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Udhampur News: करसैल गांव में तीन घर जमींदोज, 25 मकानों के गिरने का खतरा
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उधमपुर। काल्डी के करसैल गांव से भूस्खलन से बेघर हुए लोग, कुल्ला बनाकर रिहायशी करते और बाहर अस्थ
- फोटो : लोको
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। ब्लाक घोरड़ी की काल्डी क्षेत्र के वार्ड एक के करसैल गांव में बारिश से रविवार को भूस्खलन हो गया। इससे तीन कच्चे घर जमींदोज हो गए। 25 के आसपास अन्य घरों के भी गिरने का खतरा पैदा हो गया है।
मजबूरी में लोग पलायन कर दो किलोमीटर दूर एक सुरक्षित स्थान पर खेतों में कुल्ले बनाकर रहने को मजबूर हो गए हैं। पीड़ित मखनू देवी, सुभाष चंद्र, अशोक कुमार व अन्य ने बताया कि भूस्खलन से लगभग पूरा गांव खतरे की जद में आ गया है। हम किसी तरह से अपने मवेशियों को साथ लेकर वहां से जान बचाकर भाग आएं हैं। हमारे पास न खाने के लिए राशन है और न ही पहनने के लिए कपड़े। हम बिस्तर भी नहीं ला पाए।
भूस्खलन तेजी के साथ हुआ है। अभी भी पहाड़ी लगातार खिसक रही है। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक टीमों ने हालात का जायजा तो लिया है लेकिन अभी तक टैंट और राशन वगैरह की सुविधा मुहैया नहीं कराई है। फिलहाल जान तो बच गई है। उम्मीद है प्रशासन भी कुछ दिन तक शेल्टर और राशन मुहैया करवा देगा। हमारी जमीनें और घर जो भूस्खलन की चपेट में आकर खत्म हो गए हैं वे दोबारा कैसे मिल पाएंगे। हमारी जिंदगी दोबारा कैसे पटरी पर लौटेगी यह चिंता अधिक है। प्रशासन से यही आग्रह है कि हमारी मदद की जाए।
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उधमपुर। ब्लाक घोरड़ी की काल्डी क्षेत्र के वार्ड एक के करसैल गांव में बारिश से रविवार को भूस्खलन हो गया। इससे तीन कच्चे घर जमींदोज हो गए। 25 के आसपास अन्य घरों के भी गिरने का खतरा पैदा हो गया है।
मजबूरी में लोग पलायन कर दो किलोमीटर दूर एक सुरक्षित स्थान पर खेतों में कुल्ले बनाकर रहने को मजबूर हो गए हैं। पीड़ित मखनू देवी, सुभाष चंद्र, अशोक कुमार व अन्य ने बताया कि भूस्खलन से लगभग पूरा गांव खतरे की जद में आ गया है। हम किसी तरह से अपने मवेशियों को साथ लेकर वहां से जान बचाकर भाग आएं हैं। हमारे पास न खाने के लिए राशन है और न ही पहनने के लिए कपड़े। हम बिस्तर भी नहीं ला पाए।
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भूस्खलन तेजी के साथ हुआ है। अभी भी पहाड़ी लगातार खिसक रही है। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक टीमों ने हालात का जायजा तो लिया है लेकिन अभी तक टैंट और राशन वगैरह की सुविधा मुहैया नहीं कराई है। फिलहाल जान तो बच गई है। उम्मीद है प्रशासन भी कुछ दिन तक शेल्टर और राशन मुहैया करवा देगा। हमारी जमीनें और घर जो भूस्खलन की चपेट में आकर खत्म हो गए हैं वे दोबारा कैसे मिल पाएंगे। हमारी जिंदगी दोबारा कैसे पटरी पर लौटेगी यह चिंता अधिक है। प्रशासन से यही आग्रह है कि हमारी मदद की जाए।
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