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छठे दिन भी थमे रहे बस और मेटाडोर के पहिए
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उधमपुर। 50 प्रतिशत यात्रियों की कटौती के सरकारी आदेश के विरोध में सोमवार को लगातार छठे दिन भी जिले में बस और मेटाडोर ने आवाजाही बंद रही। इस कारण यात्रियों को बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशान ग्रामीण इलाकों के यात्री हैं। इनके लिए अब शहर पहुंच कर खरीदारी करना मुश्किल हो गया है।
गौरतलब है कि बुधवार को सरकारी आदेश के विरोध में मेटाडोर और बसों की आवाजाही को बंद कर दिया गया था। सरकार ने आदेश दिया था कि कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए यात्री वाहनों में केवल 50 प्रतिशत यात्रियों को ही बैठने की अनुमति होगी, जबकि ट्रांसपोर्टरों ने इस आदेश को मानने से इनकार करते हुए इस को लेकर काम बंद कर दिया था। सोमवार को छठे दिन भी बसों व मेटाडोर के पहिए पूरी तरह से थमे रहे। उधमपुर के बस अड्डे से एक भी बस रवाना नहीं हुई। कई यात्री बसों के चलने की उम्मीद में बस अड्डे पर पहुंचे और फिर निराश होकर लौट गए। दोपहर के समय तो बस अड्डे पर सन्नाटा पसर गया था।
बस व मेटाडोर नहीं चलने से ग्रामीण इलाकों के लोग बहुत ज्यादा परेशान हो गए हैं। इनके लिए किसी बीमार को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। इसी कारण पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में ओपीडी में भी मरीजों की संख्या में बहुत ज्यादा गिरावट आई है। ग्रामीणों को जरूरत का सामान खरीदने के लिए बाजार पहुंचने में रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्रामीण तो मजबूरी में हजारों रुपये खर्च कर छोटे यात्री वाहन लेकर बाजार पहुंच रहे है। मरीजों को भी छोटे यात्री वाहनों में ही लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को उनकी परेशानी को ध्यान में रखते हुए मंथन करना चाहिए। अगर बस और मेटाडोर नहीं चलती हैं तो आने वाले दिनों में परेशानी दोगुनी हो जाएगी।
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गौरतलब है कि बुधवार को सरकारी आदेश के विरोध में मेटाडोर और बसों की आवाजाही को बंद कर दिया गया था। सरकार ने आदेश दिया था कि कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए यात्री वाहनों में केवल 50 प्रतिशत यात्रियों को ही बैठने की अनुमति होगी, जबकि ट्रांसपोर्टरों ने इस आदेश को मानने से इनकार करते हुए इस को लेकर काम बंद कर दिया था। सोमवार को छठे दिन भी बसों व मेटाडोर के पहिए पूरी तरह से थमे रहे। उधमपुर के बस अड्डे से एक भी बस रवाना नहीं हुई। कई यात्री बसों के चलने की उम्मीद में बस अड्डे पर पहुंचे और फिर निराश होकर लौट गए। दोपहर के समय तो बस अड्डे पर सन्नाटा पसर गया था।
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बस व मेटाडोर नहीं चलने से ग्रामीण इलाकों के लोग बहुत ज्यादा परेशान हो गए हैं। इनके लिए किसी बीमार को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। इसी कारण पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में ओपीडी में भी मरीजों की संख्या में बहुत ज्यादा गिरावट आई है। ग्रामीणों को जरूरत का सामान खरीदने के लिए बाजार पहुंचने में रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्रामीण तो मजबूरी में हजारों रुपये खर्च कर छोटे यात्री वाहन लेकर बाजार पहुंच रहे है। मरीजों को भी छोटे यात्री वाहनों में ही लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को उनकी परेशानी को ध्यान में रखते हुए मंथन करना चाहिए। अगर बस और मेटाडोर नहीं चलती हैं तो आने वाले दिनों में परेशानी दोगुनी हो जाएगी।
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