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नाबालिग को इंसाफ दिलाने के लिए सड़कों पर उतरे
Updated Sun, 04 Feb 2018 01:24 AM IST
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जम्मू। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक संगठनों ने प्रेस क्लब के सामने कठुआ जिले की आठ वर्षीय नाबालिग के बलात्कार और हत्या के खिलाफ विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार की ओर से असफल जांच और बलात्कार मामले में राजनीतिक दबाव की निंदा की है।
सोशल मूवमेंट आफ इंडिया के अशोक कुमार बेसोत्रा ने कहा कि बलात्कार एक विशेष समुदाय नहीं, बल्कि रियासत और देश के पूरे समाज के लिए कलंक है। भारत में वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया की कमी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बलात्कार के मामले में डीएनए जांच सबसे प्रामाणिक तरीका है। लेकिन दुर्भाग्य से भारत में किए जाने वाले फैसले ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को अपनाते नहीं हैं। इसलिए सभी को आगे आना चाहिए ताकि नाबालिग को न्याय मिल सके।
सक्षम समाज संकल्प की ओर से रुचिका ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नाबालिग एक तय समुदाय की लड़की नहीं थी, वह रियासत की बेटी थी। पुलिस ने इस मामले में एक पंद्रह वर्षीय किशोर को हिरासत में लिया है, जो पुलिस की जांच पर भयावह प्रश्न उठाता है। अगर एक आठ वर्षीय नाबालिग के साथ नाबालिग लड़का सात दिनों तक छेड़छाड़ की घटना को अंजाम देता है, तो स्वाभाविक तौर पर वह अकेला नहीं होगा। यदि वह अकेला नहीं था तब मामले में और दोषी लोग हैं। उन्हें सजा दिलाना पुलिस की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मामले को तोड़मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। राज्य सरकार को चाहिए कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जल्द करा आरोपी लोगों को सजा दिलाया जाए। प्रदर्शनकारियों में सोशल मूवमेंट इंडिया, सक्षम समाज संकल्प, अंबेडकर युवा संगठन, भीम आइडियोलाजी ग्रुप, जन जाग्रति मंच और जय भीम ग्रुप के लोग शामिल हुए।
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सोशल मूवमेंट आफ इंडिया के अशोक कुमार बेसोत्रा ने कहा कि बलात्कार एक विशेष समुदाय नहीं, बल्कि रियासत और देश के पूरे समाज के लिए कलंक है। भारत में वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया की कमी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बलात्कार के मामले में डीएनए जांच सबसे प्रामाणिक तरीका है। लेकिन दुर्भाग्य से भारत में किए जाने वाले फैसले ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को अपनाते नहीं हैं। इसलिए सभी को आगे आना चाहिए ताकि नाबालिग को न्याय मिल सके।
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सक्षम समाज संकल्प की ओर से रुचिका ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नाबालिग एक तय समुदाय की लड़की नहीं थी, वह रियासत की बेटी थी। पुलिस ने इस मामले में एक पंद्रह वर्षीय किशोर को हिरासत में लिया है, जो पुलिस की जांच पर भयावह प्रश्न उठाता है। अगर एक आठ वर्षीय नाबालिग के साथ नाबालिग लड़का सात दिनों तक छेड़छाड़ की घटना को अंजाम देता है, तो स्वाभाविक तौर पर वह अकेला नहीं होगा। यदि वह अकेला नहीं था तब मामले में और दोषी लोग हैं। उन्हें सजा दिलाना पुलिस की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मामले को तोड़मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। राज्य सरकार को चाहिए कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जल्द करा आरोपी लोगों को सजा दिलाया जाए। प्रदर्शनकारियों में सोशल मूवमेंट इंडिया, सक्षम समाज संकल्प, अंबेडकर युवा संगठन, भीम आइडियोलाजी ग्रुप, जन जाग्रति मंच और जय भीम ग्रुप के लोग शामिल हुए।
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