फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   200 families left the village for terror of monkeys

बंदरों के आतंक से 200 परिवारों ने छोड़ गांव

Sun, 19 Jun 2016 12:36 PM IST
अमन शर्मा, अमर उजाला/उधमपुर
अमन शर्मा, अमर उजाला/उधमपुर Updated Sun, 19 Jun 2016 12:36 PM IST
विज्ञापन
200 families left the village for terror of monkeys
- फोटो : अमर उजाला

जिले के चड़ई गांव में बंदरों के आतंक के कारण करीब दो सौ परिवार गांव छोड़ चुके हैं। फसल बर्बाद करने के साथ ही उनके हिंसक व्यवहार ने भी लोगों का घरों से निकलना मुश्किल कर दिया था। अब गांव में करीब 50 परिवार ही बचे हैं। ये वे लोग हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। 

विज्ञापन


पिछले पांच साल में बंदरों की संख्या हजारों में पहुंच चुकी है। यही हाल धनू व चन्नास गांव के भी हैं। इन गांवों से भी अभी तक कई परिवार पलायन कर उधमपुर आ गए हैं। ग्रामीण कई बार जिला प्रशासन से बंदरों से बचाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। 
विज्ञापन


 चड़ई निवासी पुष्पा देवी (70) ने बताया कि जब वह ब्याह कर इस गांव में आई थीं, तब गांव में करीब 250 परिवार रहते थे। पर पिछले कुछ साल में बंदरों के आतंक ने 200 से अधिक परिवारों को दरबदर कर दिया। जो लोग अभी गांव में रह रहे हैं, वे आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से गांव नहीं छोड़ पा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं स्थानीय निवासी राजेश कुमार व राम पुरुषोत्तम ने बताया कि अच्छी खेती के आधार पर पहले चड़ई एक समृद्ध गांव था, पर बंदरों ने फसलों की ऐसी बर्बादी शुरू की कि ग्रामीणों को खेती बंद कर रोजगार के लिए गांव छोड़ना पड़ा। 

हिमाचल के वन विभाग से चल रही है बात : चौधरी

200 families left the village for terror of monkeys
udhampur - फोटो : Amar Ujala
इस समस्या के बारे में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सचिव शाहिद इकबाल चौधरी ने कहा कि उन्हें लोगों के गांव छोड़ने की जानकारी नहीं है। हालांकि चड़ई और अन्य गांवों में बंदरों के आतंक से वह अवगत हैं। इसको लेकर हिमाचल प्रदेश वन विभाग से बात चल रही है। उनके पास बंदरों के आतंक से निपटने के लिए कार्यक्रम है। इसके बारे में वन मंत्री से बात कर योजना बनाई जा रही है। कुछ ही माह में लोगों को बंदरों के आतंक से निजात मिल जाएगी।

हिमाचल के पास नहीं है कोई कारगर तरीका
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश में बंदरों को मारने की अनुमति राज्य सरकार को दी थी। इसी तरह बिहार में नील गायों को भी मारने की अनुमति दी गई थी, लेकिन यह मामला अब सुप्रीमकोर्ट में चला गया है। इस तरह देखा जाए तो केंद्र के इस फैसले से यह बात साबित होती है कि हिमाचल प्रदेश के पास भी बंदरों के आतंक से निपटने का कोई कारगर तरीका नहीं है। 

समस्या से मंत्री भी गंभीर नहीं : सरपंच
इसके बारे में चड़ई के सरपंच मक्खन लाल ने कहा कि बंदरों के आतंक से गांव में हर कोई परेशान है। 200 परिवार बंदरों के कारण गांव छोड़ने पर मजबूर हो गए। अब खेती तक नहीं हो पा रही है। इसके बारे में प्रशासन के कई आला अधिकारियों और मंत्रियों से बात की गई, लेकिन हर किसी ने बंदरों की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया, इसीलिए अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed