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सत्संग में होता है पाप और अज्ञान का नाश : शास्त्री
Sat, 24 Aug 2024 02:20 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Sat, 24 Aug 2024 02:20 AM IST
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गीता भवन चिनैनी में जारी शिव महापुराण कथा में दिया संगत को ज्ञान
संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। कस्बे के गीता भवन में शिव महापुराण कथा जारी है। शुक्रवार को संत सुभाष शास्त्री महाराज ने संगत को सत्संग का महत्व समझाया।
उन्होंने बताया कि सत्संग में पाप और अज्ञान का नाश होता है। हृदय में भक्ति व ज्ञान का प्रकाश व निश्चित ही मनुष्य का विकास एवं प्रभु चरणों में निवास होता है। जहां ज्ञान का अभाव है, वहां सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है और जहां ज्ञान है, वहां कुछ न होकर भी सब कुछ है।
अतः संत (गुरु) के पास ज्ञान रूपी धन होने से सब कुछ है, लेकिन इस धन को अपने-अपने पुरुषार्थ से आप प्राप्त करो। एक सेवक का बस यही कर्तव्य है कि वह अपना मन संत (गुरु) को समर्पित करे, इनके श्री चरणों में लगा ले अर्थात सत्संग करे। सेवा करे, साधना करे और श्रद्धा सदभाव रखते हुए सुमिरन करे, तभी सत्संग में आने सही अर्थ में लाभ है।
अंत में संगत से अनुरोध किया कि सत्संग में जरूर आएं, परंतु घर-संसार का काम काज प्रभावित न करते हुए जो भी सत्य के विषय में सुने उस पर आचरण अवश्य करें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। कस्बे के गीता भवन में शिव महापुराण कथा जारी है। शुक्रवार को संत सुभाष शास्त्री महाराज ने संगत को सत्संग का महत्व समझाया।
उन्होंने बताया कि सत्संग में पाप और अज्ञान का नाश होता है। हृदय में भक्ति व ज्ञान का प्रकाश व निश्चित ही मनुष्य का विकास एवं प्रभु चरणों में निवास होता है। जहां ज्ञान का अभाव है, वहां सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है और जहां ज्ञान है, वहां कुछ न होकर भी सब कुछ है।
अतः संत (गुरु) के पास ज्ञान रूपी धन होने से सब कुछ है, लेकिन इस धन को अपने-अपने पुरुषार्थ से आप प्राप्त करो। एक सेवक का बस यही कर्तव्य है कि वह अपना मन संत (गुरु) को समर्पित करे, इनके श्री चरणों में लगा ले अर्थात सत्संग करे। सेवा करे, साधना करे और श्रद्धा सदभाव रखते हुए सुमिरन करे, तभी सत्संग में आने सही अर्थ में लाभ है।
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अंत में संगत से अनुरोध किया कि सत्संग में जरूर आएं, परंतु घर-संसार का काम काज प्रभावित न करते हुए जो भी सत्य के विषय में सुने उस पर आचरण अवश्य करें।