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Udhampur News: चार अस्थायी कोचों पर निर्भर है खिलाड़ियों का भविष्य
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उधमपुर। भारत सरकार की ओर से शुरू किए गए खेलो इंडिया अभियान के तहत जिला मुख्यालय में विभिन्न खेलों के लिए मात्र 4 अस्थायी कोचों की तैनाती की गई है। उनमें से कुछ का कार्यकाल खत्म होने वाला है। विभाग के पास एक भी स्थायी कोच उपलब्ध नहीं है।
इससे खेल जगत में बच्चों को बेहतर प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। उधमपुर जिले में खिलाड़ियों के भविष्य का दारोमदार पूरी तरह से प्राइवेट संगठनों पर निर्भर है। इनमें बैडमिंटन, वाॅलीबाल, शतरंज, हैंडबाल और बास्केट बाल आदि खेलों से जुड़े कई संगठन शामिल हैं। सरकार की ओर से इन्हें ग्रांट मुहैया कराई जाती है। इसके माध्यम से ये संगठन हर वर्ष प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं और युवाओं को जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करते हैं। अगर स्पोर्ट्स काउंसिल की बात की जाए तो उनके पास मौजूदा समय में खेलो इंडिया अभियान के तहत चार साल के लिए नियुक्त किए गए मात्र चार कोच ही मौजूद हैं। इनमें फुटबाल, बास्केटबाल, टेबल टेनिस और हैंडबाल कोच ही शामिल हैं। इनमें से कुछ का कार्यकाल खत्म होने वाला है। सभी का कार्यकाल खत्म होने पर विभाग के पास एक भी कोच नहीं रह जाएगा, जबकि विभिन्न संगठनों से जुड़े सैकड़ों खिलाड़ी मिनी स्टेडियम और सुभाष स्टेडियम में अभ्यास के लिए आते हैं।
बिना मार्गदर्शन बेहतर प्रदर्शन की चुनौती
उधमपुर में क्रिकेट, बैडमिंटन, कबड्डी, वाॅलीबाल और खो-खो सहित कई अन्य खेल युवाओं में लोकप्रिय हैं और कई खिलाड़ी खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहते हैं, लेकिन उचित प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से खिलाड़ियों के सपने अधर में ही रह जाते हैं। हालांकि उधमपुर जिला मुख्यालय में मिनी स्टेडियम और सुभाष स्टेडियम जैसे बड़े मैदान उपलब्ध हैं और दो इंडोर हाल भी बनाए गए हैं लेकिन बिना कोच के प्रशिक्षण और खेल जगत में बेहतर प्रदर्शन खिलाड़ियों के लिए चुनौती बना हुआ है।
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विभिन्न खेलों से जुड़े संगठनों में राष्ट्रीय व राज्य स्तर के कई खिलाड़ी मौजूद हैं, जोकि अपने समय की उपलब्धता के अनुसार बच्चों को खेल से जुड़ा प्रशिक्षण देते हैं लेकिन उधमपुर स्थायी और पेशेवर कोच काफी जरूरत है।
-
सुरेश खजूरिया, प्रधान बैडमिंटन एसोसिएशन
खेलों में नए खिलाड़ियों को तकनीकी और नियमों से जुड़ी बारीकियों के प्रति प्रशिक्षित करने के लिए कोच का होना बहुत जरूरी है। बिना कोच के खिलाड़ी का अभ्यास करना बेकार जाता है। जब तक उसे खेल के पूरे मापदंडों की जानकारी नहीं होगी तो वह बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाएगा।
-रितिक जंडयाल, बैडमिंटन खिलाड़ी
उधमपुर के युवाओं में खेल जगत में प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन उनकी प्रतिभा को तराशने और एक मंच मुहैया कराने के लिए संगठनों के साथ सरकारी तंत्र को भी विशेष कदम उठाने की जरूरत है। स्थायी और पेशेवर कोच की मदद से खिलाड़ियों में आत्मबल बढ़ता है।
-अभय प्रताप, सदस्य बैडमिंटन एसोसिएशन
खेलो इंडिया अभियान के तहत नियुक्त किए कोचों का कार्यकाल खत्म होने पर विभाग के पास एक भी कोच नहीं रह जाएगा। ऐसे में प्रशासन और विभाग को चाहिए कि मौजूद कोचों को या तो स्थायी किया जाए या अतिरिक्त कोचों की भी तैनाती की जाए ताकि युवाओं का खेलों के प्रति रुझान बढ़ सके।
-राम वर्मा, महासचिव, बैडमिंटन एसोसिएशन
