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निगम का ये कैसा काम, टैक्स हो रहा 'जाम'
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निगम का ये कैसा काम, टैक्स हो रहा ‘जाम’
अब तक लागू नहीं हो पाया हाउस टैक्स
नगर निगम की आय में सबसे बड़ा रोड़ा, 1.22 लाख घरों से नहीं लिया जाता है टैक्स
10 करोड़ तक हो सकती है इससे सालाना आय
धीरेंद्र सिंह
जम्मू। जम्मू नगर निगम में हाउस टैक्स लागू नहीं होना उसकी आय में बड़ा रोड़ा साबित हो रहा है। हाल में बीते वित्तीय वर्ष में निगम की आय आठ करोड़ 65 लाख रुपये रही। इसमें निगम मामूली यूजर्स चार्ज भी फिलहाल पूरी तरह से नहीं वसूल पा रहा है। वहीं आज तक नगर निगम हाउस टैक्स लागू करने पर कोई उचित फैसला नहीं ले पाया है। अन्य राज्यों में लागू होने वाले नगर निगम के हाउस टैक्स से तुलना करें तो इससे नगर निगम को करीब 12.20 करोड़ रुपये की आय हो सकती है।
जम्मू नगर निगम के 2005 से 2010 के कार्यकाल में हाउस टैक्स को उस समय 71 वार्डों में लागू करने पर हाउस की बैठक में चर्चा हुई थी, लेकिन इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद से दोबारा निगम चुनाव के बाद अब तक कोई चर्चा नहीं हुई है।
निगम के अधिकारी मानते हैं कि यदि हाउस टैक्स या प्रापर्टी टैक्स को लागू किया जाए, तो निगम की वर्तमान आय में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो सकती है। इसी पैसे को शहर की सफाई व्यवस्था में अच्छे तरीके से खर्च किया जा सकता है।
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मामूली यूजेज चार्ज भी नहीं ले पा रहे
75 वार्डों में दो लाख से अधिक घर हैं। निगम ने सफाई के लिए यूजेज चार्ज के रूप में 100 रुपये मासिक चार्ज लेना शुरू किया है, लेकिन इस हिसाब से अगर ठीक से चार्ज लिया जाता तो 1.22 करोड़ रुपये एकत्रित कर सकता है। दो वर्ष से रेहड़ियों के लाइसेंस न तो बन रहे हैं और न रीन्यू हो रहे हैं। ऐसे में इनसे होने वाली आय का जरिया भी रुकता जा रहा है। वहीं शहर में अवैध निर्माण भी जोरशोर से हो रहे हैं, न ही नक्शे पास हो रहे हैं, न उन बिल्डिंग से चार्ज लिया जा रहा है। यह निगम के लिए सबसे बड़ा नुकसान साबित हो रहा है। पार्किंग, विज्ञापन, एनओसी और जुर्माना राशि में वर्षों से तबदीली नहीं होने से भी निगम को बड़ा नुकसान हो रहा है।
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क्लोजिंग के दौरान कम हुई आय
पिछले वर्ष जहां नगर निगम की आय 10.78 करोड़ रुपये थी, वहीं इस बार 8.5 करोड़ रुपये रहने के पीछे चुनाव को कारण बताया जा रहा है। निगम के एक अधिकारी ने कहा कि कर्मचारियों की ड्यूटी चुनाव में लगी हुई है। इसलिए मार्च के अंत में चार्जेस नहीं जमा हो सके। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा कलेक्शन मार्च में क्लोजिंग से पहले ही होती है।
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बीते वित्तीय वर्ष में आय 8.65 करोड़ खर्च 124 करोड़
