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शिया समुदाय ने सुरनकोट में मोहरम का मातमी जूलूस निकाला, करबाला के शहीदों को किया याद
Updated Fri, 21 Sep 2018 01:28 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पुंछ। वीरवार की दोपहर 9वें मोहर्रम के अवसर पर पुंछ जिले के सूरनकोट तहसील मुख्यालय में शिया समुदाय की तरफ से करबला के शहीदों की याद में मातमी जुलूस निकाला गया। इस दौरान इमाम हुसैन और उनके साथ करबला के मैदान में शहीद होने वालों को याद करते हुए उनका मातम मनाया। मातमी जलूस में क्षेत्र के शिया समुदाय के सैकड़ों लोग शामिल हुए।
शिया समुदाय के उलेमाआें ने इमाम हुसैन द्वारा करबला के मैदान में मानवता और न्याय के खिलाफ लड़े गए युद्ध का विवरण पेश करते हुए उनके बलिदान को दुनियां का सबसे श्रेष्ठ बलिदान बताते हुए कहा कि करबला में इमाम हुसैन अपने पूरे कुंबे छोटे छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ कुरबान हो गए, लेकिन जजीद के आगे हार नहीं मानी। इसीलिए भी पूरी दुनियां हुसैन को सजदा करती है। उनका मातम मनाती है।
वीरवार की दोपहर को करीब 2 बजे सूरनकोट कस्बे में स्थित इमाम बारगाह से शिया समुदाय की तरफ से 9वें मोहर्रम के उपल्क्ष्य पर मातमी जुलूस निकाला गया। यह जुलूस करबला के शहीदों की याद में अंजुमन ए जाफरिया सूरनकोट के बैनर तले निकाला गया। इसमें शामिल लोग तेरा मातम सदा हम करेंगे हुसैन, या हुसैन या हुसैन बोलते हुए अपनी छातियां पीटते हुए मातम मनाते चल रहे थे। इमाम बारगाह से शुरू हुआ यह जुलूस कस्बे के विभिन्न बाजारों से होता हुआ बस अड्डे तक गया। यहां से दोबारा इमाम बारगाह में पहुंच कर संपन्न हुआ। इस अवसर पर अंजुमन ए जाफरिया सूनकरोट के प्रधान इमरान हुसैन ने बताया कि कसबे में सदियों से 9वें मोहर्रम पर मातमी जुलूस निकाला जाता है। उसी परंपरा को कायम रखते हुए वीरवार को भी जुलूस निकाला गया है।
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शिया समुदाय के उलेमाआें ने इमाम हुसैन द्वारा करबला के मैदान में मानवता और न्याय के खिलाफ लड़े गए युद्ध का विवरण पेश करते हुए उनके बलिदान को दुनियां का सबसे श्रेष्ठ बलिदान बताते हुए कहा कि करबला में इमाम हुसैन अपने पूरे कुंबे छोटे छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ कुरबान हो गए, लेकिन जजीद के आगे हार नहीं मानी। इसीलिए भी पूरी दुनियां हुसैन को सजदा करती है। उनका मातम मनाती है।
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वीरवार की दोपहर को करीब 2 बजे सूरनकोट कस्बे में स्थित इमाम बारगाह से शिया समुदाय की तरफ से 9वें मोहर्रम के उपल्क्ष्य पर मातमी जुलूस निकाला गया। यह जुलूस करबला के शहीदों की याद में अंजुमन ए जाफरिया सूरनकोट के बैनर तले निकाला गया। इसमें शामिल लोग तेरा मातम सदा हम करेंगे हुसैन, या हुसैन या हुसैन बोलते हुए अपनी छातियां पीटते हुए मातम मनाते चल रहे थे। इमाम बारगाह से शुरू हुआ यह जुलूस कस्बे के विभिन्न बाजारों से होता हुआ बस अड्डे तक गया। यहां से दोबारा इमाम बारगाह में पहुंच कर संपन्न हुआ। इस अवसर पर अंजुमन ए जाफरिया सूनकरोट के प्रधान इमरान हुसैन ने बताया कि कसबे में सदियों से 9वें मोहर्रम पर मातमी जुलूस निकाला जाता है। उसी परंपरा को कायम रखते हुए वीरवार को भी जुलूस निकाला गया है।
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