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जम्मू-कश्मीर: परिसीमन मामले चौधरी लाल सिंह बोले, तत्काल जम्मू संभाग में बढ़े छह विधानसभा सीटें
Thu, 06 Jun 2019 08:56 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jun 2019 08:56 PM IST
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जम्मू-कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन मामले में सियासत ने जोर पकड़ लिया है। वीरवार को डोगरा स्वाभिमान संगठन के चेयरमैन चौधरी लाल सिंह ने जम्मू और लद्दाख संभाग के साथ पिछले छह दशक से हो रहे भेदभाव को दूर करने के लिए विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन करवाने के बाद ही राज्य में विधानसभा चुनाव करवाने की मांग की है।
लाल सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा परिसीमन के मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाना सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि डोगरा स्वाभिमान संगठन पहले से ही विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन की मांग को अपने 25 सूत्रीय कार्यक्रम में अहम स्थान दे चुका है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से अपील की कि यह सही समय है कि जम्मू व लद्दाख संभाग के साथ न्याय करने के साथ-साथ ही मीरपुर, पुंछ, मुज्जफराबाद से विभाजन के समय अपना घर छोड़ जम्मू में बसे रिफ्यूजियों को भी सियासी प्रतिनिधित्व दिया जाए।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला की बदनियत की वजह से मीरपुर, पुंछ, मुज्जफराबाद के रिफ्यूजियों को इंसाफ नहीं मिला। अब्दुल्ला ने सांप्रदायिक आधार पर केवल मेंढर में एक सीट बढ़ाई, लेकिन जम्मू संभाग को सियासी ताकत न मिले, इसके लिए छह सीटें बढ़ाने को नजरअंदाज कर दिया।
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लाल सिंह ने कहा कि मेंढर की तर्ज पर जम्मू संभाग में विधानसभा क्षेत्रों की छह सीटें और बढ़ाई जाएं। उन्होंने कहा कि कश्मीर संभाग से विस्थापित होकर जम्मू में बसे हुए कश्मीरी पंडितों के लिए भी दो सीटें और जम्मू संभाग में जोड़ी जानी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने जम्मू संभाग के लिए अलग पब्लिक सर्विस कमीशन और एसएसआरबी की मांग भी की। कहा कि विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन का जम्मू व लद्दाख संभाग को काफी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि जम्मू संभाग को अलग राज्य का दर्जा देने व लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग का भी वह समर्थन करते हैं।
चौधरी लाल सिंह ने कहा कि लोकसभा चुनाव में डोगरा स्वाभिमान संगठन को सफलता नहीं मिली, लेकिन संगठन अपने एजेंडे पर कायम हैं और डोगरों के हित में कार्य करता रहेगा। रसाना केस पर फैसला भी जल्द आने के आसार हैं। इसी केस को लेकर संगठन तैयार हुआ। उन्होंने कहा हालांकि अब भी संगठन मामले की सीबीआई जांच की मांग करता है। इस अवसर पर पूर्व विधायक कांता अंडोत्रा, संगठन के महासचिव डा. हरि दत्त शिशु, उपाध्यक्ष के डी सिंह, कुलजीत जंवाल, डा. कमल सैनी, भूपेंद्र सिंह, नरेंद्र भाऊ, प्रो. एच आर शर्मा आदि भी मौजूद रहे।
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लाल सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा परिसीमन के मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाना सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि डोगरा स्वाभिमान संगठन पहले से ही विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन की मांग को अपने 25 सूत्रीय कार्यक्रम में अहम स्थान दे चुका है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से अपील की कि यह सही समय है कि जम्मू व लद्दाख संभाग के साथ न्याय करने के साथ-साथ ही मीरपुर, पुंछ, मुज्जफराबाद से विभाजन के समय अपना घर छोड़ जम्मू में बसे रिफ्यूजियों को भी सियासी प्रतिनिधित्व दिया जाए।
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उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला की बदनियत की वजह से मीरपुर, पुंछ, मुज्जफराबाद के रिफ्यूजियों को इंसाफ नहीं मिला। अब्दुल्ला ने सांप्रदायिक आधार पर केवल मेंढर में एक सीट बढ़ाई, लेकिन जम्मू संभाग को सियासी ताकत न मिले, इसके लिए छह सीटें बढ़ाने को नजरअंदाज कर दिया।
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लाल सिंह ने कहा कि मेंढर की तर्ज पर जम्मू संभाग में विधानसभा क्षेत्रों की छह सीटें और बढ़ाई जाएं। उन्होंने कहा कि कश्मीर संभाग से विस्थापित होकर जम्मू में बसे हुए कश्मीरी पंडितों के लिए भी दो सीटें और जम्मू संभाग में जोड़ी जानी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने जम्मू संभाग के लिए अलग पब्लिक सर्विस कमीशन और एसएसआरबी की मांग भी की। कहा कि विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन का जम्मू व लद्दाख संभाग को काफी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि जम्मू संभाग को अलग राज्य का दर्जा देने व लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग का भी वह समर्थन करते हैं।
चौधरी लाल सिंह ने कहा कि लोकसभा चुनाव में डोगरा स्वाभिमान संगठन को सफलता नहीं मिली, लेकिन संगठन अपने एजेंडे पर कायम हैं और डोगरों के हित में कार्य करता रहेगा। रसाना केस पर फैसला भी जल्द आने के आसार हैं। इसी केस को लेकर संगठन तैयार हुआ। उन्होंने कहा हालांकि अब भी संगठन मामले की सीबीआई जांच की मांग करता है। इस अवसर पर पूर्व विधायक कांता अंडोत्रा, संगठन के महासचिव डा. हरि दत्त शिशु, उपाध्यक्ष के डी सिंह, कुलजीत जंवाल, डा. कमल सैनी, भूपेंद्र सिंह, नरेंद्र भाऊ, प्रो. एच आर शर्मा आदि भी मौजूद रहे।