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J&K: हुद माता के दर्शन को गए डीसी सात घंटे पैदल चलकर लौटे जिला मुख्यालय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 22 Jul 2018 02:03 AM IST
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किश्तवाड़। हुद माता के दर्शन के दौरान वहां फंसे डीसी अंग्रेज सिंह राणा शनिवार को जिला मुख्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्हें सात घंटे तक पैदल सफर भी करना पड़ा। उन्हेें दोपहर के समय दच्छन के सिरशी गांव से हेलीकाप्टर सेवा मिली।
जानकारी के अनुसार हेलीकाप्टर सेवा के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके लिए उन्हें सिरशी गांव तक पैदल पहुंचना पड़ा। इस बाबत जब उनसे पूछा गया तो उनका कहना था कि शुक्रवार को उन्हें हेलीकाप्टर से केकुट क्षेत्र में उतार तो दिया गया, वापस से लाने के लिए हेलीकाप्टर नहीं पहुंचा। इस बारे में दोनों कंपनियों से पूछेंगे। हो सका तो कार्रवाई भी करेंगे कि उन्होंने हेलीकाप्टर सेवा लोगों को क्यों नहीं दी, जबकि टिकट काटी थी। हमने जुर्माना भी किया था। इसकी हम जांच अवश्य करेंगे।
डीसी ने कहा कि हम हुद माता के दर्शन को गए थे। जहां पता चला कि हेलीकाप्टर वापस नहीं आएगा, तो गूगठ तक पैदल आए। इसमें लगभग तीन घंटे लगे। शनिवार सुबह गूगठ से सिरशी के लिए निकलना पड़ा। इसमें साढ़े तीन घंटे से अधिक का समय लगा। कहीं-कहीं घोड़ा भी मिला। उन्होंने कहा कि उनके साथ उनका परिवार भी था। बेटी और पत्नी साथ थीं। सिरशी में उन्हें हेलीकाप्टर मिला। इसके बाद दोपहर के समय किश्तवाड़ पहुंचे। कहा कि थकावट तो हो गई, लेकिन काम तो करना है। जिस समय उनसे बात की गई, वह वीडियो कांफ्रेंसिंग में व्यस्त थे। उधर, जितने भी लोगों ने टिकट कराए थे, उनको निराशा हुई है। हालांकि कंपनियों ने उन्हें टिकट का पैसा लौटा दिया है।
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अब संशय है कि अगर हेलीकाप्टर पायलट मचेल यात्रा के लिए हेलीपैड मचेल और गुलाबगढ़ में जांच टीम का इंतजार करते रहेंगे कि 25 जुलाई से यात्रा आरंभ होने के दिन लोगों को सेवा देंगे कि नहीं। इसके लिए अब डीसी क्या करते हैं, उसका इंतजार है।
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जानकारी के अनुसार हेलीकाप्टर सेवा के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके लिए उन्हें सिरशी गांव तक पैदल पहुंचना पड़ा। इस बाबत जब उनसे पूछा गया तो उनका कहना था कि शुक्रवार को उन्हें हेलीकाप्टर से केकुट क्षेत्र में उतार तो दिया गया, वापस से लाने के लिए हेलीकाप्टर नहीं पहुंचा। इस बारे में दोनों कंपनियों से पूछेंगे। हो सका तो कार्रवाई भी करेंगे कि उन्होंने हेलीकाप्टर सेवा लोगों को क्यों नहीं दी, जबकि टिकट काटी थी। हमने जुर्माना भी किया था। इसकी हम जांच अवश्य करेंगे।
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डीसी ने कहा कि हम हुद माता के दर्शन को गए थे। जहां पता चला कि हेलीकाप्टर वापस नहीं आएगा, तो गूगठ तक पैदल आए। इसमें लगभग तीन घंटे लगे। शनिवार सुबह गूगठ से सिरशी के लिए निकलना पड़ा। इसमें साढ़े तीन घंटे से अधिक का समय लगा। कहीं-कहीं घोड़ा भी मिला। उन्होंने कहा कि उनके साथ उनका परिवार भी था। बेटी और पत्नी साथ थीं। सिरशी में उन्हें हेलीकाप्टर मिला। इसके बाद दोपहर के समय किश्तवाड़ पहुंचे। कहा कि थकावट तो हो गई, लेकिन काम तो करना है। जिस समय उनसे बात की गई, वह वीडियो कांफ्रेंसिंग में व्यस्त थे। उधर, जितने भी लोगों ने टिकट कराए थे, उनको निराशा हुई है। हालांकि कंपनियों ने उन्हें टिकट का पैसा लौटा दिया है।
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अब संशय है कि अगर हेलीकाप्टर पायलट मचेल यात्रा के लिए हेलीपैड मचेल और गुलाबगढ़ में जांच टीम का इंतजार करते रहेंगे कि 25 जुलाई से यात्रा आरंभ होने के दिन लोगों को सेवा देंगे कि नहीं। इसके लिए अब डीसी क्या करते हैं, उसका इंतजार है।