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Udhampur News: बप्प सराड़ स्कूल में छह माह से हेडमास्टर नहीं
Sun, 01 Sep 2024 04:25 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
Updated Sun, 01 Sep 2024 04:25 AM IST
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तीन शिक्षकों के पद भी रिक्त, न चहारदीवारी और न ही पर्याप्त खेल मैदान
70 साल पुराने स्कूल में सुविधाओं का टोटा, 297 बच्चे परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। एक तरफ सरकार सरकारी स्कूलों को सुविधा संपन्न बता कर दाखिले और बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अभियान चला रही है। वहीं, जमीनी स्तर पर आज भी कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं ही नहीं हैं। इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
ऐसा ही मामला चिनैनी शिक्षा जोन के बप्प सराड़ हाई स्कूल का है, जो छह माह से बिना हेडमास्टर के चल रहा है। साथ ही करीब तीन शिक्षकों के पद रिक्त है। 70 साल पुराने स्कूल की आजतक चहारदीवारी नहीं हो पाई है, जिस कारण मवेशी सहित अराजक तत्व स्कूल में घुस आते हैं। इससे पढ़ाई करने वाले बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
स्कूल में उचित खेल मैदान की भी सुविधा नहीं है। सुविधाओं के अभाव में न तो बच्चों को उचित ज्ञान मिल रहा है वहीं, हेडमास्टर नहीं होने से अन्य प्रबंधन के कार्य भी नहीं हो रहे हैं। खेलों में भी बच्चे पिछड़ रहे हैं।
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एक दशक से हायर सेकेंडरी की उठ रही मांग
पूर्व सरपंच सुदेश चंद्र ने बताया कि बप्प सराड़ स्कूल को 1955 में प्राइमरी स्कूल के तौर पर खोला गया था। 53 साल बाद वर्ष 2008 में मिडिल और इसके बाद हाई किया गया। एक दशक से लोग हायर सेकेंडरी बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके आसपास कई प्राइमरी व मिडिल स्कूल हैं। शिवगढ़ धार, छपड़ी, लोथड़, गांच्छड़, कड़वालत, अपर सराड़, बनेक और जीग आदि क्षेत्रों से स्कूल में बच्चे पढ़ने आते हैं। मौजूदा समय में स्कूल में बच्चों की संख्या 297 है।
आचार संहिता लागू है। चार अक्तूबर के बाद हेड मास्टर सहित शिक्षकों की कमी दूर कर दी जाएगी। चहारदीवारी को लेकर लोकल वाडीज में फंड आएंगे तो इसे भी रखा जाएगा। हायर सेकेंडरी की मांग को लेकर लोग प्रस्ताव दें, ताकि उनकी मांग को आगे भेजा जा सके।
- नरेंद्र मोहन सूरी, सीईओ, उधमपुर
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70 साल पुराने स्कूल में सुविधाओं का टोटा, 297 बच्चे परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
चिनैनी। एक तरफ सरकार सरकारी स्कूलों को सुविधा संपन्न बता कर दाखिले और बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अभियान चला रही है। वहीं, जमीनी स्तर पर आज भी कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं ही नहीं हैं। इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
ऐसा ही मामला चिनैनी शिक्षा जोन के बप्प सराड़ हाई स्कूल का है, जो छह माह से बिना हेडमास्टर के चल रहा है। साथ ही करीब तीन शिक्षकों के पद रिक्त है। 70 साल पुराने स्कूल की आजतक चहारदीवारी नहीं हो पाई है, जिस कारण मवेशी सहित अराजक तत्व स्कूल में घुस आते हैं। इससे पढ़ाई करने वाले बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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स्कूल में उचित खेल मैदान की भी सुविधा नहीं है। सुविधाओं के अभाव में न तो बच्चों को उचित ज्ञान मिल रहा है वहीं, हेडमास्टर नहीं होने से अन्य प्रबंधन के कार्य भी नहीं हो रहे हैं। खेलों में भी बच्चे पिछड़ रहे हैं।
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एक दशक से हायर सेकेंडरी की उठ रही मांग
पूर्व सरपंच सुदेश चंद्र ने बताया कि बप्प सराड़ स्कूल को 1955 में प्राइमरी स्कूल के तौर पर खोला गया था। 53 साल बाद वर्ष 2008 में मिडिल और इसके बाद हाई किया गया। एक दशक से लोग हायर सेकेंडरी बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके आसपास कई प्राइमरी व मिडिल स्कूल हैं। शिवगढ़ धार, छपड़ी, लोथड़, गांच्छड़, कड़वालत, अपर सराड़, बनेक और जीग आदि क्षेत्रों से स्कूल में बच्चे पढ़ने आते हैं। मौजूदा समय में स्कूल में बच्चों की संख्या 297 है।
आचार संहिता लागू है। चार अक्तूबर के बाद हेड मास्टर सहित शिक्षकों की कमी दूर कर दी जाएगी। चहारदीवारी को लेकर लोकल वाडीज में फंड आएंगे तो इसे भी रखा जाएगा। हायर सेकेंडरी की मांग को लेकर लोग प्रस्ताव दें, ताकि उनकी मांग को आगे भेजा जा सके।
- नरेंद्र मोहन सूरी, सीईओ, उधमपुर