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आठ वर्ष में तीन गुणा बढ़ गई कैंबल डंगा जल आपूर्ति योजना की लागत
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उधमपुर। जलशक्ति विभाग के समय पर काम पूरा न किए जाने के कारण कैंबल डंगा जल आपूर्ति योजना के प्रोजेक्ट की लागत तीन गुना अधिक बढ़ कर 12 करोड़ पहुंच गई है। इसका बचा हुआ काम जलजीवन मिशन के तहत पूरा किया जाएगा। विभाग ने बचे हुए कार्य पूरा करने के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक इसका काम पूरा हो जाएगा और दस से अधिक पंचायतों की पानी की किल्लत दूर हो जाएगी।
रेलवे टनल के निर्माण कार्य के दौरान कैंबल डंगा इलाके में टनल के अंदर प्राकृतिक जलस्रोत फूट पड़ा था। 2011 में जलशक्ति विभाग ने टनल से पानी लिफ्ट करने का प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेजा। जून 2012 में केंद्र सरकार ने नेशनल रूरल ड्रिकिंग वाटर सप्लाई प्रोग्राम के तहत प्रस्ताव को मंजूर किया और इसके लिए चार करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी। मंजूरी मिलने के तीन वर्ष बाद जून 2015 में प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। इस राशि से जलशक्ति विभाग ने एक पंप रूम, गोपाल पुरा की पहाड़ी पर 50 हजार गैलन पानी एकत्र करने की क्षमता वाला पानी का टैंक, संप टैंक तैयार किया है। लेकिन अभी तक फिल्ट्रेशन प्लांट तैयार नहीं हो सका है। इसके अलावा अभी पाइप लाइन बिछाना भी बाकी है। इस काम को पूरा करने के लिए 2020 में इस योजना को जलजीवन मिशन में परिवर्तित कर प्रोजेक्ट की लागत 12 करोड़ कर दी गई। अब जलशक्ति विभाग ने जलजीवन मिशन के तहत ही इसको पूरा करना है।
20 हजार की आबादी को मिलना है लाभ
इस प्रोजेक्ट के जरिए 20 हजार से ज्यादा आबादी की पानी की किल्लत की दूर किया जाना है। प्राजेक्ट के तहत सुनाड़ी, हरत्यान, कैंबल डंगा, जिब, चक व अन्य कई ग्रामीण इलाकों में पानी पहुंचाया जाना है। अक्सर इन ग्रामीण इलाकों के लोग पानी की किल्लत को लेकर उधमपुर शहर में जलशक्ति विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं।
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अब इस प्रोजेक्ट का बचा हुआ काम जलजीवन मिशन के तहत पूरा किया जाएगा। मुख्य काम फिल्ट्रेशन प्लांट तैयार करने का है। बचे हुए सभी कार्यों के टेंडर जारी कर दिए गए हैं। जलजीवन मिशन के तहत अब हर घर पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ताज चौधरी, एक्सईएन पीएचई
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रेलवे टनल के निर्माण कार्य के दौरान कैंबल डंगा इलाके में टनल के अंदर प्राकृतिक जलस्रोत फूट पड़ा था। 2011 में जलशक्ति विभाग ने टनल से पानी लिफ्ट करने का प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेजा। जून 2012 में केंद्र सरकार ने नेशनल रूरल ड्रिकिंग वाटर सप्लाई प्रोग्राम के तहत प्रस्ताव को मंजूर किया और इसके लिए चार करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी। मंजूरी मिलने के तीन वर्ष बाद जून 2015 में प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। इस राशि से जलशक्ति विभाग ने एक पंप रूम, गोपाल पुरा की पहाड़ी पर 50 हजार गैलन पानी एकत्र करने की क्षमता वाला पानी का टैंक, संप टैंक तैयार किया है। लेकिन अभी तक फिल्ट्रेशन प्लांट तैयार नहीं हो सका है। इसके अलावा अभी पाइप लाइन बिछाना भी बाकी है। इस काम को पूरा करने के लिए 2020 में इस योजना को जलजीवन मिशन में परिवर्तित कर प्रोजेक्ट की लागत 12 करोड़ कर दी गई। अब जलशक्ति विभाग ने जलजीवन मिशन के तहत ही इसको पूरा करना है।
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20 हजार की आबादी को मिलना है लाभ
इस प्रोजेक्ट के जरिए 20 हजार से ज्यादा आबादी की पानी की किल्लत की दूर किया जाना है। प्राजेक्ट के तहत सुनाड़ी, हरत्यान, कैंबल डंगा, जिब, चक व अन्य कई ग्रामीण इलाकों में पानी पहुंचाया जाना है। अक्सर इन ग्रामीण इलाकों के लोग पानी की किल्लत को लेकर उधमपुर शहर में जलशक्ति विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं।
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अब इस प्रोजेक्ट का बचा हुआ काम जलजीवन मिशन के तहत पूरा किया जाएगा। मुख्य काम फिल्ट्रेशन प्लांट तैयार करने का है। बचे हुए सभी कार्यों के टेंडर जारी कर दिए गए हैं। जलजीवन मिशन के तहत अब हर घर पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ताज चौधरी, एक्सईएन पीएचई