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‘किताबें कुछ कहना चाहती हैं, तुम्हारे पास रहना चाहती हैं’
Updated Tue, 24 Apr 2018 01:16 AM IST
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कठुआ।
विश्व पुस्तक दिवस (23 अप्रैल) पर सफदर हाशमी की कविता बिल्कुल प्रासंगिक बैठती है। वे कहते हैं-किताबें कुछ कहना चाहती हैं, तुम्हारे पास रहना चाहती हैं। इस दिन पूरी दुनिया में पुस्तकें पढ़ने-पढ़ाने पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कठुआ जिला पुस्तकालय में भी
इस मौके पर एक पुस्तक प्रदर्शनी और वार्ता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उर्दू भाषा के लेक्चरर डॉ. करण सिंह मुख्य अतिथि थे। उन्होंने लोगों को जीवन में पुस्तकों की अहमियत बताते हुए कहा कि किताबें सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। इसलिए आजकल जब इंटरनेट ने दुनिया को छोटा कर दिया है, ऐसा लगता है जैसे इंटरनेट पर सारा ज्ञान उड़ेल दिया गया है, ऐसे में किताबों के संसार को अपने से दूर नहीं होने देना चाहिए, वरना आप अपना सबसे अच्छा साथी अपने से दूर कर देंगे।
उन्होंने प्रदर्शनी की शुरुआत करवाई और युवाओं को पुस्तकों के बारे में भी जानकारी दी। इस मौके पर चीफ लाइब्रेरियन सभ्यता रानी ने बताया कि युवा पीढ़ी के बीच पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को के दिशा निर्देशों के अनुसार 23 अप्रैल को पूरी दुनिया में विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है। उन्होंने युवाओं को किताबों को अपना दोस्त बनाना चाहिए और आज के इस प्रतिस्पर्धा के दौर में किताबों से प्राथमिक ज्ञान मिलता है। उन्होंने कहा कि युवा विभिन्न पुस्तकालयों में खुद को नामांकित करें और पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों और अन्य सूचनात्मक सामग्री के विशाल संग्रह से लाभ लें। इस मौके पर शोभारानी, सुनील शर्मा, रमन शर्मा, मुकेश सिंह, जगदेव आदि लोग उपस्थित रहे।
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विश्व पुस्तक दिवस (23 अप्रैल) पर सफदर हाशमी की कविता बिल्कुल प्रासंगिक बैठती है। वे कहते हैं-किताबें कुछ कहना चाहती हैं, तुम्हारे पास रहना चाहती हैं। इस दिन पूरी दुनिया में पुस्तकें पढ़ने-पढ़ाने पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कठुआ जिला पुस्तकालय में भी
इस मौके पर एक पुस्तक प्रदर्शनी और वार्ता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उर्दू भाषा के लेक्चरर डॉ. करण सिंह मुख्य अतिथि थे। उन्होंने लोगों को जीवन में पुस्तकों की अहमियत बताते हुए कहा कि किताबें सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। इसलिए आजकल जब इंटरनेट ने दुनिया को छोटा कर दिया है, ऐसा लगता है जैसे इंटरनेट पर सारा ज्ञान उड़ेल दिया गया है, ऐसे में किताबों के संसार को अपने से दूर नहीं होने देना चाहिए, वरना आप अपना सबसे अच्छा साथी अपने से दूर कर देंगे।
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उन्होंने प्रदर्शनी की शुरुआत करवाई और युवाओं को पुस्तकों के बारे में भी जानकारी दी। इस मौके पर चीफ लाइब्रेरियन सभ्यता रानी ने बताया कि युवा पीढ़ी के बीच पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को के दिशा निर्देशों के अनुसार 23 अप्रैल को पूरी दुनिया में विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है। उन्होंने युवाओं को किताबों को अपना दोस्त बनाना चाहिए और आज के इस प्रतिस्पर्धा के दौर में किताबों से प्राथमिक ज्ञान मिलता है। उन्होंने कहा कि युवा विभिन्न पुस्तकालयों में खुद को नामांकित करें और पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों और अन्य सूचनात्मक सामग्री के विशाल संग्रह से लाभ लें। इस मौके पर शोभारानी, सुनील शर्मा, रमन शर्मा, मुकेश सिंह, जगदेव आदि लोग उपस्थित रहे।
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