{"_id":"5b996a9e867a557ff9674090","slug":"15367809424-poonch-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्रॉस एलओसी ट्रेडर्स ने किसी तीसरे देश में बैठक को चेताया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्रॉस एलओसी ट्रेडर्स ने किसी तीसरे देश में बैठक को चेताया
Updated Thu, 13 Sep 2018 01:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुंछ। क्रास एलओसी ट्रेडर्स एसोसिएशन ने कहा है कि यदि सरकार नियंत्रण रेखा पर भारत और पीओके के क्रास एलओसी ट्रेडर्स के बीच बैठक कराने में अब भी नाकाम रहती है तो वह किसी तीसरे देश में आपस में बैठक कर अपने लेन-देन का निपटारा करेंगे। एसोसिएशन के मुताबिक पिछले दो साल से जीरो लाइन पर दोनों तरफ के व्यापारियों के बीच बैठक नहीं होने से उनके बीच करोड़ों रुपये के लेन-देन का हिसाब नहीं हो पाया है। क्रास एलओसी ट्रेडर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों प्रधान पवन आनंद, महासचिव राजीव टंडन, मोहम्मद आसिम, इम्तियाज सलारिया, निशू गुप्ता व अन्य पदाधिकारियों ने बुधवार को इस मसले पर नगर में आयोजित पत्रकारवार्ता में ये बातें कहीं।
एसोसिएशन के प्रधान पवन आनंद ने केंद्र व राज्य सरकार पर क्रास एलओसी ट्रेड और ट्रेडर्स की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी रुख की वजह से पिछले दो साल से चक्कां दा बाग की राह-ए-मिलन पर जीरो लाइन पर दोनों तरफ के व्यापारियों के बीच बैठक नहीं करवाई गई है। उन्होंने कहा कि बार-बार जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार से मांग करने पर एक ही बात कही जाती है कि नियंत्रण रेखा पर हालात सही नहीं हैं। आनंद ने कहा कि यदि नियंत्रण रेखा पर हालात सही नहीं हैं, तो हर दिन दोनों तरफ से 35-35 ट्रक कैसे आर-पार होते हैं। हर रोज चालक एक-दूसरे की तरफ जाते हैं और सामान उतारने के बाद अपने-अपने वतन लौट जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह सब हो रहा है तो आखिर क्रास एलओसी ट्रेडर्स की बैठक आयोजित करने में सरकार को क्या परेशानी है।
उन्होंने कहा कि वे केंद्र सरकार और राज्यपाल से आग्रह करते हैं कि जीरो लाइन पर जल्द दोनों तरफ के ट्रेडर्स के बीच बैठक आयोजित कराई जाए। यदि अब भी यह बैठक नहीं होती है तो वे अपने काउंटरपार्ट यानी उस पार के ट्रेडर्स के साथ मिल कर भारत-पाकिस्तान के अलावा किसी तीसरे देश में बैठक करेंगे, जहां हम आपसी लेन-देन के मामलों का निपटारा कर सकें।
विज्ञापन
क्रास एलओसी ट्रेड में हवाला कारोबार के आरोप को बताया बेबुनियाद
क्रास एलओसी ट्रेडर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कुछ लोगों पर क्रास एलओसी ट्रेड को बदनाम करने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यहां जो क्रास एलओसी ट्रेड में हवाला कारोबार के आरोप लगाए जाते हैं, वे सब बेबुनियाद हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि आज तक ऐसा कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ है। अगर हवाला कारोबार जैसा कुछ होता तो जो 376 भारतीय व्यापारी यहां ट्रेड कर रहे हैं, वे यहां न होते बल्कि कहीं और होते। उन्होंने कहा कि जहां तक एनआईए की छापेमारी की बात है तो एनआईए को क्रास एलओसी ट्रेड सेंटर में अपना स्थायी कार्यालय खोलना चाहिए, ताकि जो लोग इस ट्रेड का बदनाम करने का प्रयास करते हैं, उनका पर्दाफाश हो सके।
21 वस्तुओं में से जिनका ट्रेड नहीं हो रहा उनकी जगह नए को शामिल करना जरूरी
एसोसिएशन के प्रधान पवन आनंद ने कहा कि क्रास एलओसी ट्रेड निधारित स्टैंडर्ड आपरेटिव सिस्टम (एसओपी) के तहत चल रहा है। उसके नियमों से बाहर यहां कुछ भी नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस ट्रेड के कारण भारत-पाक अपने रिश्ते बेहतर करने की दिशा में आगे बढ़े। ऐसे में इसके प्रति सरकारी उदासीनता सही नहीं है। आनंद ने कहा कि इतना ही नहीं, वे कई साल से ट्रेड में शामिल वस्तुओं की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कुछ नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि होना यह चाहिए कि ट्रेड में जिन 21 वस्तुओं को शामिल किया गया है, उसमें से जिन वस्तुओं पर कारोबार नहीं हुआ है, उन्हें सूची से बाहर कर उनके स्थान पर नई वस्तुओं को शामिल किया जाए। इससे ट्रेड में वृद्धि होगी, पर न जाने क्यों सरकार इस दिशा में नहीं सोच रही है।
क्रास एलओसी ट्रेड कस्टोडियन और डीसी उठा सकते हैं कदम