केंद्र और राज्य सरकार की मदद न मिले तो नगर निगम अपना खर्च तक वहन नहीं कर सकता है। निगम की वार्षिक आय बीत वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ 65 लाख रही, जबकि खर्च 124 करोड़ रहा। आंकड़ों से साफ है कि निगम अपने कर्मचारियों को सिर्फ वेतन भी अपनी कमाई से देने की हालत में नहीं है। 31 मार्च 2019 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में निगम को रेवेन्यू सेक्शन से 5.5 करोड़ रुपये, बिल्डिंग से 1.46 करोड़ रुपये, हेल्थ एंड सैनिटेशन से 1.1 करोड़ रुपये, डेथ एंड बर्थ सर्टिफिकेट से 15 लाख रुपये, वेटनरी से 7 लाख रुपये, ट्रांसपोर्ट से 7 लाख रुपये और अन्य सेक्शन से 30 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। वहीं जम्मू नगर निगम के संचालन के लिए इस वित्तीय वर्ष में 124 करोड़ रुपये की ग्रांट सरकार से मिली थी।
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कर्मचारियों का खर्च भी नहीं उठा सकता निगम
निगम में करीब तीन हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। इनके वेतन पर ही मासिक दो करोड़ रुपये का खर्च आता है। जहां निगम की कमाई वार्षिक 8 करोड़ 65 लाख रुपये है, वहीं वेतन पर खर्च 12 करोड़ रुपये हैं। ऐसे में निगम अपनी कमाई से कर्मचारियों को वेतन देने की स्थिति में भी नहीं है। बता दें कि इससे पहले वित्तीय वर्ष में निगम ने 10.78 करोड़ रुपये की आय प्राप्त की थी।
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इन सेक्शन में होती है आय
बिल्डिंग सेक्शन, हेल्थ सेक्शन, डेथ एंड बर्थ सेक्शन, वेटनरी सेक्शन, ट्रांसपोर्ट सेक्शन, रेवेन्यू सेक्शन, जनरल एडमिनट्रेशन सेक्शन और अन्य सर्विस सेक्शन।
सभी घरों व अन्य निगम संपत्तियों से शुल्क पूरी तरह से एकत्र नहीं हो पा रहा है। व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास चल रहा है। आय बढ़ाने के लिए अन्य विकल्प के बारे में विचार करेंगे।
-चंद्र मोहन गुप्ता, मेयर, नगर निगम
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अब तक लागू नहीं हो पाया हाउस टैक्स
नगर निगम की आय में सबसे बड़ा रोड़ा, 1.22 लाख घरों से नहीं लिया जाता है टैक्स
10 करोड़ तक हो सकती है इससे सालाना आय
धीरेंद्र सिंह
जम्मू। जम्मू नगर निगम में हाउस टैक्स लागू नहीं होना उसकी आय में बड़ा रोड़ा साबित हो रहा है। हाल में बीते वित्तीय वर्ष में निगम की आय आठ करोड़ 65 लाख रुपये रही। इसमें निगम मामूली यूजर्स चार्ज भी फिलहाल पूरी तरह से नहीं वसूल पा रहा है। वहीं आज तक नगर निगम हाउस टैक्स लागू करने पर कोई उचित फैसला नहीं ले पाया है। अन्य राज्यों में लागू होने वाले नगर निगम के हाउस टैक्स से तुलना करें तो इससे नगर निगम को करीब 12.20 करोड़ रुपये की आय हो सकती है।
जम्मू नगर निगम के 2005 से 2010 के कार्यकाल में हाउस टैक्स को उस समय 71 वार्डों में लागू करने पर हाउस की बैठक में चर्चा हुई थी, लेकिन इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद से दोबारा निगम चुनाव के बाद अब तक कोई चर्चा नहीं हुई है।
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निगम के अधिकारी मानते हैं कि यदि हाउस टैक्स या प्रापर्टी टैक्स को लागू किया जाए, तो निगम की वर्तमान आय में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो सकती है। इसी पैसे को शहर की सफाई व्यवस्था में अच्छे तरीके से खर्च किया जा सकता है।
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मामूली यूजेज चार्ज भी नहीं ले पा रहे
