{"_id":"f87ce47a89cd7f59164ae7bb9cb8b061","slug":"the-headmistress-was-suspended-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रधानाध्यापिका को सस्पेंड किया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रधानाध्यापिका को सस्पेंड किया
ब्यूरो/अमर उजाला, उध्ामपुर
Updated Wed, 10 Dec 2014 12:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आयरन की गोली की अधिक मात्रा से एक छात्रा की मौत और एक छात्र के बीमार होने का मामला गरमाने के तुरंत बाद प्रशासन ने कोटली वाला के मिडिल स्कूल की प्रधानाध्यापिका को सस्पेंड कर दिया। साथ ही शिक्षा विभाग ने जिले के स्कूलों में दी जाने वाली आयरन की गोलियों और अन्य दवाइयों पर फिलहाल रोक लगा दी है।
विज्ञापन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार ने भी ब्लाक मेडिकल आफिसर चिनैनी और एक फार्मासिस्ट की टीम का गठन कर पूरे मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी बलबीर सिंह के अनुसार कोटली वाला में हुए हादसे के बाद सभी स्कूलों में दी जाने वाली दवाइयों पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन
गोलियां बांटने की खामियों को दूर करने के कडेे़ दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी बलबीर सिंह के अनुसार मामला काफी गंभीर है। इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग पूरी तरह से सक्रिय है। जिले के करीब डेढ़ सौ स्कूलों में दी जाने वाली दवाइयों को पूरी तरह से बांटने पर रोक लगाई है।
विज्ञापन
दवाइयां बांटने और खिलाने में कहीं न कहीं शिक्षा विभाग और स्कूल के शिक्षकों की लापरवाही पाई गई है। मौके पर जाकर पूरी स्थिति का जायजा लिया गया है। मृतक छात्रा के परिवार के सदस्यों से भी बात की गई है। छात्रा के दादा ने बताया कि कुछ दिन पहले ही आयुष कैंप लगा था, जिसमें दवाइयां बांटी गई थी। इन दवाइयों को खाने की वजह से भी हादसा हो सकता है।
शिक्षकों को फिर से मिलेगा प्रशिक्षण
शिक्षा विभाग ने स्कूलों में दी जाने वाली आयरन की गोलियों को स्कूलों में वितरित करने के लिए शिक्षकों को फिर से ट्रेनिंग देने की घोषणा की है। इसके लिए शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को कड़े दिशा निर्देश जारी कर दिये हैं।
इस बारे में जानकारी देते हुए जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी बलबीर सिंह ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली आयरन व पेट के कीडे़ मारने के लिए दी जाने वाली गोलियों की मात्रा, कब और कैसे देना है, इसका पूरा ध्यान रखने के लिए शिक्षकों को फिर से प्रशिक्षण दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में दी जाने वाली आयरन की गोलियों को सप्ताह में एक बार बच्चों को स्कूल में शिक्षकों की देखरेख में दी जाती है, जिसमें मौजूद 0.5 फोलिक एसिड बच्चों में आयरन की कमी से होने वाली कमजोरी को कम करता है, लेकिन इसको अधिक मात्रा में खाने से बच्चों को लूज मोशन की समस्या हो सकती है।
इसके लिए खासतौर से प्रशिक्षित शिक्षकों की देखरेख में देने के निर्देश हैं। इसके अलावा स्कूलों में बच्चों को कीडे़ मारने की दवाई भी दी जाती है जो कि छह महीने के अंतराल में एक बार दी जाती है।
एक-दूसरे के सिर पर फोड़ रहे हैं ठीकरा
आयरन की गोली से छात्रा की मौत के मामले में शिक्षा और चिकित्सा विभाग एक-दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। दोनों विभाग जवाबदेही से बचने में लगे हैं। वहीं पीड़ित परिवार दोनों विभागों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
लोगों का आरोप है एक तरफ चिकित्सा विभाग की लापरवाही के कारण जानलेवा हो चुकी एक्सपायरी दवाइयों को बांटा गया वहीं दूसरी तरफ शिक्षा विभाग ने लापरवाही की सारी हदें पार करते हुए उन दवाइयों को मासूमों के हाथों में थमा
दिया गया।
गांव के सरपंच सुभाष चंद्र के अनुसार इसके लिए चिकित्सा और शिक्षा विभाग दोनों ही शक के घेरे में हैं। हालांकि शिक्षा विभाग ने हादसे के फौरन बाद हरकत में आते हुए कार्रवाई की है। क्यों एक्सपायर हो चुकी दवाइयों से होने वाले नुकसान की जानकारी रखने वाले चिकित्सा विभाग ने इनको लोगों में वितरित होने के लिए भेज दिया। क्यों शिक्षा विभाग ने मासूमाें के हाथों में दवाइयों के पूरे पैके थमा दिए।
जबकि इन दवाइयों को शिक्षकों की देखरेख में स्कूल में ही देने व दवाइयों के स्टाक को स्कूल में ही रखे जाने के आदेश थे। हादसा किन कारणों से हुआ, यह सवाल अब भी लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है।
ग्रामीणों ने पूरी तरह से दोनों विभागों द्वारा की गई इस लापरवाही के लिए ठोस कार्रवाई करने की मांग की है। ताकि मामले की सच्चाई को सामने लाया सके और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके। जबकि अभी भी दोनों ही विभाग मामले की जांच करने की बजाए घटना से अपना अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं।
ब्लाक मेडिकल आफिसर चिनैनी यासीन और एक फार्मासिस्ट सहित तीन सदस्यों की टीम गठित की गई है। किस दवाई से मामला बिगड़ा है, इसकी जांच की जाएगी। आयरन को गोली और पीने वाली दवाई को सीज कर लिया गया है। रासायनिक जांच के बाद ही रिपोर्ट दी जाएगी।
-डॉ. अरुण कुमार, सीएमओ