आनंद ने कहा कि एसओपी में क्रास एलओसी ट्रेड कस्टोडियन और जिला विकास आयुक्त को यह अधिकार दिया गया है कि वे दोनों तरफ के व्यापारियों से बात कर सूची में शामिल जिन वस्तुओं का व्यापार नहीं हो रहा है, उन्हें हटा कर वे नई वस्तुओं को सूची में शामिल करें। लेकिन पिछले आठ साल में किसी भी अधिकारी ने अपने इस अधिकार का प्रयोग तक नहीं किया है। इसी प्रकार अगर नए ट्रेडर्स को भी शामिल किया जाए तो हमें कोई एतराज नहीं है, लेकिन उसके लिए कुछ नियम बनाए जाएं। यह निर्धारित किया जाए कि ट्रेड में कितने का लेन-देन होगा, क्योंकि यह बाटर सिस्टम ट्रेड है। बाटर किस आधार पर क्लीयर होगा, इसे निश्चित किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
एसोसिएशन के प्रधान पवन आनंद ने केंद्र व राज्य सरकार पर क्रास एलओसी ट्रेड और ट्रेडर्स की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी रुख की वजह से पिछले दो साल से चक्कां दा बाग की राह-ए-मिलन पर जीरो लाइन पर दोनों तरफ के व्यापारियों के बीच बैठक नहीं करवाई गई है। उन्होंने कहा कि बार-बार जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार से मांग करने पर एक ही बात कही जाती है कि नियंत्रण रेखा पर हालात सही नहीं हैं। आनंद ने कहा कि यदि नियंत्रण रेखा पर हालात सही नहीं हैं, तो हर दिन दोनों तरफ से 35-35 ट्रक कैसे आर-पार होते हैं। हर रोज चालक एक-दूसरे की तरफ जाते हैं और सामान उतारने के बाद अपने-अपने वतन लौट जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह सब हो रहा है तो आखिर क्रास एलओसी ट्रेडर्स की बैठक आयोजित करने में सरकार को क्या परेशानी है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि वे केंद्र सरकार और राज्यपाल से आग्रह करते हैं कि जीरो लाइन पर जल्द दोनों तरफ के ट्रेडर्स के बीच बैठक आयोजित कराई जाए। यदि अब भी यह बैठक नहीं होती है तो वे अपने काउंटरपार्ट यानी उस पार के ट्रेडर्स के साथ मिल कर भारत-पाकिस्तान के अलावा किसी तीसरे देश में बैठक करेंगे, जहां हम आपसी लेन-देन के मामलों का निपटारा कर सकें।
विज्ञापन
क्रास एलओसी ट्रेड में हवाला कारोबार के आरोप को बताया बेबुनियाद
क्रास एलओसी ट्रेडर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कुछ लोगों पर क्रास एलओसी ट्रेड को बदनाम करने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यहां जो क्रास एलओसी ट्रेड में हवाला कारोबार के आरोप लगाए जाते हैं, वे सब बेबुनियाद हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि आज तक ऐसा कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ है। अगर हवाला कारोबार जैसा कुछ होता तो जो 376 भारतीय व्यापारी यहां ट्रेड कर रहे हैं, वे यहां न होते बल्कि कहीं और होते। उन्होंने कहा कि जहां तक एनआईए की छापेमारी की बात है तो एनआईए को क्रास एलओसी ट्रेड सेंटर में अपना स्थायी कार्यालय खोलना चाहिए, ताकि जो लोग इस ट्रेड का बदनाम करने का प्रयास करते हैं, उनका पर्दाफाश हो सके।
21 वस्तुओं में से जिनका ट्रेड नहीं हो रहा उनकी जगह नए को शामिल करना जरूरी
एसोसिएशन के प्रधान पवन आनंद ने कहा कि क्रास एलओसी ट्रेड निधारित स्टैंडर्ड आपरेटिव सिस्टम (एसओपी) के तहत चल रहा है। उसके नियमों से बाहर यहां कुछ भी नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस ट्रेड के कारण भारत-पाक अपने रिश्ते बेहतर करने की दिशा में आगे बढ़े। ऐसे में इसके प्रति सरकारी उदासीनता सही नहीं है। आनंद ने कहा कि इतना ही नहीं, वे कई साल से ट्रेड में शामिल वस्तुओं की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कुछ नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि होना यह चाहिए कि ट्रेड में जिन 21 वस्तुओं को शामिल किया गया है, उसमें से जिन वस्तुओं पर कारोबार नहीं हुआ है, उन्हें सूची से बाहर कर उनके स्थान पर नई वस्तुओं को शामिल किया जाए। इससे ट्रेड में वृद्धि होगी, पर न जाने क्यों सरकार इस दिशा में नहीं सोच रही है।
क्रास एलओसी ट्रेड कस्टोडियन और डीसी उठा सकते हैं कदम
आनंद ने कहा कि एसओपी में क्रास एलओसी ट्रेड कस्टोडियन और जिला विकास आयुक्त को यह अधिकार दिया गया है कि वे दोनों तरफ के व्यापारियों से बात कर सूची में शामिल जिन वस्तुओं का व्यापार नहीं हो रहा है, उन्हें हटा कर वे नई वस्तुओं को सूची में शामिल करें। लेकिन पिछले आठ साल में किसी भी अधिकारी ने अपने इस अधिकार का प्रयोग तक नहीं किया है। इसी प्रकार अगर नए ट्रेडर्स को भी शामिल किया जाए तो हमें कोई एतराज नहीं है, लेकिन उसके लिए कुछ नियम बनाए जाएं। यह निर्धारित किया जाए कि ट्रेड में कितने का लेन-देन होगा, क्योंकि यह बाटर सिस्टम ट्रेड है। बाटर किस आधार पर क्लीयर होगा, इसे निश्चित किया जाना चाहिए।