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हर महीने चलने लायक सड़क खुद बनाते हैं ग्रामीण
Updated Wed, 24 Oct 2018 12:10 AM IST
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उधमपुर। बरमीन के ग्रामीण सरकारी राशन की सप्लाई के लिए हर महीने जीरो मोड़ से धारनु तक सड़क की मरम्मत खुद करने को मजबूर हैं। सड़क इतनी ज्यादा बदहाल है कि इस पर वाहनों का चलना संभव नहीं होता है। सड़क की मरम्मत करने के बाद सरकारी राशन लेकर आए वाहन को डिपो तक पहुंचाया जाता है।
ग्रामीण इलाकों में सड़कों के जाल बिछाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। वहीं हकीकत यह है कि सड़कों पर तारकोल नजर नहीं आता। इसका उदाहरण बरमीन इलाके की सड़क है। सड़क की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि इस पर वाहन चलना संभव नहीं। हर महीने जब सरकारी राशन की सप्लाई पहुंचती है तो राशन लाने वाले वाहन को डिपो तक पहुंचाने के लिए ग्रामीण पहले सड़क की खुद मरम्मत करते हैं। इसके बाद सरकारी राशन की सप्लाई मिलती है।
रमेश चंद रवि शर्मा, सुनील व अन्य कई ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क पर करीब दस पंचायतों के ग्रामीण निर्भर हैं। इसका निर्माण कार्य 2011 में पीएमजीएसवाई के तहत किया गया था। सड़क बनाने के बाद इस पर न तो तारकोल डाला गया और न ही सात वर्ष में किसी ने इसकी सुध ली है। ग्रामीण स्वयं ही मरम्मत कर गुजारा कर रहे हैं। इसकी हालत सुधारने की मांग को कई बार जिला प्रशासन व पीएमजीएसवाई के अधिकारियों के सामने रखा है, लेकिन आज तक मरम्मत करना तो दूर कोई इसकी हालत को देखने के लिए भी नहीं पहुंचा है।
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ग्रामीण इलाकों में सड़कों के जाल बिछाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। वहीं हकीकत यह है कि सड़कों पर तारकोल नजर नहीं आता। इसका उदाहरण बरमीन इलाके की सड़क है। सड़क की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि इस पर वाहन चलना संभव नहीं। हर महीने जब सरकारी राशन की सप्लाई पहुंचती है तो राशन लाने वाले वाहन को डिपो तक पहुंचाने के लिए ग्रामीण पहले सड़क की खुद मरम्मत करते हैं। इसके बाद सरकारी राशन की सप्लाई मिलती है।
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रमेश चंद रवि शर्मा, सुनील व अन्य कई ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क पर करीब दस पंचायतों के ग्रामीण निर्भर हैं। इसका निर्माण कार्य 2011 में पीएमजीएसवाई के तहत किया गया था। सड़क बनाने के बाद इस पर न तो तारकोल डाला गया और न ही सात वर्ष में किसी ने इसकी सुध ली है। ग्रामीण स्वयं ही मरम्मत कर गुजारा कर रहे हैं। इसकी हालत सुधारने की मांग को कई बार जिला प्रशासन व पीएमजीएसवाई के अधिकारियों के सामने रखा है, लेकिन आज तक मरम्मत करना तो दूर कोई इसकी हालत को देखने के लिए भी नहीं पहुंचा है।
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