यहां 22 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बरी हुए 2 पुलिसकर्मी
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केस के अनुसार ठाठरी पुलिस पोस्ट में अब्दुल रशीद और रमेश कुमार तैनात थे। दोनों पुलिस पेट्रोलिंग टीम के साथ 23 मार्च 1994 को निकले। गगरानी भेला निवासी प्रयोग सिंह ने पुलिस में परवीन सिंह ने शिकायत दर्ज कराई। उसने कहा कि दोनों पुलिस कर्मियों ने परवीन और उसकी मां को हिरासत में लिया।
परवीन सिंह को डराया-धमकाया गया और उससे एक हजार रुपये मांगे गए। एक हजार रुपये नहीं दिए जाने पर गलत केस में फंसाने की धमकी भी दी गई। मामला पांच सौ रुपये में बना और पुलिस कर्मी को पांच सौ रुपये दिए गए। शिकायतकर्ता ने एसएसपी डोडा (विजिलेंस) को शिकायत दर्ज कराई।
विजिलेंस ने 1994 में दर्ज किया था मामला
विजिलेंस ने 1994 में मामला दर्ज किया। हाईकोर्ट के न्यायाधीश ताशी रबसटन ने एडवोकेट एपी सिंह की दलीलों पर गौर किया। कोर्ट ने पाया कि अपराध मानवीय और असल जिंदगी से दूर रहने वाले लोग करते हैं।
कोर्ट के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि वह मानवता के आधार पर किसी केस का फैसला करे। केस की गंभीरता पर गौर करना पड़ता है। सबूत की जरूरत होती है। पिछले 22 साल से केस की सुनवाई चल रही है। न्यायिक एवं कानून के तर्कों पर गौर करने के बाद दोनों को आरोप से बरी करने के आदेश दिए।