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पुलिस की पाठशाला

Fri, 17 Aug 2018 01:56 AM IST
Updated Fri, 17 Aug 2018 01:56 AM IST
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पुलिस की पाठशाला
जम्मू। पुलिस की छवि कैसी होनी चाहिए? यह आप लोग तय करें। समाज में जिस तरह की अपराध बढ़ता है। पुलिस को उसी के हिसाब से अपनी भूमिका बदलनी पड़ती है। यह लोगों के हाथ में है। वह कानून की कदर करें, अपराध और नशाखोरी से दूर रहें। तो पुलिस नरम रहेगी। यदि कोई कानून तोड़ेगा या फिर कोई अपराध करेगा, तो पुलिस को सख्त रुख अपनाना होगा। पुलिस के लोग भी आप लोगों में से ही निकले हैं। इसलिए पुलिस से डरें नहीं, पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए है।
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अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से बड़ी ब्राह्मणा के बस्सी कलां स्थित ह्यूमिनटी पब्लिक स्कूल में आयोजित पुलिस की पाठशाला में पहुंचे जम्मू संभाग के स्पेशल आपरेशन ग्रुप के इंचार्ज एसपी विनय शर्मा बच्चों से रूबरू हुए। उन्होंने बच्चों से कहा कि पुलिस से डरे नहीं। पुलिस लोगों के लिए है। उनकी सुरक्षा के लिए है। वह लोग भी आम जनता की तरह है। फर्क सिर्फ इतना है कि उन पर कानून को बनाए रखने की जिम्मेदारी है। इस मौके पर स्कूल के डायरेक्टर गौरव चाढ़क और वाइस प्रिंसिपल अंकु चाढ़क भी मौजूद रहीं।
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यह हमारी 70 साल की विफलता
विनय शर्मा ने कहा कि देश आजाद होने के 70 साल बाद भी यदि लोग पुलिस से डरते हैं, तो यह हमारी विफलता है। शायद हम ऐसा नहीं बन पाए, जैसा लोग चाहते हैं। पुलिस को समाज के हिसाब से चलना पड़ता है। यहां अपराध, आतंकवाद, नशाखोरी और किसी अन्य तरह का अपराध बढ़ता है तो उस पर अंकुश लगाना हमारी प्राथमिकता बन जाती है। हम सिर्फ कानून का पालन करते हैं। इसलिए हमसे डरें नहीं।
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चुलबुल पांडे चाहिए या अमित कुमार
गंगाजल मूवी में अजय देवगन ने बहुत ही शांत स्वभाव, ईमानदार और नियम में रहकर ड्यूटी देने वाले एक आईपीएस अफसर का किरदार निभाया। वहीं दबंग मूवी में सलमान खान ने चुलबुल पांडे का किरदार निभाया। चुलबुल पांडे एक ऐसा अफसर, जो थोड़ा क्रप्ट भी है, कानून तोड़कर भी काम करता है, लेकिन उसका किरदार फेमस है। आपको तय करना है कि आपको चुलबुल पांडे चाहिए या अमित कुमार। पुलिस की छवि लोगों के हाथ में है।


एसपी से बच्चों ने पूछे सवाल
विद्यार्थी: लापता होने पर 24 घंटे तक एफआईआर क्यों नहीं लगती?
एसपी: लापता होने के 95 फीसदी मामलों में देखा गया है कि लापता होने वाला 24 घंटे के भीतर अपने घर वापस आ जाता है। हमारी कोशिश रहती है कि परिवार को 24 घंटे तक समय दिया जाए। ताकि वो अपने रिश्तेदारों से पता कर सकें। इसके बावजूद जब पता न चले तो हम एफआईआर लगाकर तलाश कर देते हैं।
विद्यार्थी: कोई क्राइम हो तो कहां जाएं?
एसपी: यह निर्भर करता है कि किस तरह का क्राइम हो रहा है। निश्चित तौर पर क्राइम है तो पुलिस के पास ही जाना है। यदि किसी महिला को तंग किया जाता है, तो उसके लिए महिला थाना है। अलग अलग विंग है। नेचर आफ क्राइम के तहत अलग अलग विंग है।
विद्यार्थी: सेना और पुलिस में क्या अंतर है।
एसपी: सेना देश के बाहर बैठे दुश्मनों से लड़ती है और पुलिस देश के भीतर बैठे दुश्मनों से। यह दुश्मन अपराध है, आतंकवाद है, नशाखोरी है। पुलिस बहुत काम करती है, लेकिन दिखता नहीं है।
विद्यार्थी: ड्रग्स बहुत फैलता जा रहा है, क्या कार्रवाई कर रहे हैं?
एसपी: अभी कुछ दिन पहले ही 250 करोड़ की हेरोइन पकड़ी है। पिछले तीन साल में 140 किलो हेरोइन जिसकी कीमत 600 करोड़ के करीब है। वो पुलिस ने पकड़ी है। हम ड्रग्स पर कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं। रियासत के युवाओं को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। इस पर पूरी तरह से अंकुश लगाएंगे।

विद्यार्थी: सांप्रदायिक तनाव हो, तो क्या करेंगे?
एसपी: हम उस इलाके के दोनों समुदाय पर नजर रखते हैं। देखते हैं कि कौन लोग माहौल खराब करते हैं। ऐसे लोगों पर कार्रवाई करते हैं। समुदाय के लोगों से बात करते हैं। पुलिस का कोई धर्म नहीं होता। पुलिस के लिए उसका धर्म सिर्फ उसकी ड्यूटी है। जिसमें भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं।
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