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36 तरह के स्पोर्ट्स के लिए केवल चार कोच
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Fri, 03 Jul 2015 10:29 PM IST
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रियासत में साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा ढांचे को विकसित किया गया है। कालेजों के नए भवन खड़े किए गए हैं। मगर खेलों की ओर विद्यार्थियों का रुझान बढ़ाने के लिए कुछ खास नहीं हो पाया है। खेल ढांचे के साथ स्टाफ में कश्मीर के मुकाबले जम्मू का शारीरिक शिक्षा विभाग कोसों पीछे है। वर्ष 1976 के बाद विभाग में कोच का कोई नया पद सृजित नहीं हो पाया है।
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उस समय सात कालेजों में करीब दस हजार विद्यार्थी थे। लेकिन आज संभाग स्तर पर 213 मान्यता प्राप्त कालेजों में यह संख्या एक लाख तक पहुंच गई है। विभाग अंतर कालेज स्तर पर 36 खेल स्पर्धाओं की मेजबानी कर रहा है। लेकिन कोचों में यह आंकड़ा न के बराबर है। श्रीनगर में हाल ही में डेवलपमेंट द शेड्यूल कैलेंडर फार स्पोर्ट्स एक्टिविटी की बैठक में विवि से इस मुद्दे को मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के समक्ष भी उठाया गया है।
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कोचों की भारी कमी से जूझ रहे शारीरिक शिक्षा विभाग, जम्मू विवि को किसी तरह से चलाया जा रहा है। विभाग के पास टेबल टेनिस, फुटबाल, वालीबाल और क्रिकेट कोच के ही स्थायी पद सृजित हैं। जबकि अन्य किसी भी खेल में कोई स्थायी पद ही नहीं है। इसके विपरीत कश्मीर विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग में 12 कोचों के अलावा दो उपनिदेशक (स्वतंत्र कार्यभार), तीन सहायक निदेशक काम कर रहे हैं।
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जबकि जम्मू विवि के विभाग में सिर्फ एक ही सहायक निदेशक का पद है, जो पिछले दो साल से खाली पड़ा है। पीटीआई कैंपस का पद भी कई सालों से खाली पड़ा है। विभाग को सालाना गतिविधियां चलाने के लिए सिर्फ 17 लाख रुपये का बजट मुहैया करवाया जाता है। विभाग के निदेशक प्रो. ध्यान सिंह भाऊ के अनुसार विभाग ने एथलेटिक, हाकी, रेसलिंग/जूडो, कबड्डी/खो-खो, बैडमिंटन, बास्केटबाल के कोचों के पद मांगें गए हैं।
लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो पाया है। विभाग का बजट बढ़ाकर साठ लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। खेलों को विकसित करने के लिए एनआईएस कोचों की ही सेवाएं ली जानी चाहिए।