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सीमांत ग्रामीणों को बेहतर सुविधाओं पर मांगा जवाब
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जम्मू। सीमांत इलाकों के गोलाबारी से पीड़ित लोगों को दी जाने वाली सुविधाओं पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है। संबंधित विभाग को चार हफ्तों के भीतर इसकी पूरी जानकारी कोर्ट में देने के लिए कहा गया है। धरमिंदर पाल सिंह रैना ने कोर्ट में इस संबंध में जनहित याचिका दायर की थी।
याचिका में गोलाबारी से प्रभावित लोगों को बेहतर और विशेष ट्रीटमेंट देने की मांग की गई थी। मंगलवार को चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सिंधु शर्मा वाली खंडपीठ ने मामले से जुड़ी याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और चार हफ्तों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। अपीलकर्ता की तरफ से वकील ने कोर्ट में बताया कि जब गोलाबारी होती है तो लोग खाना और बिजली के लिए परेशान होते हैं। जब ये लोग राहत कैंपों में होते हैं तो भी ये परेशानी होती है। घायलों को एंबुलेंस तक समय पर नहीं मिलती। यह भी बताया गया कि पूर्व में सीमा पर गोलीबारी होने के बाद घायलों को तुरंत सुविधा नहीं मिलने पर हीरानगर और जम्मू मेडिकल कालेज में प्रदर्शन किया गया था। कई लोग सिर्फ बेहतर सुविधा नहीं मिलने की वजह से जान गवां देते हैं। न तो पहले एंबुलेंस मिलती है और न ही जीएमसी में बेहतर सुविधाएं मिलती हैं। यहां तक की 24 घंटे अस्पताल में रहने वाला कोई सीनियर डाक्टर उपलब्ध नहीं होता। याचिका में जानकारी दी गई है कि जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों के ग्रामीणों को पाकिस्तानी गोलाबारी की वजह से बड़ी परेशानी है, जिनको सुविधाएं नहीं मिलती। जेएनएफ
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याचिका में गोलाबारी से प्रभावित लोगों को बेहतर और विशेष ट्रीटमेंट देने की मांग की गई थी। मंगलवार को चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सिंधु शर्मा वाली खंडपीठ ने मामले से जुड़ी याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और चार हफ्तों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। अपीलकर्ता की तरफ से वकील ने कोर्ट में बताया कि जब गोलाबारी होती है तो लोग खाना और बिजली के लिए परेशान होते हैं। जब ये लोग राहत कैंपों में होते हैं तो भी ये परेशानी होती है। घायलों को एंबुलेंस तक समय पर नहीं मिलती। यह भी बताया गया कि पूर्व में सीमा पर गोलीबारी होने के बाद घायलों को तुरंत सुविधा नहीं मिलने पर हीरानगर और जम्मू मेडिकल कालेज में प्रदर्शन किया गया था। कई लोग सिर्फ बेहतर सुविधा नहीं मिलने की वजह से जान गवां देते हैं। न तो पहले एंबुलेंस मिलती है और न ही जीएमसी में बेहतर सुविधाएं मिलती हैं। यहां तक की 24 घंटे अस्पताल में रहने वाला कोई सीनियर डाक्टर उपलब्ध नहीं होता। याचिका में जानकारी दी गई है कि जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों के ग्रामीणों को पाकिस्तानी गोलाबारी की वजह से बड़ी परेशानी है, जिनको सुविधाएं नहीं मिलती। जेएनएफ
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