस गांव की मिट्टी नसीब हुई, जिसमें उसने अपने प्राण त्यागे। पाकिस्तान की तरफ से लगातार हो रही गोलाबारी के कारण जैनब के शव को कई किलोमीटर दूर उसके मायके के गांव छुंगा के कब्रिस्तान में दफनाना पड़ा। इतना ही नहीं गोलाबारी के कारण जैनब के शव को वीरवार देर शाम से शुक्रवार तड़के तक उसके घर में ही रखना पड़ा। लगातार जारी गोलाबारी के बीच शव को गांव से निकालना काफी जोखिम भरा था। ऐसे में शुक्रवार को तड़के जबकि गोलाबारी की रफ्तार कुछ कम थी, लेकिन रुक-रुक कर दोनों तरफ से फायर किए जा रहे थे, करीब तीन बजे स्वास्थ्य विभाग की टीम और जैनब के परिवार वाले शव को गांव से कई किलोमीटर दूर तक पैदल लेकर गए। वहां से शव को एंबुलेंस से उपजिला अस्पताल मेंढर पहुंचाया गया। अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम कर उसे परिजनों के हवाले कर दिया गया। इसके बाद जैनब के परिवार वालों ने शव को उसके पैतृक गांव छुंगा, तहसील मेंढर के कब्रिस्तान में सपुर्देखाक किया। जैनब के अंतिम संस्कार के समय उसके सगे-संबंधियों के अलावा गांव बलनोई के बहुत ही कम शामिल हो सके।
मरने के बाद नहीं नसीब हो पाती अपने गांव की मिट्टी
नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी गोलाबारी में मारे जाने वाले ज्यादातर लोगों में से कोई ही खुशनसीब होता है, जिसे अपने गांव का श्मशान या कब्रिस्तान नसीब होता है। गत वर्ष करमाड़ा में पाकिस्तान की गोलाबारी में मारे जाने वाले सेना के जवान शौकत और उसकी पत्नी के शव भी करमाड़ा में दफन नहीं किए जा सके थे। उनके शवों को भी उनके पुश्तैनी घर मेंढर के कब्रिस्तान में दफनाया गया था। पाकिस्तानी गोलाबारी में मारे जाने वालों को उनके गांव में न दफना पाने का उनके परिजनों एवं रिश्तेदारों को मलाल रहता है।
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मरने के बाद नहीं नसीब हो पाती अपने गांव की मिट्टी
नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी गोलाबारी में मारे जाने वाले ज्यादातर लोगों में से कोई ही खुशनसीब होता है, जिसे अपने गांव का श्मशान या कब्रिस्तान नसीब होता है। गत वर्ष करमाड़ा में पाकिस्तान की गोलाबारी में मारे जाने वाले सेना के जवान शौकत और उसकी पत्नी के शव भी करमाड़ा में दफन नहीं किए जा सके थे। उनके शवों को भी उनके पुश्तैनी घर मेंढर के कब्रिस्तान में दफनाया गया था। पाकिस्तानी गोलाबारी में मारे जाने वालों को उनके गांव में न दफना पाने का उनके परिजनों एवं रिश्तेदारों को मलाल रहता है।
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