खेलो इंडिया अभियान के तहत चार अस्थायी कोच उपलब्ध हैं। इसकी नियुक्ति की मांग को लेकर आलाधिकारियों को प्रस्ताव भी भेजा गया है। उम्मीद है कि इस पर जल्द कोई उचित कदम उठाए जाएंगे।
-विकास डोगरा, प्रबंधक स्पोर्ट्स काउंसिल
फोटो सहित
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इससे खेल जगत में बच्चों को बेहतर प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। उधमपुर जिले में खिलाड़ियों के भविष्य का दारोमदार पूरी तरह से प्राइवेट संगठनों पर निर्भर है। इनमें बैडमिंटन, वाॅलीबाल, शतरंज, हैंडबाल और बास्केट बाल आदि खेलों से जुड़े कई संगठन शामिल हैं। सरकार की ओर से इन्हें ग्रांट मुहैया कराई जाती है। इसके माध्यम से ये संगठन हर वर्ष प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं और युवाओं को जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करते हैं। अगर स्पोर्ट्स काउंसिल की बात की जाए तो उनके पास मौजूदा समय में खेलो इंडिया अभियान के तहत चार साल के लिए नियुक्त किए गए मात्र चार कोच ही मौजूद हैं। इनमें फुटबाल, बास्केटबाल, टेबल टेनिस और हैंडबाल कोच ही शामिल हैं। इनमें से कुछ का कार्यकाल खत्म होने वाला है। सभी का कार्यकाल खत्म होने पर विभाग के पास एक भी कोच नहीं रह जाएगा, जबकि विभिन्न संगठनों से जुड़े सैकड़ों खिलाड़ी मिनी स्टेडियम और सुभाष स्टेडियम में अभ्यास के लिए आते हैं।
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बिना मार्गदर्शन बेहतर प्रदर्शन की चुनौती
उधमपुर में क्रिकेट, बैडमिंटन, कबड्डी, वाॅलीबाल और खो-खो सहित कई अन्य खेल युवाओं में लोकप्रिय हैं और कई खिलाड़ी खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहते हैं, लेकिन उचित प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से खिलाड़ियों के सपने अधर में ही रह जाते हैं। हालांकि उधमपुर जिला मुख्यालय में मिनी स्टेडियम और सुभाष स्टेडियम जैसे बड़े मैदान उपलब्ध हैं और दो इंडोर हाल भी बनाए गए हैं लेकिन बिना कोच के प्रशिक्षण और खेल जगत में बेहतर प्रदर्शन खिलाड़ियों के लिए चुनौती बना हुआ है।
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विभिन्न खेलों से जुड़े संगठनों में राष्ट्रीय व राज्य स्तर के कई खिलाड़ी मौजूद हैं, जोकि अपने समय की उपलब्धता के अनुसार बच्चों को खेल से जुड़ा प्रशिक्षण देते हैं लेकिन उधमपुर स्थायी और पेशेवर कोच काफी जरूरत है।
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सुरेश खजूरिया, प्रधान बैडमिंटन एसोसिएशन
खेलों में नए खिलाड़ियों को तकनीकी और नियमों से जुड़ी बारीकियों के प्रति प्रशिक्षित करने के लिए कोच का होना बहुत जरूरी है। बिना कोच के खिलाड़ी का अभ्यास करना बेकार जाता है। जब तक उसे खेल के पूरे मापदंडों की जानकारी नहीं होगी तो वह बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाएगा।
-रितिक जंडयाल, बैडमिंटन खिलाड़ी
उधमपुर के युवाओं में खेल जगत में प्रतिभा की कमी नहीं है लेकिन उनकी प्रतिभा को तराशने और एक मंच मुहैया कराने के लिए संगठनों के साथ सरकारी तंत्र को भी विशेष कदम उठाने की जरूरत है। स्थायी और पेशेवर कोच की मदद से खिलाड़ियों में आत्मबल बढ़ता है।
-अभय प्रताप, सदस्य बैडमिंटन एसोसिएशन
खेलो इंडिया अभियान के तहत नियुक्त किए कोचों का कार्यकाल खत्म होने पर विभाग के पास एक भी कोच नहीं रह जाएगा। ऐसे में प्रशासन और विभाग को चाहिए कि मौजूद कोचों को या तो स्थायी किया जाए या अतिरिक्त कोचों की भी तैनाती की जाए ताकि युवाओं का खेलों के प्रति रुझान बढ़ सके।
-राम वर्मा, महासचिव, बैडमिंटन एसोसिएशन
खेलो इंडिया अभियान के तहत चार अस्थायी कोच उपलब्ध हैं। इसकी नियुक्ति की मांग को लेकर आलाधिकारियों को प्रस्ताव भी भेजा गया है। उम्मीद है कि इस पर जल्द कोई उचित कदम उठाए जाएंगे।
-विकास डोगरा, प्रबंधक स्पोर्ट्स काउंसिल
फोटो सहित