{"_id":"57192a4a4f1c1bd4518b4ce5","slug":"will-become-a-rehabilitation-center-for-inmates","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाटी के पत्थरबाजों के लिए बनेगा पुनर्वास केंद्र : डीजी जेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाटी के पत्थरबाजों के लिए बनेगा पुनर्वास केंद्र : डीजी जेल
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 22 Apr 2016 12:02 PM IST
विज्ञापन
1986 के बैच के आईपीएस अधिकारी एस पी वैद्य
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुलिस विभाग में लगभग हर जगह, हर विंग और हर पद पर काम कर चुके 1986 के बैच के आईपीएस अधिकारी एस पी वैद्य ने हाल ही में महानिदेशक जेल का पदभार संभाला है। वह चाहते हैं कि जेलों में बंद युवा कैदियों का पुनर्वास किया जाए।
खासकर कश्मीर में पत्थरबाजी करने वाले युवाओं का पुनर्वास किया जाए, ताकि उनकी सोच बदल सके। इसके लिए पुलवामा में पुनर्वास केंद्र बनाने की योजना उन्होंने तैयार की है। ऐसे ही कई विषयों पर अमर उजाला संवाददाता अजय मीनिया ने उनसे बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश।
आतंकियों के साथ नहीं रख सकते
कश्मीर में पत्थरबाजी करने के आरोपी युवाओं को आतंकियों के साथ रखना पड़ता है। विभाग इनके लिए पुलवामा में एक पुनर्वास केंद्र बनाएगा, जहां इन्हें रखा जाएगा। साथ ही उन युवा कैदियों का भी पुनर्वास किया जाएगा, जो अन्य अपराधों में आरोपी होने की वजह से जेलों में बंद है। वह जब जेलों से बाहर जाएं तो अपनी जिंदगी की नई पारी शुरू कर सकें।
विज्ञापन
जेलों में भरे जाएंगे 400 पद
यह बात सच है कि जेलों में मैन पॉवर की कमी है। विभाग में 400 पद खाली हैं। इन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बहुत जल्द इन पदों को भर लिया जाएगा, ताकि जेलों के कामकाज को सरल बनाया जा सके।
सभी जेलों पर रहेगी तीसरी आंख की नजर
रियासत की सभी जेलों में सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए तकनीकी तौर पर काम किया जाएगा। जम्मू श्रीनगर की सेंट्रल, जिला जेल के अलावा अन्य जिलों की जिला जेलों को सीसीटीवी से कवर किया जाएगा। ताकि जेलों पर कैमरे से नजर रखी जा सके। इससे जेलों में होने वाली मारपीट की घटनाओं, जेलों में कैदियों और मुलाजिमों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।
तीन जेलों की खस्ताहालत
जम्मू, श्रीनगर की सेंट्रल जेल और पुंछ की जेल की हालत काफी खस्ता है। पुंछ जेल की इमारत तो बहुत ज्यादा खस्ता है। विभाग इन जेलों की जगह नई जेलों का निर्माण कराएगा और कुछ की मरम्मत कराएगा। जेलों के ढांचे को मजबूत करने के लिए दो चरणों में 35 करोड़ रुपये मिले हैं।
युवाओं को सक्षम बनाने पर जोर
जलों में बंद युवाओं को आईटीआई की शिक्षा, कंप्यूटर की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके साथ ही कैटरिंग और हैंडीक्राफ्ट बनाने की भी ट्रेनिंग दी जा रही है। इस प्रक्रिया में और अधिक सुधार लाया जाएगा, ताकि जब जेलों से बाहर कैदी जाएं तो इतना सक्षम हों कि अपनी जिंदगी को शान से नए सिरे से शुरू कर सकें। जेलों में करीब 100 विदेशी कैदी भी हैं, जिनका पूरा ख्याल रखा जाता है।
विज्ञापन
खासकर कश्मीर में पत्थरबाजी करने वाले युवाओं का पुनर्वास किया जाए, ताकि उनकी सोच बदल सके। इसके लिए पुलवामा में पुनर्वास केंद्र बनाने की योजना उन्होंने तैयार की है। ऐसे ही कई विषयों पर अमर उजाला संवाददाता अजय मीनिया ने उनसे बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश।
विज्ञापन
आतंकियों के साथ नहीं रख सकते
कश्मीर में पत्थरबाजी करने के आरोपी युवाओं को आतंकियों के साथ रखना पड़ता है। विभाग इनके लिए पुलवामा में एक पुनर्वास केंद्र बनाएगा, जहां इन्हें रखा जाएगा। साथ ही उन युवा कैदियों का भी पुनर्वास किया जाएगा, जो अन्य अपराधों में आरोपी होने की वजह से जेलों में बंद है। वह जब जेलों से बाहर जाएं तो अपनी जिंदगी की नई पारी शुरू कर सकें।
विज्ञापन
जेलों में भरे जाएंगे 400 पद
यह बात सच है कि जेलों में मैन पॉवर की कमी है। विभाग में 400 पद खाली हैं। इन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बहुत जल्द इन पदों को भर लिया जाएगा, ताकि जेलों के कामकाज को सरल बनाया जा सके।
सभी जेलों पर रहेगी तीसरी आंख की नजर
रियासत की सभी जेलों में सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए तकनीकी तौर पर काम किया जाएगा। जम्मू श्रीनगर की सेंट्रल, जिला जेल के अलावा अन्य जिलों की जिला जेलों को सीसीटीवी से कवर किया जाएगा। ताकि जेलों पर कैमरे से नजर रखी जा सके। इससे जेलों में होने वाली मारपीट की घटनाओं, जेलों में कैदियों और मुलाजिमों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।
तीन जेलों की खस्ताहालत
जम्मू, श्रीनगर की सेंट्रल जेल और पुंछ की जेल की हालत काफी खस्ता है। पुंछ जेल की इमारत तो बहुत ज्यादा खस्ता है। विभाग इन जेलों की जगह नई जेलों का निर्माण कराएगा और कुछ की मरम्मत कराएगा। जेलों के ढांचे को मजबूत करने के लिए दो चरणों में 35 करोड़ रुपये मिले हैं।
युवाओं को सक्षम बनाने पर जोर
जलों में बंद युवाओं को आईटीआई की शिक्षा, कंप्यूटर की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके साथ ही कैटरिंग और हैंडीक्राफ्ट बनाने की भी ट्रेनिंग दी जा रही है। इस प्रक्रिया में और अधिक सुधार लाया जाएगा, ताकि जब जेलों से बाहर कैदी जाएं तो इतना सक्षम हों कि अपनी जिंदगी को शान से नए सिरे से शुरू कर सकें। जेलों में करीब 100 विदेशी कैदी भी हैं, जिनका पूरा ख्याल रखा जाता है।