जम्मू कश्मीर को क्यों हुआ 16 हजार करोड़ का नुकसान?
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कश्मीर घाटी में पांच महीने की हिंसा के दौरान 16 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है क्योंकि इस दौरान सभी प्रकार की आर्थिक गतिविधियां ठप रहीं। जानी नुकसान के अलावा व्यापार, पर्यटन, परिवहन समेत करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ।
आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप रहने से जन जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ। जम्मू कश्मीर सरकार की इकोनामिक सर्वे 2016 रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।
विधानसभा में मंगलवार को वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू और विधान परिषद में वित्त राज्य मंत्री अजय नंदा ने यह रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार कश्मीर में आठ जुलाई से 30 नवंबर 2016 तक रही अशांति में 16 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
कश्मीर में हिंसा से प्रभावित हुई आर्थिक गतिविधियां
रिपोर्ट के अनुसार कश्मीर घाटी के सभी दस जिलों में पिछले साल रही पांच महीने अशांति के दौरान हड़ताल, बंद, पत्थरबाजी, कर्फ्यू, पाबंदियों की वजह से आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह से प्रभावित रही। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ा।
कैंसर, हार्ट संबंधित बीमारियों और जिन्हें डायलेसिस आदि की जरूरत थी उन्हें काफी दिक्कत हुई। प्राथमिक उपचार समय पर न मिलने की वजह से भी कई लोगों की जान चली गई। सुरक्षा संबंधी खर्च भी बढ़ गया। मैक्रो इकोनामिक कास्ट और जीडीपी ग्रोथ, एफडीआई और आयात निर्यात पर भी विपरीत असर रहा।
4 महीने तक नहीं आया कोई पर्यटक
2015-16 में रियासत में 6,23,932 पर्यटक आए थे। इनमें 2,20,490 श्री अमरनाथ यात्री थे। अप्रैल से सात जुलाई 2016 तक रियासत में पर्यटन सीजन रहा। इसके बाद के चार महीनों में कश्मीर घाटी में कोई पर्यटक नहीं पहुंचा।
पर्यटक न पहुंचने की वजह से व्यापार को जिसमें होटल, रेस्टोरेंट, हाउस बोट, हैंडीक्राफ्ट, पौनीवालों, शिकारवालों को भारी नुकसान हुआ। राजस्व को भी नुकसान पहुंचा। 2016-17 में 751.97 लाख की वसूली हुई जबकि 2015-16 में यह 936.89 लाख रुपये थी।