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चार वर्ष बाद भी झूले पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा न बनाए जाने से हर दिन जान हथेली पर रख कर गांव से बाहर आवाजाही करने को मजबूर हैं ग

Mon, 10 Dec 2018 01:15 AM IST
Updated Mon, 10 Dec 2018 01:15 AM IST
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चार वर्ष बाद भी झूले पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा न बनाए जाने से हर दिन जान हथेली पर रख कर गांव से बाहर आवाजाही करने को मजबूर हैं ग
पुंछ। जिले की मंडी तहसील के मोहल्ला मलिकां गांव में 100 से ज्यादा दिव्यांग रहते हैं। इस गांव के लोगों को पेंशन लेने, अस्पताल जाने के लिए गांव में बहने वाले नाले पर बने झूला पुल को पार करना पड़ता है। यह झूला पुल 2014 की बाढ़ में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, ऐसे में चार साल से आम लोगों के साथ दिव्यांगों को भी जान हथेली पर रख कर इस पुल से आवाजाही करनी पड़ती है। गांव के बाहर पड़ने वाले स्कूलों में पढ़ने के लिए जाने वाले बच्चों को उनके परिजन कंधों पर उठा कर इस झूला पुल को पार करवाते हैं। यहां रहने वाले दिव्यांगों में सरकार के प्रति खासा रोष है। उनका कहना है कि पहले उनको विकलांग कहा जाता था, लेकिन मोदी सरकार ने इस शब्द की जगह दिव्यांग शुरू करवा दिया यह अच्छी बात है, पर महज शब्द बदल देने से जमीनी हालात तो नहीं बदल जाती। उनका कहना था कि नया शब्द देने से बेहतर होता, प्रधानमंत्री उनके गांव का यह पुल बनवा देते।
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मौलवी मोहम्मद रफीद, मसूद अहमद, मोहम्मद वजीर मलिक आदि ने बताया कि पहाड़ पर स्थित मोहल्ला मल्लिकां गांव के बीच अढ़ाई नाला बहता है। कई बरस पहले इस नाने पर झूला पुल का निर्माण करवाया गया था। साल 2014 में इस नाले में भयंकर बाढ़ आई, जिसमें यह क्षतिग्रस्त हो गया था। ऐसे में पुल के साथ बनाए गए बांध से होकर लोग लोग पुल पर चढ़ते हैं। इस बांध की दीवार का एक फुट हिस्सा छोड़ बाकी बाढ़ में बह गया। इसे भी आज तक दोबारा नहीं बनाया गया है।
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उन्होंने बताया कि उनके गांव में 100 से ज्यादा दिव्यांग रहते हैं, जिनको पेंशन लेने या बीमार होने पर अस्पताल जाने के लिए इसी जर्जर पुल से गुजरना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने कई बार पुल की मरम्मत के लिए तहसील प्रशासन, ग्रामीण विकास विभाग और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कुछ नहीं किया गया। लोग चाहते हैं कि पुल पर चढ़ने का रास्ता पक्का किया जाए, बांध की दीवार की मरम्मत की जाए और पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा ठीक किया जाए, लेकिन कुछ नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना था राज्यपाल शासन से पहले राज्य में भाजपा-पीडीपी की सरकार थी, इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांगों के लिए दिव्यांग शब्द प्रचलित कर दिया, लेकिन राज्य में उनकी सरकार एक झूला पुल की मरम्मत नहीं करवा सकी। यह हाल इनसे पहले वाली सरकार का भी रहा। झूला पुल नदी से करीब पचास मीटर की ऊंचाई पर बना है। यदि उस पर चढ़ते हुए कोई फिसल जाता है अथवा पुल का जो एक डेढ़ फुट का भाग बचा है, जिसे गांव वाले रास्ते के तौर पर प्रयोग करते हैं उसके पत्थर गिरने लगते हैं, तो पुल पर आवाजाही करने वालों की नाले में गिर कर मौत हो सकती है।
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