75 वार्डों में दो लाख से अधिक घर हैं। निगम ने सफाई के लिए यूजेज चार्ज के रूप में 100 रुपये मासिक चार्ज लेना शुरू किया है, लेकिन इस हिसाब से अगर ठीक से चार्ज लिया जाता तो 1.22 करोड़ रुपये एकत्रित कर सकता है। दो वर्ष से रेहड़ियों के लाइसेंस न तो बन रहे हैं और न रीन्यू हो रहे हैं। ऐसे में इनसे होने वाली आय का जरिया भी रुकता जा रहा है। वहीं शहर में अवैध निर्माण भी जोरशोर से हो रहे हैं, न ही नक्शे पास हो रहे हैं, न उन बिल्डिंग से चार्ज लिया जा रहा है। यह निगम के लिए सबसे बड़ा नुकसान साबित हो रहा है। पार्किंग, विज्ञापन, एनओसी और जुर्माना राशि में वर्षों से तबदीली नहीं होने से भी निगम को बड़ा नुकसान हो रहा है।
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क्लोजिंग के दौरान कम हुई आय
पिछले वर्ष जहां नगर निगम की आय 10.78 करोड़ रुपये थी, वहीं इस बार 8.5 करोड़ रुपये रहने के पीछे चुनाव को कारण बताया जा रहा है। निगम के एक अधिकारी ने कहा कि कर्मचारियों की ड्यूटी चुनाव में लगी हुई है। इसलिए मार्च के अंत में चार्जेस नहीं जमा हो सके। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा कलेक्शन मार्च में क्लोजिंग से पहले ही होती है।
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बीते वित्तीय वर्ष में आय 8.65 करोड़ खर्च 124 करोड़
केंद्र और राज्य सरकार की मदद न मिले तो नगर निगम अपना खर्च तक वहन नहीं कर सकता है। निगम की वार्षिक आय बीत वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ 65 लाख रही, जबकि खर्च 124 करोड़ रहा। आंकड़ों से साफ है कि निगम अपने कर्मचारियों को सिर्फ वेतन भी अपनी कमाई से देने की हालत में नहीं है। 31 मार्च 2019 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में निगम को रेवेन्यू सेक्शन से 5.5 करोड़ रुपये, बिल्डिंग से 1.46 करोड़ रुपये, हेल्थ एंड सैनिटेशन से 1.1 करोड़ रुपये, डेथ एंड बर्थ सर्टिफिकेट से 15 लाख रुपये, वेटनरी से 7 लाख रुपये, ट्रांसपोर्ट से 7 लाख रुपये और अन्य सेक्शन से 30 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। वहीं जम्मू नगर निगम के संचालन के लिए इस वित्तीय वर्ष में 124 करोड़ रुपये की ग्रांट सरकार से मिली थी।
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कर्मचारियों का खर्च भी नहीं उठा सकता निगम
निगम में करीब तीन हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। इनके वेतन पर ही मासिक दो करोड़ रुपये का खर्च आता है। जहां निगम की कमाई वार्षिक 8 करोड़ 65 लाख रुपये है, वहीं वेतन पर खर्च 12 करोड़ रुपये हैं। ऐसे में निगम अपनी कमाई से कर्मचारियों को वेतन देने की स्थिति में भी नहीं है। बता दें कि इससे पहले वित्तीय वर्ष में निगम ने 10.78 करोड़ रुपये की आय प्राप्त की थी।
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इन सेक्शन में होती है आय
बिल्डिंग सेक्शन, हेल्थ सेक्शन, डेथ एंड बर्थ सेक्शन, वेटनरी सेक्शन, ट्रांसपोर्ट सेक्शन, रेवेन्यू सेक्शन, जनरल एडमिनट्रेशन सेक्शन और अन्य सर्विस सेक्शन।
सभी घरों व अन्य निगम संपत्तियों से शुल्क पूरी तरह से एकत्र नहीं हो पा रहा है। व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास चल रहा है। आय बढ़ाने के लिए अन्य विकल्प के बारे में विचार करेंगे।
-चंद्र मोहन गुप्ता, मेयर, नगर निगम